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Hardoi News: यूपीआई शुल्क की नई व्यवस्था से बढ़ेगा बोझ, असमंजस में ग्राहक व व्यापारी

Sat, 19 Sep 2026 11:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 11:12 PM IST
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New UPI fee structure to increase burden; customers and merchants in a state of uncertainty.
हरदोई। यूपीआई से भुगतान में बदली गई व्यवस्था ने बाजार में ग्राहकों और दुकानदारों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। नई व्यवस्था लागू होने से छोटे-बड़े व्यापारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। भले ही दो हजार से अधिक भुगतान पर ग्राहकों से चार्ज नहीं लिया जा रहा हो लेकिन संभावना है कि व्यापारी इस वित्तीय बोझ के मार्जिन को सामग्री की कीमतों में बढ़ा सकते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त कर का खामियाजा आम ग्राहकों को ही भुगतना पड़ा है।
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सरकार ने 2000 से अधिक का मोबाइल से भुगतान करने पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार दो से तीन हजार रुपये का यूपीआई से भुगतान करने पर 12 रुपये अतिरिक्त अदा करने पड़ेंगे। हालांकि सरकार के फैसले में इस अतिरिक्त चार्ज का वहन ग्राहक को नहीं करना है बल्कि व्यापारी को देना होगा। बाजार में इसको लेकर बड़े भुगतान में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में दुकानदार पहले तो 2000 से अधिक का भुगतान नहीं ले रहे हैं वहीं इसका असर आने वाले दिनों में भी दिखाई पड़ सकता है।
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बता दें कि कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक या खाद्य सामग्री की खरीदारी करने पर व्यापारी इस अतिरिक्त चार्ज को सामग्री की कीमतों में जोड़ सकते हैं। ऐसे में इसका भी भुगतान आम जनता को ही करना पड़ सकता है। फिलहाल यूपीआई से भुगतान को लेकर ग्राहक व व्यापारी दोनों ही असमंजस में हैं।
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ऐसे समझें शुल्क
दो हजार रुपये तक : कोई शुल्क नहीं।
तीन हजार रुपये तक : 12 रुपये।
पांच हजार रुपये तक : 20 रुपये।
10 हजार रुपये तक : 40 रुपये।
50 हजार रुपये तक : पात्र होने पर 200 रुपये।
75 हजार रुपये या अधिक के भुगतान पर : अधिकतम 300 रुपये।


लोगों की प्रतिक्रियाएं
यूपीआई व्यापार और डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। व्यापारियों का मार्जिन पहले ही सीमित है ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त कर डालना व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाएगा। अतिरिक्त शुल्क का बोझ स्वीकार नहीं। -अब्बाद हुसैन, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल


यूपीआई में भुगतान पर अतिरिक्त कर ठीक नहीं है। इसका असर ग्राहक और व्यापारी दोनों पर पड़ेगा। सरकार नियम पर पुनर्विचार करे। सरकार ने डिजिटल को बढ़ावा दिया और अब हर कोई यूपीआई का प्रयोग करता है तो उस पर कर लगाना उचित नहीं है। -पवन जैन, प्रदेश उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन


सरकार एक तरफ डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रही है दूसरी तरह कर के नए नियम लागू कर रही है, यह उचित नहीं है। मंदी का दौर पहले से ही चल रहा है। अनावश्यक कर ग्राहक और व्यापारी दोनों के लिए उचित नहीं हैं। -विभू गुप्ता, युवा प्रदेश मंत्री, व्यापार मंडल
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यूपीआई से भुगतान आसान है लेकिन बड़े भुगतान पर शुल्क की व्यवस्था लागू होने से कारोबारियों को परेशानी होगी। इससे एक बार फिर नकदी का चलन लौटेगा। -राहुल श्रीवास्तव, ग्राहक


सरकार की तरफ से लगाया गया कर आम जनता को ही भुगतना पड़ता है। दुकानदार उस अतिरिक्त कर को किसी न किसी तरह से वसूल लेगा, परेशान आम जनता को ही होना पड़ेगा। -अनुराग सक्सेना, ग्राहक
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