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अमृत के लिए के संसाधनों पर मंथन !

Fri, 03 Jun 2022 10:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2022 10:51 PM IST
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manthan for amrit sansadhan
हरदोई। अमृत सरोवर योजना के तहत पुरातन तालाब को विकसित करने के लिए संसाधनों पर मामला अटक गया है। इस तालाब का क्षेत्रफल इतना ज्यादा है कि इसके लिए करोड़ों की धनराशि की जरूरत है। ऐसे में तालाब की मिट्टी बेचकर संसाधन जुटाने की तैयारी की जा रही है।
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तीन ग्राम पंचायतों की सीमा में आने वाले करीब नौ सौ बीघा क्षेत्रफल वाले इस तालाब को विकसित करने में सबसे बड़ा पेच संसाधनों एवं कार्यदायी संस्था को लेकर है। अब इस पर अनुमानित लागत के प्रबंध को लेकर मंथन चल रहा है। बड़े तालाब के लिए आवश्यक संसाधनों को लेकर प्रशासन ने जिला पंचायत से कार्ययोजना बनाने के लिए कहा है।
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सधई बेहटा, बेहटी और तत्यौरा ग्राम पंचायतों की सीमा में आने वाले इस बड़े तालाब को अमृत सरोवर बनाने के लिए इससे निकलने वाली मिट्टी को एनएचआईए आदि निर्माण एजेंसियों को बेचकर संसाधन जुटाने पर भी विचार किया जा रहा है।
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आसपास के कई गांवों के लोगों में अमृत सरोवर के रूप से इसके निर्माण को लेकर खुशी का माहौल है। गांव के मुरली, कौशल, नागेश्वर, अनिल आदि ने बताया कि अमृत सरोवर के पास पौधे लगाएं जाएंगे। बैठने आदि की व्यवस्था होगी। ये तालाब पुरातन है और पुरखे बताया करते थे एक जमाने में इसमें खूब पानी रहता था ।
ये है शासन की गाइड लाइन
अमृत सरोवर में कम से कम पांच से छह फीट पानी भरा रहे। सरोवर को रमणीय स्थल के रूप में विकसित करने की शासन की मंशा है। चारों तरफ रोशनी की व्यवस्था की जानी है। सरोवर को इस तरह से विकसित किया जाना है कि इसमें कहीं से गंदा पानी न आए। बारिश के पानी से लबालब होने पर इसका उपयोग ग्राउंड वाटर रिचार्ज में भी हो सके। सरोवर के पास फलदार और औषधीय पौधे भी लगाए जाएंगे।
- संसाधन जुटाने के लिए तालाब की मिट्टी को विक्रय करने सहित अन्य व्यवस्था के लिए कार्य चल रहा है। अमृत सरोवर के निर्माण से बड़े स्तर पर जल संचयन होने के साथ ही आसपास के कई गांवों के लोगों को विकसित स्थल मिल सकेगा। जिला पंचायत की ओर से इसकी डीपीआर बनाई जाएगी। कोई समस्या होगी तो निस्तारण कराया जाएगा।- अविनाश कुमार, डीएम

- ये सही है कि तालाब का एरिया बहुत बड़ा है। इस लिहाज से ये अमृत सरोवर के रूप में सबसे बड़ा तालाब है। हो सकता है कि ये प्रदेश स्तर पर भी सबसे बड़ा तालाब हो। डीपीआर बनने के बाद पता चल सकेगा कि कितनी लागत आएगी। अभी भूूमि की पैमाइश चल रही है। - प्रेमावती, अध्यक्ष, जिला पंचायत
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