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गर्मी में हीट स्ट्रोक का बढ़ा खतरा, अलर्ट
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हरदोई। जिले में तापमान के बढ़ने से ग्रीष्म लहर को लेकर स्वास्थ्य महकमे ने अलर्ट जारी कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डॉक्टरों से वर्चुअल संवाद कर आम जनमानस को हीट वेव से बचाव व इलाज के बेहतर इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को डॉक्टर दवाओं के साथ गर्मी से बचाव के उपाय बता रहे हैं। साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई हैं।
जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. शेर सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव विश्व के साथ भारत को भी प्रभावित कर रहा है। इसमें हीट वेव इंपैक्ट या गर्मी की लहर उत्तर प्रदेश के भी कई जिले चपेट में ले सकती है।
जिसको लेकर मौसम विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट किया है। हीट वेव से सतर्कता बरतने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने जनपद के डॉक्टरों के साथ वर्चुअल संवाद कर ग्रीष्म लहर को लेकर सतर्कता बरतने बात कही है। डॉक्टरों के मुताबिक, वर्चुअल संवाद मेें बताया गया कि कुछ समय पहले ठंड थी, अचानक हीट वेेव की चेतावनी आ गई है।
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बताया कि पिछले 10 सालों से तापमान बढ़ना एक ट्रेंड बनता जा रहा है। पिछले 15 सालों से मौसम का परंपरागत बंटवारा खत्म होता जा रहा है। इससे समय से पहले मौसम तेवर बदल रहा है।
ऐसे में मौसम ग्रीष्म लहर महामारी की तरह उभरी है। इससे बहुत अधिक गर्मी का असर सेहत पर पड़ना शुुरू हो सकता है। इसके बाद से जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने सावधानियां बरतनी शुरू कर दी है।
ओपीडी में आने वाले मरीजों को डॉक्टर परामर्श के साथ गर्मी से बचाव के उपाय बता रहे हैैं।
यह है हीट स्ट्रोक यानी लू---
अधिक गर्म और शुष्क हवाओं को लू कहा जाता है। इनका तापमान सामान्य से अधिक होता है।
लू मार्च से जून के बीच चलती है, लेकिन कभी-कभी इसका असर जुलाई में भी देखने का मिलता है।
हीट स्ट्रोक के लक्षण
तेज बुखार आना, जिसमें तापमान 104 डिग्री या इससे ज्यादा चला जाता है। बेहोशी आ जाती है, मरीज कोमा में चला जाता है। इसके अलावा थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिर दर्द होना, उल्टी आना, अधिक पसीना आना, गाढ़े रंग की पेशाब आना, मांसपेशियों व पेडू में ऐंठन आदि हैं।
इन दिनों तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच रहा है। ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में बचाव कर सबसे बेहतर होता है। घर से खाली पेट न निकलें, ताजा खाना खाएं, पुदीना नीबू, शिकंजी आदि का सेवन करें। घर से निकलने से पहले शरीर को पूरी तरह से ढककर ही निकलें।
- डॉ. शेर सिंह, ईएमओ जिला अस्पताल
पीएचसी में अव्यवस्थाएं, मरीज परेशान
हरदोई। पाली पीएचसी पर अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं। अस्पताल में महिला डिलीवरी वार्ड में भर्ती मरीजों के आसपास आवारा कुत्ते बैठे रहते हैं, जो मरीज व तीमारदारों के खाने पीने का सामान भी चट कर जाते हैं।
मरीजों में संक्रमण का खतरा रहता है। पीएचसी पर जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। महिला डिलीवरी वार्ड से लेकर ओपोड़ी वार्ड और बरामदे में कुत्ते घूमते रहते हैं।
तीमारदार अगर जरा सा भी चूक कर दें तो आवारा कुत्ते नवजात शिशुओं को गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं। तीमारदारों ने जिम्मेदारों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
उधर, नवजात शिशुओं को अपनों से ठुकराए जाने के बाद अस्पताल में सुरक्षित रखने के लिए पालना घर की व्यवस्था की गई थी। अब या व्यवस्था अस्पताल में धूल फांकती दिख रही है।
