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गद्दे न रजाई, फिर क्यों करा रहे पढ़ाई!

Fri, 26 Dec 2014 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Fri, 26 Dec 2014 11:59 PM IST
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Mattress or quilt , then why were you studying !

कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों की छात्राएं इन दिनों

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कड़ाके की ठंड में ठिठुर रही हैं। इन स्कूलों में न तो रजाई गद्दे की व्यवस्था ठीक है, न ही छात्राओं को अभी तक ऊनी वस्त्र वितरित हुए। छात्राएं तख्त के अभाव में जमीन पर चटाई बिछाकर सोने को विवश हैं, जबकि एसडीएम ने औचक निरीक्षण कर व्यवस्था में खामियों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए बिस्तर आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।

बिलग्राम क्षेत्र अंतर्गत सांडी, मल्लावां, माधौगंज तथा बिलग्राम में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल संचालित हैं, जिसमें कक्षा 6 से 8 तक की बच्चियों के लिए सरकार ने आवासीय व्यवस्था की है, जिसके तहत नवनिर्मित हुए भवनों में पढ़ाई से सोने तक के कमरों की व्यवस्था के साथ कॉपी-किताबें, यूनिफार्म व अन्य शैक्षणिक सहूलियतें दी है। इसके अलावा नाश्ता, भोजन की व्यवस्था है और सोने को रजाई गद्दे, पहनने को कपड़े, जाड़ों में स्वेटर, इनर, जूता, चप्पल आदि देने की भी व्यवस्था की गई है, पर चारों स्कूलों में इन गरीब बच्चियों के लिए सर्दी एक सजा बन चुकी है।

स्कूल भवनों में खिड़कियां लगे एक वर्ष ही हुआ होगा कि अधिकतर खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं, जिससे सर्द हवाएं सीधी कमरों में घुसती है। सर्दी से बचने को रजाई गद्दा इन बच्चियों के पास या तो नहीं हैं और हैं भी तो चार साल पुराने। सूत्रों से पता चला है कि वर्ष 11 में रजाई, गद्दे, स्वेटर आदि बच्चों के लिए दिए गए थे, जिनमें रजाईयां गुदड़ी बन चुकी हैं। गद्दों में रूई समाप्त हो चुकी है। सत्र बदला तो पहले सत्र की बच्चियों के कपड़े व स्वेटर लेकर पुराना बैच चला गया। अब वर्तमान समय में इन बच्चियों के पास सर्दियों से बचने के संसाधन मौजूद नहीं है।

इसके बावजूद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। कु छ दिन पूर्व एसडीएम प्रेम प्रकाश तिवारी ने निरीक्षण कर अव्यवस्थाएं देखीं और अफसरों को अपनी रिपोर्ट भी भेजी, पर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और कड़ाके की सर्दी में स्कूल में रहकर पढ़ने वाली गरीब बालिकाओं को जरूरी वस्तुएं अभी तक नही पहुंची हैं। उधर, जिले के 20 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में 16 स्कूलों के लिए नए बिस्तर का बजट जारी हो गया। इसके बावजूद इन विद्यालयों में अभी तक रजाई गद्दे नहीं खरीदे गए।

इस बाबत जिला समन्वयक बालिका शिक्षा बलवीर शास्त्री ने बताया कि हर स्कूल के लिए 75-75 हजार रुपये रजाई गद्दे के लिए आए हैं, जबकि चार स्कूलों के लिए डिमांड और भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि डीएम के अनुमोदन पर जिला क्रय समिति का गठन कर रजाई गद्दे खरीदे जाएंगे, जिन्हें संबंधित स्कूलों में भेजा जाएगा।

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