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Hardoi News: ताकत पाने की जद्दोजहद में बसपा ने दो साल में बदले तीन जिलाध्यक्ष, अब सूर्यकांत काे जिम्मेदारी
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फोटो-1-सूर्यकांत निराला। संवाद
हरदोई। सूबे में सत्ता के शिखर से एक विधायक पर सिमट चुकी बसपा राजनीति की मुख्यधारा में वापसी की जद्दोजहद कर रही है। इसके लिए संगठन के कील कांटे दुरुस्त करने की कवायद हाे रही है। चुनावी साल नजदीक आने के साथ ही बसपा ने दो साल के अंदर चौथी बार जिलाध्यक्ष बदल दिया है। सुरेश चौधरी को हटाकर अब सूर्यकांत निराला को नया जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने के बाद अगले चुनाव से बसपा का ग्राफ गिरने लगा था। हाल यह हो गया कि अब विधानसभा में बसपा का सिर्फ एक विधायक है। साल 2007 के चुनाव में आठ सीटों पर (तब जिले में नौ सीट थीं) बसपा ने जीत हासिल की थी। इसके बाद समीकरण बदले तो न सिर्फ सूबे में बल्कि जिले में भी बसपा हाशिए पर चली गई।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी किसी भी सीट पर नजदीकी मुकाबले तक में नहीं पहुंच पाए। ज्यादातर सीटों पर बसपा तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। कुछ यही हाल लोकसभा चुनाव में भी हुआ था। हरदोई और मिश्रिख संसदीय क्षेत्रों से बसपा मुख्य मुकाबले में भी नहीं आ पाई थी।
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अब इस साल संभावित पंचायत और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी बसपा कर रही है। मुख्य लड़ाई में लौटने की जद्दोजहद में बसपा ने दो साल में चौथी बार जिलाध्यक्ष बदला है। लोकसभा चुनाव से पहले राजेश्वर सिंह कुशवाहा को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। अप्रैल 2025 में उन्हें हटाकर सुरेश चौधरी को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। अब सुरेश चौधरी को हटाकर सूर्यकांत निराला को अध्यक्ष बनाया गया है। जाटव समाज से आने वाले सूर्यकांत बसपा के पुराने कार्यकर्ता हैं।
कौन हैं सूर्यकांत निराला
शहर के मोहल्ला आजादनगर में रहने वाले सूर्यकांत मूलरूप से पिहानी विकास खंड के कुशवारी के निवासी हैं। उनके पिता गंगाराम पंचायत राज विभाग में सहायक विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सूर्यकांत जिला प्रभारी, मंडल प्रभारी, मंडल समन्वयक जैसी जिम्मेदारियों को निभा चुके हैं। अब उनके सामने पंचायत और विधानसभा चुनाव में बसपा का गिर चुका ग्राफ बढ़ाने की चुनौती है।
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वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने के बाद अगले चुनाव से बसपा का ग्राफ गिरने लगा था। हाल यह हो गया कि अब विधानसभा में बसपा का सिर्फ एक विधायक है। साल 2007 के चुनाव में आठ सीटों पर (तब जिले में नौ सीट थीं) बसपा ने जीत हासिल की थी। इसके बाद समीकरण बदले तो न सिर्फ सूबे में बल्कि जिले में भी बसपा हाशिए पर चली गई।
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वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी किसी भी सीट पर नजदीकी मुकाबले तक में नहीं पहुंच पाए। ज्यादातर सीटों पर बसपा तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। कुछ यही हाल लोकसभा चुनाव में भी हुआ था। हरदोई और मिश्रिख संसदीय क्षेत्रों से बसपा मुख्य मुकाबले में भी नहीं आ पाई थी।
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अब इस साल संभावित पंचायत और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी बसपा कर रही है। मुख्य लड़ाई में लौटने की जद्दोजहद में बसपा ने दो साल में चौथी बार जिलाध्यक्ष बदला है। लोकसभा चुनाव से पहले राजेश्वर सिंह कुशवाहा को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। अप्रैल 2025 में उन्हें हटाकर सुरेश चौधरी को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। अब सुरेश चौधरी को हटाकर सूर्यकांत निराला को अध्यक्ष बनाया गया है। जाटव समाज से आने वाले सूर्यकांत बसपा के पुराने कार्यकर्ता हैं।
कौन हैं सूर्यकांत निराला
शहर के मोहल्ला आजादनगर में रहने वाले सूर्यकांत मूलरूप से पिहानी विकास खंड के कुशवारी के निवासी हैं। उनके पिता गंगाराम पंचायत राज विभाग में सहायक विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सूर्यकांत जिला प्रभारी, मंडल प्रभारी, मंडल समन्वयक जैसी जिम्मेदारियों को निभा चुके हैं। अब उनके सामने पंचायत और विधानसभा चुनाव में बसपा का गिर चुका ग्राफ बढ़ाने की चुनौती है।