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नारायनपुर को विकास की दरकार

Fri, 07 Aug 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई Updated Fri, 07 Aug 2015 11:36 PM IST
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Naraynpur development needs

तहसील क्षेत्र के नारायनपुर गांव के अंतर्गत आने वाले

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9 मजरे अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। इन मजरों में आजादी के बाद से अभी तक समुचित विकास नहीं हो पाया, जबकि मजराें की कुल आबादी करीब 6 हजार से ज्यादा है, इनमें 3 हजार मतदाता शामिल हैं।

आलम यह है कि गांव में पक्की सड़कों का नामोनिशान तक नहीं है। अर्से से पहले बिछे खड़ंजे की हालत भी खस्ताहाल है, जिस पर पैदल तो दूर वाहन सवार भी नहीं निकल पा रहे। गांव की कुछ गलियां अभी तक कच्ची है, जिनमें बरसात का पानी भरने से दलबल बन जाता है। जिससे कई दिनों तक आवागमन बाधित हो जाता है।

नारायनपुर के हुलासी ने बताया कि तीस वर्ष पहले गांव में खड़ंजा लगाया गया था, उसके बाद से मरम्मत तक नहीं कराई गई, जिससे खड़ंजा खस्ताहाल हो गया है। निकटवर्ती चार गांवों में स्कूल भी नहीं हैं, जिससे बच्चों को पढ़ने के लिए चार किमी दूर जाना पड़ता है। दूरी ज्यादा होने से कु छ बच्चे स्कूल जाते ही नहीं।

इधर, गांव विश्रामगंज में गलियारे पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं। गांव के रमेश ने बताया कि उनके गांव की हालत अन्य गांवों से ज्यादा बदतर है। न तो बिजली है न पीने के लिए पानी। गांव में लगे हैंडपंप खराब हैं। लोगों की मानेे तो पूरे गांव में कुछ ही लोगाें के पहचान पत्र व राशन कार्ड बने है।

आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान समस्याआें की ओर ध्यान नहीं देते है। उधर, रामनगर के गलियारों में जलभराव है। गांव के रामखेलावान ने बताया कि पास में बेता नाला होने से गांव में अक्सर पानी भर जाता है जिससे लोगाें का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है।

वहीं दूसरे पक्ष के लोगों का कहना है सरकार की किसी भी निधि से गांव में कोई भी विकास कार्य नहीं हो रहा है। सांसद व विधायक भी अपनी निधि का उपयोग गांव का विकास करने में नहीं कर रहे है। उधर, ग्राम प्रधान गंगाराम ने आरोपों को गलत बताया और कहा कि सीमित संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा कार्य कराने की कोशिश की।

स्कूल के संबंध में उन्होेंने बीएसए को पत्र भेजा, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा कि जिस सड़क को बनाने की कोशिश करते, उस पर किसी न किसी ग्रामीण की आपत्ति लगती, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहा।

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