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जटायु से सीखें नारी का सम्मान-व्यास गोंविदाचार्य
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पचदेवरा (हरदोई)। मुर्तजा नगर स्थित सिद्धदात्री दुर्गा मंदिर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में व्यास गोविंदाचार्य ने कहा कि प्राचीन काल में नारी सम्मान की रक्षा सभी करते थे। क्या मानव और क्या पशु-पक्षी वे अपनी जान कुर्बान कर देते थे।
व्यास गोेविंदाचार्य ने कहा कि माता सीता के अपहरण के दौरान जब जटायु ने उनका क्रंदन सुना तो वह खुद को नहीं रोक सका। रावण से माता सीता की रक्षा के लिए युद्ध किया और अपनी जान दे दी।
व्यास ने कहा कि आज समाज में हर घर में रावण का वास हो गया है। हम लोग अपनी संस्कृति व सभ्यता भूलते जा रहे हैं। रामचरित मानस में राम व भरत प्रकरण का उद्धरण देते हुए कहा कि भाई से प्रेम करना व उन्हें हर हाल में गले लगाने का मार्गदर्शन प्रभु श्रीराम के आदर्श चरित्र से मिलता है। कथा के दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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व्यास गोेविंदाचार्य ने कहा कि माता सीता के अपहरण के दौरान जब जटायु ने उनका क्रंदन सुना तो वह खुद को नहीं रोक सका। रावण से माता सीता की रक्षा के लिए युद्ध किया और अपनी जान दे दी।
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व्यास ने कहा कि आज समाज में हर घर में रावण का वास हो गया है। हम लोग अपनी संस्कृति व सभ्यता भूलते जा रहे हैं। रामचरित मानस में राम व भरत प्रकरण का उद्धरण देते हुए कहा कि भाई से प्रेम करना व उन्हें हर हाल में गले लगाने का मार्गदर्शन प्रभु श्रीराम के आदर्श चरित्र से मिलता है। कथा के दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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