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कुदरत का कहर : आंधी-पानी से आम आदमी की पहुंच से दूर हो रहा आम
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फोटो 25: इनायतपुर में बाग में खड़े आम के पेड़। संवाद
शाहाबाद। कुदरत के कहर से रसीला आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। आए दिन आ रही आंधी-बारिश ने पेड़ों को फलविहीन कर दिया है। इससे व्यापारियों और बागवानों में चिंता है। लागत और कम उत्पादन से आम की कीमतों के बढ़ने की आशंका है। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए बाग को दो साल के लिए किराए पर लेकर रात-दिन फसल की रखवाली की लेकिन कुदरत के कहर से व्यापारियों के सपने चकनाचूर हो गए। वैसे नगर में 15 मई तक हाथ ठेली से पाल के आम बिकने लगते थे लेकिन इस बार आम बेचने वाले खरबूजा-तरबूज बेचते नजर आ रहे हैं।
आम की मंडी में अभी तक सन्नाटा पसरा है। मलिहाबाद के बाद आम का उत्पादन यहां दूसरे नंबर पर है। कोलकाता, बिहार, सासाराम, बनारस, आजमगढ़, मऊ आदि जनपदों से व्यापारी हर साल यहां आम खरीदने आते हैं। इस साल फसल पर कहर की वजह से बाहर के व्यापारियों के आने की संभावना कम नजर आ रही है।
ये हैं आम की वैराइटी
रसीले आमों में गुलाब खास खासुल खास, कृष्ण भोग, शरबती बकरैन, दशहरी लंगड़ा, मुंबई हुस्नआरा, अल्फोंसो, सफेदा, गुलाब जामुन, शकर चीनी चौसा, रटौल शमशाद पसंद, मकबूल पसंद, ब्रांड ऑफ एशिया, आम्रपाली, तैमूरिया आदि।
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मोहल्ला मौलागंज निवासी पूर्व सभासद बागवान तारिक खान के मुताबिक, मौसम में लगातार बदलाव और आंधी-पानी से 50 प्रतिशत से अधिक आम की फसल प्रभावित हुई है। इस समय आम में जाली पड़ जाने से फल का वजन बढ़ गया है। तेज हवा के झोंकों से आम टूट कर जमीन पर गिर रहे हैं। पाल लगाना मजबूरी है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो डाल का आम मिलना मुश्किल हो जाएगा।
मोहल्ला सुलेमानी निवासी बाग स्वामी शब्बन खान ने बताया कि मौसम में बदलाव से आम की फसल प्रभावित हुई है। बाग को किराए पर लेने वालों को रात-दिन मेहनत करनी पड़ती है इसके बावजूद इस बार नुकसान उठाना पड़ सकता है। नुकसान की भरपाई तय किराए में से किए जाने का प्रयास किया जाएगा।
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आम की मंडी में अभी तक सन्नाटा पसरा है। मलिहाबाद के बाद आम का उत्पादन यहां दूसरे नंबर पर है। कोलकाता, बिहार, सासाराम, बनारस, आजमगढ़, मऊ आदि जनपदों से व्यापारी हर साल यहां आम खरीदने आते हैं। इस साल फसल पर कहर की वजह से बाहर के व्यापारियों के आने की संभावना कम नजर आ रही है।
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ये हैं आम की वैराइटी
रसीले आमों में गुलाब खास खासुल खास, कृष्ण भोग, शरबती बकरैन, दशहरी लंगड़ा, मुंबई हुस्नआरा, अल्फोंसो, सफेदा, गुलाब जामुन, शकर चीनी चौसा, रटौल शमशाद पसंद, मकबूल पसंद, ब्रांड ऑफ एशिया, आम्रपाली, तैमूरिया आदि।
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मोहल्ला मौलागंज निवासी पूर्व सभासद बागवान तारिक खान के मुताबिक, मौसम में लगातार बदलाव और आंधी-पानी से 50 प्रतिशत से अधिक आम की फसल प्रभावित हुई है। इस समय आम में जाली पड़ जाने से फल का वजन बढ़ गया है। तेज हवा के झोंकों से आम टूट कर जमीन पर गिर रहे हैं। पाल लगाना मजबूरी है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो डाल का आम मिलना मुश्किल हो जाएगा।
मोहल्ला सुलेमानी निवासी बाग स्वामी शब्बन खान ने बताया कि मौसम में बदलाव से आम की फसल प्रभावित हुई है। बाग को किराए पर लेने वालों को रात-दिन मेहनत करनी पड़ती है इसके बावजूद इस बार नुकसान उठाना पड़ सकता है। नुकसान की भरपाई तय किराए में से किए जाने का प्रयास किया जाएगा।

फोटो 25: इनायतपुर में बाग में खड़े आम के पेड़। संवाद

फोटो 25: इनायतपुर में बाग में खड़े आम के पेड़। संवाद