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अभी धूल खा रहे हैं, ओमिक्रान आएगा तब चलवाएंगे वेंटीलेटर
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इमरजेंसी कक्ष में रखीं वेंटिलेटर मशीनें। संवाद
- फोटो : HARDOI
हरदोई। कोरोना संक्रमण काल के दौरान उपजे हालातों के बीच जिले को 45 वेंटिलेटर मिले लेकिन वर्तमान में ये जिला अस्पताल में बंद धूल फांक रहे हैं। यह हाल तब हैं जब कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने दस्तक दे दी है। जिम्मेदारों का कहना है कि ओमिक्रॉन के मरीज मिलने पर इनका प्रयोग होगा। सांस के मरीजों के लिए नहीं। उन्हें रेफर किया जा रहा है।
जिले में मेडिकल कालेज का लोकार्पण हो चुका है। जिला चिकित्सालय मेडिकल कालेज के ही अधीन है। मेडिकल कालेज के लोकार्पण के साथ ही उम्मीद बढ़ी थी कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। हाल यह है कि अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों, दुर्घटना में घायल होने वाले लोगों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
लेकिन जिले में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेेमाल ही नहीं होता। जिला अस्पताल के पास 45 वेंटिलेटर हैं लेकिन इनका प्रयोग नहीं हो रहा है। कई मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें फौरन ही वेंटिलेटर की जरूरत होती है, लेकिन ऐसे मरीजों को भी हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ओमिक्रॉन की दस्तक के बीच स्वास्थ्य महकमा अलर्ट है पर वेंटिलेटर को किसी अन्य कार्य में इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा।
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मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ
जिला अस्पताल में आने वाले सांस व हृदय रोगियों को वेंटिलेटर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिससे कारण गंभीर मरीजों को लखनऊ रेफर होना पड़ रहा है। ऐसे में कई मरीज लखनऊ पहुंचने से पहले रास्ते में दम तोड़ रहे हैं।
मेडिकल कालेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता का कहना है कि सभी वेंटिलेटर क्रियाशील हैं। इन्हें चलाने के लिए भी पर्याप्त स्टाफ भी है। इसके बाद भी वेंटिलेटर तालों में बंद होने के सवाल पर कहा कि सांस और हृदय के मरीजों के लिए वेंटिलेटर नहीं चलाए जा सकते। ओमिक्रॉन के मद्देनजर वेंटिलेटर सुरक्षित रखे हैं।
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जिले में मेडिकल कालेज का लोकार्पण हो चुका है। जिला चिकित्सालय मेडिकल कालेज के ही अधीन है। मेडिकल कालेज के लोकार्पण के साथ ही उम्मीद बढ़ी थी कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। हाल यह है कि अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों, दुर्घटना में घायल होने वाले लोगों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
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लेकिन जिले में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेेमाल ही नहीं होता। जिला अस्पताल के पास 45 वेंटिलेटर हैं लेकिन इनका प्रयोग नहीं हो रहा है। कई मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें फौरन ही वेंटिलेटर की जरूरत होती है, लेकिन ऐसे मरीजों को भी हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ओमिक्रॉन की दस्तक के बीच स्वास्थ्य महकमा अलर्ट है पर वेंटिलेटर को किसी अन्य कार्य में इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा।
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मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ
जिला अस्पताल में आने वाले सांस व हृदय रोगियों को वेंटिलेटर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिससे कारण गंभीर मरीजों को लखनऊ रेफर होना पड़ रहा है। ऐसे में कई मरीज लखनऊ पहुंचने से पहले रास्ते में दम तोड़ रहे हैं।
मेडिकल कालेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता का कहना है कि सभी वेंटिलेटर क्रियाशील हैं। इन्हें चलाने के लिए भी पर्याप्त स्टाफ भी है। इसके बाद भी वेंटिलेटर तालों में बंद होने के सवाल पर कहा कि सांस और हृदय के मरीजों के लिए वेंटिलेटर नहीं चलाए जा सकते। ओमिक्रॉन के मद्देनजर वेंटिलेटर सुरक्षित रखे हैं।