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सूखे कुएं में नमी होने पर बनती है मेथेन गैस
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:49 PM IST
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कुएं में झांकते लाोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हरदोई। सूखे और गहरे कुओं में नमी होने पर मार्स गैस (मेथेन) बन जाती है। ये गैस बहुत जहरीली और जानलेवा होती है। कुएं में 6-7 फिट तक इसकी लेयर बनती है। गैस के जहरीले होने का अंदाजा इससे लगाया जाता है कि इसके करीब आते ही नीम की पत्तियां तक झुलस जाती हैं।
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जीआईसी के प्रधानाचार्य और केमिस्ट्री के प्रवक्ता योगेंद्र कुमार ने बताया कि बिल्कुल सूखे कुओं में ऐसी गैस बनने की आशंका न के बराबर रहती है। बरसात होने पर कुओं की सतह नम हो जाती है। इससे कुएं में पड़ी गंदगी और सतह में सड़न होने लगती है। इसी से सीएच 4 गैस यानि मार्स गैस (मेथेन) बन जाती है। गैस की लेयर कुएं की सतह से 6 से 7 फिट तक ऊपर आ जाती है। ऐसे कुओं में उतरने से जान चली जाती है।
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कैसे करें पहचान
योगेंद्र कुमार ने बताया कि बारिश में सूखे कुओं में उतरने से पहले नीम का लौछा रस्सी के सहारे कुएं में डालें। अगर पत्ती झुलस जाए तो समझ लीजिए की कुएं में जहरीली गैस है। इसके अलावा जलती लालटेन भी जहरीली गैस के प्रभाव से बुझ जाती है। ऐसे कुएं में अगर कोई गिरा हो तो उसे निकालने के लिए फायर ब्रिगेड और प्रशासन को सूचना दें।
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एक दूसरे को बचाने में चली गईं तीन जानें
हरदोई। बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के गांव टोलवा आटदानपुर के मजरा पहाड़पुर में गुरुवार को कुएं की जहरीली गैस की चपेट मेें आने से रामरतन, उसके बेटे मनोज और भाई प्रमोद की मौत हो गई। पड़िया को निकालने कुएं में उतरे रामरतन जहरीली गैस की चपेट में आने से बेहोश हो गए। पिता को बचाने के लिए हड़बड़ाहट में बेटा मनोेज भी उतर गया। भाई और भतीजे की जान संकट में देख चंद्रपाल भी कुएं में उतर गए। इस तरह एक दूसरे को बचाने में परिवार के तीन लोगों की जान चली गई।
परिवार के लिए काल बन गई पड़िया
रामरतन तीन भाइयों में बड़ा था। उनकी तीन संतानों में मनोज सबसे छोटा था। रामरतन से छोटे चंद्रपाल के एक पुत्र और दो बेटियां हैं। मनोज के एक पुत्र और एक पुत्री है। रामरतन ने एक भैंस पाल रखी थी। एक सप्ताह पूर्व भैंस ने पड़िया दी थी। यही पड़िया परिवार के लिए काल बन गई।
बीस फीट गहरे कुएं में नहीं था पानी
रामरतन के घर के बाहर बना 20 फीट गहरा कुआं ऊपर तक पक्का बंध है। इस कुएं में कई साल से पानी नहीं है। तीन साल पहले अच्छी बारिश में कुछ पानी आ गया था। इसके बाद से कुआं बिल्कुल सूखा पड़ा था। इस बारिश में कुएं में कुछ नमी आ गई थी। दरवाजे पर होने के बावजूद परिजनों ने कुएं को ढकवाया भी नहीं था। परिवार पर ये लापरवाही भी भारी पड़ गई।
इनसेट
सात फीट नीचे जाते ही बुझ गई लालटेन
दमकलकर्मी गांव पहुंचे और कुएं का जायजा लिया। इसके बाद घर से लालटेन मंगवाई। उसे जलवाकर रस्सी के सहारे नीचे डाला। करीब सात फीट नीचे जाते ही लालटेन बुझ गई। इससे कुएं में जहरीली गैस होने की पुष्टि हो गई। इसके बाद दमकलकर्मियों ने कुएं में ऊपर तक पानी भरवाया। फिर रस्से के सहारे कांटा डालकर शवों को बाहर निकाला गया।