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सीएचसी के पीछे तालाब में मिला नवजात बच्ची का शव

Sat, 22 Oct 2016 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई Updated Sat, 22 Oct 2016 11:47 PM IST
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Newborn girl's body found in pond behind CHC
प्रतीकात्मक चित्र: नवजात शिशु

माधौगंज।  कसबे में सीएचसी के पीछे तालाब में शनिवार सुबह नवजात बच्ची का शव पड़ा मिला। बच्ची की नाल में प्रसव के दौरान अस्पतालों में लगाई जाने वाली चिमटी भी लगी थी। कसबे में कोई दूसरा अस्पताल नहीं है और सीएचसी अधीक्षक का दावा है कि उनके यहां बच्ची का जन्म नहीं हुआ है। इससे आशंका है सीएचसी के किसी स्टाफ ने ही अवैध रूप से प्रसव कराकर बच्चे को तालाब में फिंकवा दिया है। पुलिस ने नवजात का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।

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माधौगंज के मोहल्ला नेहरू नगर स्थित सीएचसी के पास तालाब है। शनिवार सुबह शौच गए लोगों ने तालाब में किनारे नवजात बच्ची का शव पड़ा देखा। सूचना मिलने पर दोपहर करीब 12 बजे माधौगंज थाने की पुलिस पहुंची और नवजात बच्ची के शव को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। शव के पास एक काला दुपट्टा भी पड़ा था। बच्ची की नाल में चिमटी लगी थी। ऐसी चिमटी अस्पतालों में डिलीवरी होने पर ही लगाई जाती है।
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इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि बच्ची किसी अस्पताल में ही पैदा हुई है। माधौगंज नगर सीएचसी से अलावा दूसरा अस्पताल में नहीं है। लोगों का कहना है कि कुछ नर्सें अवैध रूप से अपने घरों में डिलीवरी कराती हैं। बालिका की मां की डिलीवरी भी किसी न किसी नर्स ने ही अवैध रूप से कराई होगी। सीएचसी अधीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि सीएचसी में 19 से 21 अक्तूबर तक 25 डिलवरी हुई। इसमें 2 बच्चे मृत पैदा हुए। ये रूकनापुर और फिरोजपुर की महिलाओं को हुए थे। डिलीवरी के बाद चिमटी लगाकर ही नाल काटी जाती है। इस तरह की चिमटी अस्पताल में प्रसव में ही लगाई जाती है। अगर बच्ची की नाल में चिमटी लगी थी तो अस्पताल से जुड़े किसी एक्सपर्ट ने ही प्रसव कराया है। प्रभारी थानाध्यक्ष शेर सिंह राजपूत ने बताया कि शव एक दिन पुराना लग रहा था। ऐसा लग रहा है कि प्रसव के बाद इसे यहां फेंका गया है।
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 माधौगंज क्षेत्र के गांव परनखा में कब्रिस्तान के बाहर 30 जून को मिली नवजात के इलाज में की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इस पर डीएम और निदेशालय स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए टीमें बनाई थीं। पिछले महीने डिप्टी डॉक्टर डॉक्टरों, एएनएम, नर्सों के बयान लेने आई थीं। किंतु अभी तक नवजात की मौत के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मामले में आरोपी जिला महिला अस्पताल के प्रभारी डॉ. एसके गुप्ता डिप्टी डायरेक्टर बन गए हैं। कुल मिलाकर नवजात की मौत को प्रशासन ने फाइलों में दफन कर दिया है। सीएमओ ने डॉ. एके श्रीवास्तव का कहना है कि जिलास्तर से जांच कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। अब निदेशालय के अधिकारी जांच कर रहे हैं। संबंधित डॉक्टर व फार्मासिस्ट के बयान दर्ज किए गए हैं। कार्रवाई शासन स्तर से ही की जाएगी।

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