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Hardoi News: मेडिकल कॉलेज फीडर की नई लाइन तीन साल बाद पूरी, दौड़ा करंट
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज और स्थानीय उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। मेडिकल कॉलेज फीडर की लाइन को लेकर पिछले तीन वर्षों से चला आ रहा लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। बिजली विभाग की ओर से बिछाई गई नई लाइन का काम पूरा कर लिया गया है और इस पर सफलता पूर्वक करंट भी दौड़ने लगा है।
मेडिकल कॉलेज के लिए अलग और स्वतंत्र फीडर लाइन बनाने की योजना पिछले तीन साल से कछुआ गति से चल रही थी। कभी बजट की कमी तो कभी तकनीकी अड़चनों के कारण काम अटका हुआ था। इस वजह से मेडिकल कॉलेज को सामान्य आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता था। अक्सर वोल्टेज की समस्या और घोषित-अघोषित बिजली कटौती के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। विगत जनवरी से कार्यदायी संस्था पर विभाग की ओर से सख्ती शुरू की गई, तो कार्य ने गति पकड़ी।
इसके चलते 220 केवी मन्नापुरवा से मेडिकल कॉलेज तक 33 केवीए की अंडर ग्रांउड लाइन बना दी गई है। बिजली लाइन बनने के बाद उसको चार्ज भी कर दिया गया है। वर्तमान में बिजली लाइन पर करंट दौड़ रहा है। बिजली लाइन के साथ ही मेडिकल कॉलेज परिसर में 33 केवीए का उपकेंद्र भी स्थापित होना है। जिसके पैनल स्थापित हो गए है। सिर्फ एक ट्रांसफार्मर लगाने का कार्य शेष रह गया है।
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मरीजों और तीमारदारों को होगा फायदा
मेडिकल कॉलेज के उपकेंद्र के शुरू होने से मेडिकल कॉलेज को 24 घंटे बिना कटौती के बिजली मिलेगी। ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी संवेदनशील मशीनें बिना किसी रुकावट के काम कर सकेंगी। आम उपभोक्ताओं की लाइन से अलग होने के कारण, स्थानीय स्तर पर होने वाले फॉल्ट का असर अस्पताल की बिजली पर नहीं पड़ेगा।
बिजली लाइन को चार्ज कर दिया गया है। एक ट्रांसफार्मर आना शेष है। उसके आते ही बिजली लाइन पर लोड डाल दिया जाएगा और मेडिकल कॉलेज उपकेंद्र से संचालित होने लगेंगा। इस माह के अंतिम सप्ताह में आपूर्ति शुरू हो जाएगी। -राजीव भट्ट, अधीक्षण अभियंता
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मेडिकल कॉलेज के लिए अलग और स्वतंत्र फीडर लाइन बनाने की योजना पिछले तीन साल से कछुआ गति से चल रही थी। कभी बजट की कमी तो कभी तकनीकी अड़चनों के कारण काम अटका हुआ था। इस वजह से मेडिकल कॉलेज को सामान्य आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता था। अक्सर वोल्टेज की समस्या और घोषित-अघोषित बिजली कटौती के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। विगत जनवरी से कार्यदायी संस्था पर विभाग की ओर से सख्ती शुरू की गई, तो कार्य ने गति पकड़ी।
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इसके चलते 220 केवी मन्नापुरवा से मेडिकल कॉलेज तक 33 केवीए की अंडर ग्रांउड लाइन बना दी गई है। बिजली लाइन बनने के बाद उसको चार्ज भी कर दिया गया है। वर्तमान में बिजली लाइन पर करंट दौड़ रहा है। बिजली लाइन के साथ ही मेडिकल कॉलेज परिसर में 33 केवीए का उपकेंद्र भी स्थापित होना है। जिसके पैनल स्थापित हो गए है। सिर्फ एक ट्रांसफार्मर लगाने का कार्य शेष रह गया है।
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मरीजों और तीमारदारों को होगा फायदा
मेडिकल कॉलेज के उपकेंद्र के शुरू होने से मेडिकल कॉलेज को 24 घंटे बिना कटौती के बिजली मिलेगी। ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी संवेदनशील मशीनें बिना किसी रुकावट के काम कर सकेंगी। आम उपभोक्ताओं की लाइन से अलग होने के कारण, स्थानीय स्तर पर होने वाले फॉल्ट का असर अस्पताल की बिजली पर नहीं पड़ेगा।
बिजली लाइन को चार्ज कर दिया गया है। एक ट्रांसफार्मर आना शेष है। उसके आते ही बिजली लाइन पर लोड डाल दिया जाएगा और मेडिकल कॉलेज उपकेंद्र से संचालित होने लगेंगा। इस माह के अंतिम सप्ताह में आपूर्ति शुरू हो जाएगी। -राजीव भट्ट, अधीक्षण अभियंता