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Hardoi News: महिला अस्पताल में 11 माह बाद दुरुस्त कराई गई लिफ्ट
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फोटो-05- महिला चिकित्सालय में लिफ्ट की मरम्मत करता टेक्नीशियन श्रीकांत। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज के जिला महिला अस्पताल की लिफ्ट की मरम्मत कार्य आखिरकार 11 माह बाद शुरू कर दिया गया है।
बुधवार को लखनऊ से आए टेक्नीशियनों ने लिफ्ट के अंदर मशीनरी की जांच की है। उम्मीद है कि अब जल्द ही लिफ्ट शुरू हो जाएगी। इससे गर्भवती महिलाओं को काफी हद तक राहत मिलेगी। उन्हें अब रैंप या सीढि़यों से चढ़कर जाना नहीं पड़ेगा। इस समस्या को अमर उजाला ने कई बार प्रमुखता से प्रकाशित भी किया है।
मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में भूतल पर ओपीडी, इमरजेंसी लेबर रूम बना है। प्रथम तल पर ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और द्वितीय तल पर एसएनसीयू, एनआरसी है और तृतीय तल पर प्रशासनिक कार्यालय बने हैं। मरीजों व अन्य लोगों की सुविधा के लिए दो लिफ्ट लगाए गए हैं। इसमें से दोनों लिफ्टें बीते 11 माह से खराब पड़ी हैं। ऐसे में प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवतियों को ऑपरेशन थिएटर और वार्डाें तक जाने के लिए सीढ़ी व रैंप का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्रथम तल पर सिजेरियन इसके बाद डिस्चार्ज होने के बाद नवजात व गर्भवती को नीचे आने में दिक्कत हो रही थीं। डॉक्टर और स्टाफ को भी परेशानी हो रही थी। बुजुर्गाें, तीमारदारों को भी आने-जाने में परेशान होना पड़ता था। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और लिफ्ट की मरम्मत शुरू करा दी। जॉनसन कंपनी लखनऊ से आए टेक्नीशियन श्रीकांत ने बताया कि लिफ्ट के दो पावर सर्किट बोर्ड और छह बैटरियां खराब हो गई हैं। कार्ड बदले जाने और नई बैटरी लगने के बाद लिफ्ट चालू कर दी जाएगी।
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बुधवार को लखनऊ से आए टेक्नीशियनों ने लिफ्ट के अंदर मशीनरी की जांच की है। उम्मीद है कि अब जल्द ही लिफ्ट शुरू हो जाएगी। इससे गर्भवती महिलाओं को काफी हद तक राहत मिलेगी। उन्हें अब रैंप या सीढि़यों से चढ़कर जाना नहीं पड़ेगा। इस समस्या को अमर उजाला ने कई बार प्रमुखता से प्रकाशित भी किया है।
मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में भूतल पर ओपीडी, इमरजेंसी लेबर रूम बना है। प्रथम तल पर ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और द्वितीय तल पर एसएनसीयू, एनआरसी है और तृतीय तल पर प्रशासनिक कार्यालय बने हैं। मरीजों व अन्य लोगों की सुविधा के लिए दो लिफ्ट लगाए गए हैं। इसमें से दोनों लिफ्टें बीते 11 माह से खराब पड़ी हैं। ऐसे में प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवतियों को ऑपरेशन थिएटर और वार्डाें तक जाने के लिए सीढ़ी व रैंप का सहारा लेना पड़ रहा है।
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प्रथम तल पर सिजेरियन इसके बाद डिस्चार्ज होने के बाद नवजात व गर्भवती को नीचे आने में दिक्कत हो रही थीं। डॉक्टर और स्टाफ को भी परेशानी हो रही थी। बुजुर्गाें, तीमारदारों को भी आने-जाने में परेशान होना पड़ता था। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और लिफ्ट की मरम्मत शुरू करा दी। जॉनसन कंपनी लखनऊ से आए टेक्नीशियन श्रीकांत ने बताया कि लिफ्ट के दो पावर सर्किट बोर्ड और छह बैटरियां खराब हो गई हैं। कार्ड बदले जाने और नई बैटरी लगने के बाद लिफ्ट चालू कर दी जाएगी।
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