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Hardoi News: खानपान में लापरवाही और जागरूकता की कमी से गर्भवतियों में बढ़ रहा जोखिम

Tue, 09 Jun 2026 11:29 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:29 PM IST
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Negligence in eating habits and lack of awareness are increasing the risk among pregnant women.
फोटो- 40- वरिष्ठ महिला रोग ​विशेषज्ञ डॉ. बुशरा बहार। संवाद
हरदोई। सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ शिशु को लेकर किए जा रहे तमाम सरकारी दावे कागजी साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट बता रही है कि सैकड़ों गर्भवती हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से जूझ रही हैं। उनमें पोषण की कमी देखी जा रही है। यह कमी न केवल मां के लिए जानलेवा साबित हो रही है बल्कि गर्भ में पल रहे नवजात को भी प्रभावित कर रही है। ओपीडी में आने वाली गर्भवतियों के शरीर में सात तरह की कमियां पाई जा रही हैं जिनमें पांच बेहद आम हो चुकी हैं।
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मेडिकल कॉलेज के जिला महिला अस्पताल में आने वालीं गर्भवती महिलाओं की तमाम प्रकार की जांच की जाती हैं। रक्त चाप की जांच के साथ ही यूरिन में प्रोटीन की उपस्थिति भी जांची जाती है। गर्भवतियों की एएनसी के दौरान उनके शरीर में कई प्रकार की कमियां भी पाई जाती हैं। बता दें कि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार करीब 5,679 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत की गईं। इनमें 563 महिलाओं में पोषण की कमी से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का खतरा दर्ज किया गया है।
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वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. बुशरा बहार ने बताया कि पांच कमियां आज हर दूसरी गर्भवती की रिपोर्ट में सामने आ रही हैं। इनमें आयरन की कमी से एनीमिया, विटामिन डी की कमी से शुगर व उच्च रक्तचाप, कैल्शियम की कमी, फोलेट (फोलिक एसिड) की कमी, विटामिन बी-12 की कमी से मेगालोब्लास्टिक एनीमिया और बच्चे का दिमाग पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा दो अन्य कमियों में आयोडीन की कमी और प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण (पीईएम) की कमी से इसका सीधा असर बच्चे के विकास पर पड़ता है।
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गर्भवती की थाली में पोषण जरूरी
डाॅक्टर का कहना है कि इन कमियों को सिर्फ दवा के भरोसे ठीक नहीं किया जा सकता। इसके लिए खानपान की आदतों में बदलाव जरूरी है। गर्भवती महिलाओं की थाली में केवल पेट भरने का सामान नहीं बल्कि वास्तविक पोषण (आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन) होना चाहिए। इसके साथ ही सरकार की ओर से मिलने वाली सप्लीमेंट गोलियों को नियमित खाना भी जरूरी है।



गर्भवतियों में बढ़ रही एनीमिया
जननी सुरक्षा योजना के तहत महिला को गर्भधारण से प्रसव होने तक छह हजार रुपये और राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत संतुलित पोषण आहार भी दिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में हर माह जांच शिविर भी लगाए जा रहे हैं। फिर भी महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक गंभीर एनीमिया से जनवरी में 87, फरवरी में 98, मार्च में 88, अप्रैल में 79 और मई में 70 महिलाएं चिह्नित की गई हैं।
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