{"_id":"6ab95699623cbd24de0e9530","slug":"neither-dry-wood-nor-space-was-available-for-the-cremation-the-woman-was-buried-hardoi-news-c-213-1-sknp1042-157462-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: दाह संस्कार के लिए न सूखी लकड़ी मिली न जगह, महिला को दफन किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: दाह संस्कार के लिए न सूखी लकड़ी मिली न जगह, महिला को दफन किया
विज्ञापन
हरदोई। शहर कोतवाली क्षेत्र में सवायजपुर मार्ग पर समुदा के पास शनिवार को सड़क हादसे में मृत मां बेटे समेत तीन लोगों का अंतिम संस्कार रविवार को किया गया। मृतकों में शामिल महिला के दाह संस्कार के लिए न तो सूखी लकड़ी मिली और न ही सूखी जगह। ऐसे में उन्हें दफन किया गया। अविवाहित होने के कारण उनके बेटे को भी दफन किया गया।
लाेनार कोतवाली क्षेत्र के भुवनपुरवा निवासी सुहेल (25) की बहन कामिनी को प्रसव पीड़ा के कारण शुक्रवार को महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को प्रसव होना था। इस जानकारी पर सुहेल अपने बहनोई (कामिनी के पति) रमेश (32) के साथ शुक्रवार रात भुवनपुरवा पहुंचा था। शनिवार को सुहेल अपनी मां विद्यावती और बहनोई रमेश के साथ अस्पताल जा रहा था।
इस दौरान हादसे में तीनों की मौत हो गई थी। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव सौंप दिए गए थे। अंतिम संस्कार के लिए रविवार सुबह न तो सूखी लकड़ी मिली और न ही अंतिम संस्कार स्थल। ऐसे में विद्यावती का शव दफन कर दिया गया। बेटे सुहेल का शव भी दफनाया गया। रमेश का दाह संस्कार हुआ।
विज्ञापन
कामिनी ने बेटे को दिया जन्म, निहारकर बिलख पड़ी
महिला अस्पताल में भर्ती कामिनी का प्रसव ऑपरेशन से रविवार सुबह आठ बजे हुआ। उन्होंने बेटे को जन्म दिया। कामिनी के पति की शनिवार को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। प्रसव होने के बाद कामिनी काफी देर तक बेटे को निहारती रही और फिर बिलख पड़ी। साथ मौजूद परिवार की महिलाओं ने इसे विधि का विधान बताते हुए उन्हें समझाकर संभाला। कामिनी के सात साल की एक बेटी भी है।
विज्ञापन
लाेनार कोतवाली क्षेत्र के भुवनपुरवा निवासी सुहेल (25) की बहन कामिनी को प्रसव पीड़ा के कारण शुक्रवार को महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को प्रसव होना था। इस जानकारी पर सुहेल अपने बहनोई (कामिनी के पति) रमेश (32) के साथ शुक्रवार रात भुवनपुरवा पहुंचा था। शनिवार को सुहेल अपनी मां विद्यावती और बहनोई रमेश के साथ अस्पताल जा रहा था।
विज्ञापन
इस दौरान हादसे में तीनों की मौत हो गई थी। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव सौंप दिए गए थे। अंतिम संस्कार के लिए रविवार सुबह न तो सूखी लकड़ी मिली और न ही अंतिम संस्कार स्थल। ऐसे में विद्यावती का शव दफन कर दिया गया। बेटे सुहेल का शव भी दफनाया गया। रमेश का दाह संस्कार हुआ।
विज्ञापन
कामिनी ने बेटे को दिया जन्म, निहारकर बिलख पड़ी
महिला अस्पताल में भर्ती कामिनी का प्रसव ऑपरेशन से रविवार सुबह आठ बजे हुआ। उन्होंने बेटे को जन्म दिया। कामिनी के पति की शनिवार को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। प्रसव होने के बाद कामिनी काफी देर तक बेटे को निहारती रही और फिर बिलख पड़ी। साथ मौजूद परिवार की महिलाओं ने इसे विधि का विधान बताते हुए उन्हें समझाकर संभाला। कामिनी के सात साल की एक बेटी भी है।