{"_id":"660d9b2723809362ff0ba4d5","slug":"not-paying-bills-taking-payment-in-cash-hardoi-news-c-213-1-hra1002-112732-2024-04-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: नहीं दे रहे बिल, नकद ले रहे भुगतान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: नहीं दे रहे बिल, नकद ले रहे भुगतान
Wed, 03 Apr 2024 11:38 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Wed, 03 Apr 2024 11:38 PM IST
विज्ञापन
हरदोई। निजी विद्यालयों में किताबों के प्रकाशकों ने मूल्य में 30 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी है। इससे अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ेगा।
वहीं, निजी विद्यालयों के किताबों का सेट खरीदने पर दुकानदार एक तो बिल नहीं दे रहे और दूसरा ऑनलाइन भुगतान नहीं ले रहे हैं। अभिभावकों के विरोध करने पर वह दूसरी दुकान पर जाने की बात कहते हैं, मगर अन्य दुकानों पर उक्त प्रकाशक की किताबें नहीं मिलती हैं।
शिक्षा सत्र के शुरू होते ही सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध विद्यालयों में शिक्षण कार्य शुरू हो गया है। विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबों से शिक्षण कार्य के निर्देश है, मगर इसके बावजूद निजी प्रकाशकों की किताबों को खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है।
वहीं निजी प्रकाशकों ने किताबों के दाम 30 प्रतिशत बढ़ा दिए है। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कक्षा छह का सेट चार से लेकर छह हजार तक में तैयार हो रहा है।
विज्ञापन
कक्षा छह से 12 तक किताबों के सेट
कक्षा छह : 4782 रुपये
कक्षा सात : 5264 रुपये
कक्षा आठ : 6259 रुपये
कक्षा नौ व 10 : 6872 रुपये
कक्षा 11 व 12वीं : 7249 रुपये
एनसीईआरटी की किताबों का मूल्य
9वीं व 10वीं का सेट : 850 से 1250 रुपये तक
11वीं और 12वीं का सेट : 1230 रुपये से 15 सौ रुपये तक
सरकार निर्धारित करे किताबों के मूल्य
अभिभावक संघ के अध्यक्ष गोपाल द्विवेदी ने कहा कि जिस प्रकार अन्य प्रांतों में निजी प्रकाशकों की किताबों का मूल्य सरकार निर्धारित करती है, उसी प्रकार शासन को यहां भी निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का मूल्य निर्धारित करने चाहिए। इस संबंध में संघ का प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से मिलेगा और समस्या के निदान की मांग करेगा।
पुस्तकों के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है। निर्धारित कीमत से अधिक कीमत लिए जाने का मामला संज्ञान में नहीं आया है। रसीद न दिया जाना गलत है। जल्द ही इसकी जांच कराते हुए कार्रवाई की जाएगी।
सुनील कुमार त्रिवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट
विज्ञापन
वहीं, निजी विद्यालयों के किताबों का सेट खरीदने पर दुकानदार एक तो बिल नहीं दे रहे और दूसरा ऑनलाइन भुगतान नहीं ले रहे हैं। अभिभावकों के विरोध करने पर वह दूसरी दुकान पर जाने की बात कहते हैं, मगर अन्य दुकानों पर उक्त प्रकाशक की किताबें नहीं मिलती हैं।
शिक्षा सत्र के शुरू होते ही सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध विद्यालयों में शिक्षण कार्य शुरू हो गया है। विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबों से शिक्षण कार्य के निर्देश है, मगर इसके बावजूद निजी प्रकाशकों की किताबों को खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है।
विज्ञापन
वहीं निजी प्रकाशकों ने किताबों के दाम 30 प्रतिशत बढ़ा दिए है। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कक्षा छह का सेट चार से लेकर छह हजार तक में तैयार हो रहा है।
विज्ञापन
कक्षा छह से 12 तक किताबों के सेट
कक्षा छह : 4782 रुपये
कक्षा सात : 5264 रुपये
कक्षा आठ : 6259 रुपये
कक्षा नौ व 10 : 6872 रुपये
कक्षा 11 व 12वीं : 7249 रुपये
एनसीईआरटी की किताबों का मूल्य
9वीं व 10वीं का सेट : 850 से 1250 रुपये तक
11वीं और 12वीं का सेट : 1230 रुपये से 15 सौ रुपये तक
सरकार निर्धारित करे किताबों के मूल्य
अभिभावक संघ के अध्यक्ष गोपाल द्विवेदी ने कहा कि जिस प्रकार अन्य प्रांतों में निजी प्रकाशकों की किताबों का मूल्य सरकार निर्धारित करती है, उसी प्रकार शासन को यहां भी निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का मूल्य निर्धारित करने चाहिए। इस संबंध में संघ का प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से मिलेगा और समस्या के निदान की मांग करेगा।
पुस्तकों के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है। निर्धारित कीमत से अधिक कीमत लिए जाने का मामला संज्ञान में नहीं आया है। रसीद न दिया जाना गलत है। जल्द ही इसकी जांच कराते हुए कार्रवाई की जाएगी।
सुनील कुमार त्रिवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट