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Hardoi News: 45 दिन में तीसरी बार मशीन खराब, नहीं हो रही नई जांच
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी में लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन जांचों के बोझ से दम तोड़ती दिख रही। बीते सवा महीने में बायोकेमिस्ट्री मशीन तीसरी बार खराब हो चुकी है, और दो दिनों तक जांचें बाधित रहीं। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ा। पुराने सैंपलों की जांच पूरी न होने के कारण सोमवार को नये सैंपल नहीं लिए गए हैं।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की पैथालॉजी लैब में मरीजों की सहूलियत के लिए लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन खुद बीमार होने लगी है।
बायोकेमिस्ट्री मशीन से मरीजों के लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), किडनी फंक्शन टेस्ट (टीएफटी), कोलेस्ट्राल की जांच (लिपिड प्रोफाइल), शुगर व शरीर में इंफेक्शन (ईएसआर) आदि जांचें की जाती हैं। जिनके प्रतिदिन तीन सैकड़ा जांचे होती हैं। प्रतिदिन जांचों की अधिक बोझ के चलते अब बायोकेमिस्ट्री मशीन काम नहीं कर पा रही है।
बायोकेमिस्ट्री तीसरी बार शनिवार को फिर से खराब हो गई थी। जिस वजह से मरीजों की जांच नहीं हो पाई। दो दिन से जांच न होने की वजह से मरीजों के सैंपल निकाल कर रख लिए गए।
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सोमवार को मशीन सही करी गई, उसके बाद ही जांचें की गईं। इसके बीच जरूरी जांचों के लिए मरीजोंं को प्राइवेट पैथालॉजी में जाना पड़ा।
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी में लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन जांचों के बोझ से दम तोड़ती दिख रही। बीते सवा महीने में बायोकेमिस्ट्री मशीन तीसरी बार खराब हो चुकी है, और दो दिनों तक जांचें बाधित रहीं। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ा। पुराने सैंपलों की जांच पूरी न होने के कारण सोमवार को नये सैंपल नहीं लिए गए हैं।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की पैथालॉजी लैब में मरीजों की सहूलियत के लिए लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन खुद बीमार होने लगी है।
बायोकेमिस्ट्री मशीन से मरीजों के लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), किडनी फंक्शन टेस्ट (टीएफटी), कोलेस्ट्राल की जांच (लिपिड प्रोफाइल), शुगर व शरीर में इंफेक्शन (ईएसआर) आदि जांचें की जाती हैं। जिनके प्रतिदिन तीन सैकड़ा जांचे होती हैं। प्रतिदिन जांचों की अधिक बोझ के चलते अब बायोकेमिस्ट्री मशीन काम नहीं कर पा रही है।
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बायोकेमिस्ट्री तीसरी बार शनिवार को फिर से खराब हो गई थी। जिस वजह से मरीजों की जांच नहीं हो पाई। दो दिन से जांच न होने की वजह से मरीजों के सैंपल निकाल कर रख लिए गए।
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सोमवार को मशीन सही करी गई, उसके बाद ही जांचें की गईं। इसके बीच जरूरी जांचों के लिए मरीजोंं को प्राइवेट पैथालॉजी में जाना पड़ा।