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हमारा जीवन साधक की तरह होना चाहिए
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 19 Dec 2014 11:51 PM IST
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श्यामा श्याम सेवा संस्थान के तत्वावधान में गुरुवार से नघेटा रोड स्थित आरआर इंटर कालेज परिसर में शुरू हुए श्रीमद्भागवत कथा एवं श्रीराम चरित मानस कथा के वर्णन संगम में कथा व्यास वैष्णवाचार्य गिरिधर गोपाल ने बताया कि हमारा जीवन साधक की तरह होना चाहिए और साधक वो होता हैं जो किसी के लिए बाधक न हो। अर्थात हमारी कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी को कष्ट न हो।
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उन्होंने श्रीराम चरित मानस की चौपाई कर्म प्रधान विश्व रचि राखा जो जसु करै सो तसु फल चाखा का मर्म समझाते हुए कहा कि हमें संमार्ग को अपनाकर प्रभू में ध्यान लगाना चाहिए। जो लोग दूसरे दुख को अपना दर्द समझते हैं और जो दूसरों के सुखमें अपना सुख खोजते हैं, उन्हीं का जीवन सुखी होता हैं।
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उन्होंने कहा कि लोगों को ईर्ष्या द्वेष और क्रोध, लालच रूपी बुराइयों को छोड़कर अच्छाइयोेेें अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्माचरण से ही सर्वकल्याण होगा और ईश्वर की भक्ति बिना किसी स्वार्थ के करने चाहिए। कहा कि जब हम पूरी आस्था एवं विश्वास के साथ समर्पण भाव से ईश्वर को याद करते हैं, तो भगवान हमारी पुकार अवश्य सुनते हैं, क्योंकि भगवान तो भाव को देखते हैं।
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कहा जाता है कि जैसी चाह वैसी राह। ऐसे में ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता हमारी चाह अर्थात भाव से बनेगा। उन्होंने भागवत कथा के कई प्रसंग सुनाते हुए श्रद्धालुओं को भाव विह्वल कर दिया। इस दौरान उन्होंने भजन भी सुनाए। इससे पहले वैदिक रीति नीति के अनुसार कलश यात्रा निकाली गई और दैवीय आह्वान का पूजन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थेे।