{"_id":"8afa4e14d17b2133f065165ecfb503f3","slug":"meet-the-seven-lives-you-mummy-mother-that-is-my-wish-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सात जनम तक तुम्ही मिलो मां, यही मेरी कामना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सात जनम तक तुम्ही मिलो मां, यही मेरी कामना
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sun, 10 May 2015 12:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हर किसी की जिंदगी में मां सबसे अहम होती है। मां खुद तो भूखा रह लेती है,
विज्ञापन
किंतु अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी जरूर जुटाती है। इसके लिए चाहे
कुछ भी करना पड़े। बुखार से तपती मां अपने लिए भले ही दवा न खरीद पाए, पर
बच्चे को डाक्टर या इंजीनियर बनाने को फीस जरूर भरती है।
कई माताओं ने मुश्किल हालात से जूझकर अपने बच्चों को इस मुकाम पर पहुंचा दिया कि मुंह से बरबस निकल पड़ता है कि ‘मां तुझे सलाम’। मदर्स-डे पर प्रस्तुत है कुछ माताओं की दास्तां, जिन्होंने बच्चों के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।
कोई भी आपके लिए उतना नहीं कर सकता, जितना कि मां। यह मैंने अपने जीवन में भी देख लिया। मां ने खुद का जीवन तो सीमित संसाधनों में गुजारा, पर मुझे पढ़ा-लिखाकर रेलवे का सीनियर सेक्शन इंजीनियर बना दिया, पर दुखद बात यह है कि मदर्स-डे से तीन दिन पहले मां हमें सदा के लिए छोड़कर चली गई।
यह कहना है बोर्डिंग हाउस निवासी अनुराग त्रिपाठी का। लोको वर्कशाप लखनऊ में सीनियर सेक्शन इंजीनियर के पद पर तैनात अनुराग का कहना है जो कुछ भी हैं, मां की बदौलत हैं। बताया कि जब पिताजी की मृत्यु हुई तो वे हाईस्कूल के छात्र थे। पिताजी रेलवे में थे।
मां किरन त्रिपाठी ने पेंशन के पैसे खर्च कर हमको महाराष्ट्र से इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग दिलाई। मां ने हमारी पढ़ाई का खर्च कैसे पूरा किया, आज सोचकर आंख में आंसू आ जाते हैं। मां का त्याग ही है कि आज हम इस मुकाम पर हैं, पर दुख इस बात का है मदर्स-डे से तीन दिन पहले यानी गुरुवार को मां हमें छोड़कर इस दुनिया से विदा हो गई।
मदर्स डे को लेकर बाजारों में उपहारों की धूम एक दिन पहले शनिवार से ही दिखने लगी। गिफ्ट कार्नर उपहार से सजे थे। उधर, स्प्रिंग डेल्स किंडर गार्टेन स्कूल में बच्चों ने मदर्स डे धूमधाम से मनाया। प्राचार्या अदिति गौड़ ने बच्चों को मदर्स डे के बारे में बताया। बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपनी अपनी मांओं को बधाई दी।
कई माताओं ने मुश्किल हालात से जूझकर अपने बच्चों को इस मुकाम पर पहुंचा दिया कि मुंह से बरबस निकल पड़ता है कि ‘मां तुझे सलाम’। मदर्स-डे पर प्रस्तुत है कुछ माताओं की दास्तां, जिन्होंने बच्चों के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया।
कोई भी आपके लिए उतना नहीं कर सकता, जितना कि मां। यह मैंने अपने जीवन में भी देख लिया। मां ने खुद का जीवन तो सीमित संसाधनों में गुजारा, पर मुझे पढ़ा-लिखाकर रेलवे का सीनियर सेक्शन इंजीनियर बना दिया, पर दुखद बात यह है कि मदर्स-डे से तीन दिन पहले मां हमें सदा के लिए छोड़कर चली गई।
यह कहना है बोर्डिंग हाउस निवासी अनुराग त्रिपाठी का। लोको वर्कशाप लखनऊ में सीनियर सेक्शन इंजीनियर के पद पर तैनात अनुराग का कहना है जो कुछ भी हैं, मां की बदौलत हैं। बताया कि जब पिताजी की मृत्यु हुई तो वे हाईस्कूल के छात्र थे। पिताजी रेलवे में थे।
मां किरन त्रिपाठी ने पेंशन के पैसे खर्च कर हमको महाराष्ट्र से इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग दिलाई। मां ने हमारी पढ़ाई का खर्च कैसे पूरा किया, आज सोचकर आंख में आंसू आ जाते हैं। मां का त्याग ही है कि आज हम इस मुकाम पर हैं, पर दुख इस बात का है मदर्स-डे से तीन दिन पहले यानी गुरुवार को मां हमें छोड़कर इस दुनिया से विदा हो गई।
मदर्स डे को लेकर बाजारों में उपहारों की धूम एक दिन पहले शनिवार से ही दिखने लगी। गिफ्ट कार्नर उपहार से सजे थे। उधर, स्प्रिंग डेल्स किंडर गार्टेन स्कूल में बच्चों ने मदर्स डे धूमधाम से मनाया। प्राचार्या अदिति गौड़ ने बच्चों को मदर्स डे के बारे में बताया। बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपनी अपनी मांओं को बधाई दी।