शनिवार को जिम्मेदारों द्वारा पालना धूल फांकने के लिए रसोई वार्ड के पास रख दिया गया, जिसके पास कुत्ते लोट रहे थे। इस बाबत डॉ. आनंद ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। सफाई कर्मियों से कहकर इस व्यवस्था में सुधार कराएंगे।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डॉक्टरों से वर्चुअल संवाद कर आम जनमानस को हीट वेव से बचाव व इलाज के बेहतर इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को डॉक्टर दवाओं के साथ गर्मी से बचाव के उपाय बता रहे हैं। साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई हैं।
जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. शेर सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव विश्व के साथ भारत को भी प्रभावित कर रहा है। इसमें हीट वेव इंपैक्ट या गर्मी की लहर उत्तर प्रदेश के भी कई जिले चपेट में ले सकती है।
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जिसको लेकर मौसम विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट किया है। हीट वेव से सतर्कता बरतने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने जनपद के डॉक्टरों के साथ वर्चुअल संवाद कर ग्रीष्म लहर को लेकर सतर्कता बरतने बात कही है। डॉक्टरों के मुताबिक, वर्चुअल संवाद मेें बताया गया कि कुछ समय पहले ठंड थी, अचानक हीट वेेव की चेतावनी आ गई है।
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बताया कि पिछले 10 सालों से तापमान बढ़ना एक ट्रेंड बनता जा रहा है। पिछले 15 सालों से मौसम का परंपरागत बंटवारा खत्म होता जा रहा है। इससे समय से पहले मौसम तेवर बदल रहा है।
ऐसे में मौसम ग्रीष्म लहर महामारी की तरह उभरी है। इससे बहुत अधिक गर्मी का असर सेहत पर पड़ना शुुरू हो सकता है। इसके बाद से जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने सावधानियां बरतनी शुरू कर दी है।
ओपीडी में आने वाले मरीजों को डॉक्टर परामर्श के साथ गर्मी से बचाव के उपाय बता रहे हैैं।
यह है हीट स्ट्रोक यानी लू---
अधिक गर्म और शुष्क हवाओं को लू कहा जाता है। इनका तापमान सामान्य से अधिक होता है।
लू मार्च से जून के बीच चलती है, लेकिन कभी-कभी इसका असर जुलाई में भी देखने का मिलता है।
हीट स्ट्रोक के लक्षण
तेज बुखार आना, जिसमें तापमान 104 डिग्री या इससे ज्यादा चला जाता है। बेहोशी आ जाती है, मरीज कोमा में चला जाता है। इसके अलावा थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिर दर्द होना, उल्टी आना, अधिक पसीना आना, गाढ़े रंग की पेशाब आना, मांसपेशियों व पेडू में ऐंठन आदि हैं।
इन दिनों तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच रहा है। ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में बचाव कर सबसे बेहतर होता है। घर से खाली पेट न निकलें, ताजा खाना खाएं, पुदीना नीबू, शिकंजी आदि का सेवन करें। घर से निकलने से पहले शरीर को पूरी तरह से ढककर ही निकलें।
- डॉ. शेर सिंह, ईएमओ जिला अस्पताल
पीएचसी में अव्यवस्थाएं, मरीज परेशान
हरदोई। पाली पीएचसी पर अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं। अस्पताल में महिला डिलीवरी वार्ड में भर्ती मरीजों के आसपास आवारा कुत्ते बैठे रहते हैं, जो मरीज व तीमारदारों के खाने पीने का सामान भी चट कर जाते हैं।
मरीजों में संक्रमण का खतरा रहता है। पीएचसी पर जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। महिला डिलीवरी वार्ड से लेकर ओपोड़ी वार्ड और बरामदे में कुत्ते घूमते रहते हैं।
तीमारदार अगर जरा सा भी चूक कर दें तो आवारा कुत्ते नवजात शिशुओं को गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं। तीमारदारों ने जिम्मेदारों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
उधर, नवजात शिशुओं को अपनों से ठुकराए जाने के बाद अस्पताल में सुरक्षित रखने के लिए पालना घर की व्यवस्था की गई थी। अब या व्यवस्था अस्पताल में धूल फांकती दिख रही है।
शनिवार को जिम्मेदारों द्वारा पालना धूल फांकने के लिए रसोई वार्ड के पास रख दिया गया, जिसके पास कुत्ते लोट रहे थे। इस बाबत डॉ. आनंद ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। सफाई कर्मियों से कहकर इस व्यवस्था में सुधार कराएंगे।