फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   Now calcium and BP medicines are also out of stock in the medical college.

Hardoi News: मेडिकल कॉलेज में अब कैल्शियम और बीपी की दवाएं भी खत्म

Sat, 21 Mar 2026 10:46 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2026 10:46 PM IST
विज्ञापन
Now calcium and BP medicines are also out of stock in the medical college.
फोटो-31 - मेडिकल कॉलेज के फार्मेसी में दवा लेते मरीज व तीमारदार। संवाद
हरदोई। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे मेडिकल कॉलेज में धड़ाम होते जा रहे हैं। हाल यह है कि कैल्शियम और बीपी तक की दवाओं के लिए मरीजों को मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ रहा है। दर्द और चोट की दवाएं पहले से ही नहीं मिल पा रही थीं।
विज्ञापन

मेडिकल कॉलेज में अब तो जीवन रक्षक दवाओं की श्रेणी में आने वालीं बीपी की दवाएं न मिलने से मरीजों की जान पर बन आ रही है। अस्पताल पहुंचने वाले बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को डॉक्टर पर्चा तो लिख रहे हैं लेकिन फार्मेसी की खिड़की से दवा उपलब्ध न होने का रटा-रटाया जवाब मिल रहा है। डाईक्लोफेनिक जेल ट्यूब, बीटाडीन और खांसी में प्रयोग किए जाने वाले कफ सिरप मिलते ही नहीं।
विज्ञापन

अब तो स्थिति यह है कि कैल्शियम और बीपी की दवाएं तक फार्मेसी के काउंटर पर नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की इस लापरवाही का सीधा असर गरीब मरीजों की जेब पर पड़ रहा है। जो दवाएं अस्पताल में मुफ्त मिलनी चाहिए उनके लिए तीमारदारों को निजी मेडिकल स्टोरों पर ऊंचे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। दवाओं की सप्लाई चेन में लंबे समय से बाधा बनी हुई है, इसे दूर नहीं किया जा पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन



केस-1- जटौली निवासी श्याम किशोर राजवंशी को चिकित्सक ने शुगर और उच्च रक्तचाप से संबंधित दवा लिखी। काउंटर पर पहुंचे तो छह दवाओं में से सिर्फ दो दवाएं ही मिलीं। बीपी संबंधित दवा काउंटर पर नहीं मिली। मरीज के तीमारदार मोहन ने बताया कि वह अभी मेडिकल स्टोर से दवा लेकर आए हैं। पांच दवाएं 70 रुपये में मिली हैं। बताया कि इतनी महंगी दवा लेने के लिए कई बार सोचना पड़ता है।


केस- 2- गोपामऊ के पैढ़ाई गांव निवासी खुशीराम अपनी पत्नी संतोष कुमारी की दवा लेने आए थे। उनके हाथ में चोट लग गई है और प्लास्टर हुआ है। पांच दवाओं में से सिर्फ तीन दवाएं मिलीं। इनमें जन औषधि केंद्र पर भी एक ही दवा मिली। एक दवा के लिए बाहर मेडिकल स्टोर पर जाना पड़ा।


भारी भरकम बजट फिर भी किल्लत
मेडिकल कॉलेज में दवाओं पर हर साल करीब 40 लाख रुपये के आसपास का बजट निर्धारित है। इसके बावजूद दवाओं की किल्लत हर वक्त बनी रहती है। वैसे कुछ लोग रोजाना दो हजार से अधिक मरीजों की ओपीडी को दवाओं की किल्लत की वजह बता रहे हैं लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि रोजाना आ रहे मरीजों को भी सभी दवाएं नहीं मिल रही हैं।




मेडिकल कॉलेज में दवाओं की उपलब्धता को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डिमांड करते ही दो से तीन दिन में दवा आ जाती है। अगर वेयर हाउस में दवाओं का स्टॉक है तो उसे तत्काल मंगवाकर मरीजों को वितरित किया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed