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सूखे हैंडपंपों से कैसे बुझेगी प्यास!
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sat, 02 May 2015 12:14 AM IST
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गर्मी के दस्तक देने के बावजूद जिले में पेयजल को
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लगाए गए हैंडपंपों की मरम्मत नहीं की जा रही है। आलम यह है कि नगर से लेकर
ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह हैंडपंप खराब पड़े हैं। इन हैंडपंपोें की
मरम्मत के लिए संबंधित विभागों के जिम्मेदार सूचियां तक तैयार नहीं कर सके।
हैरत की बात तो यह है कि विभागीय आंकड़ों में जिले में कुल हैंडपंपों की संख्या भी ठीक दर्ज नहीं हुई। नोडल एजेंसी जलनिगम के एक्सईएन एसबी आनंद की माने तो उनके यहां करीब 47 हजार हैंडपंप दर्ज हैं, पर सांसद व विधायक निधि से अब तक जो भी हैंडपंप लगे हैं, उनकी सूची कार्यदायी संस्थाओं ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराई, जिस कारण सही गणना होना मुश्किल हैं।
उधर, क्षेत्रीय ग्रामीणों की मानें तो करीब 30 फीसदी हैंडपंप खराब पड़े है जिनमें अधिकांश रिबोर होने हैं। उधर, शहर स्थित कलक्ट्रेट में इक्का दुक्का हैंडपंप लगे हैं, जबकि यहां हर रोज बडे़ पैमाने पर लोगाें का आवागमन रहता है। ऐसे में गर्मी के मौसम में यदि लोगों को पीने का पानी भी मिल पाए तो उन पर क्या गुजरेगी, इस बात की फ्रिक किसी को नहीं है। यहां खराब पड़ा हैंडपंप लोगों को आईना दिखाने का काम कर रहा है।
इसी तरह जिला अस्पताल में खराब पड़ा हैंडपंप अस्पताल प्रशासन के साथ ही व्यवस्था की उदासीनता को बता रहा है। गर्मी के मौसम में जब पेयजल की मांग सामान्य दिनों की अपेक्षा में कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दौर में हैंडपंप का खराब पड़े रहना लापरवाही का नमूना बन रहा है।
उधर, शहर के सबसे भीड़ भाड़ एवं बाजार वाले सिनेमा रोड पर भी एक हैंडपंप खराब पड़ा हुआ है और जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं। दरअसल बस बिल्डिंग के पास खराब पड़े इस हैंडपंप को लेकर जिम्मेदार विभागों की लापरवाही लोगों के लिए आसानी के साथ पेयजल मिलने पर ग्रहण लगा रही है।
उधर, शहर के तिकुनिया पार्क के निकट खराब पड़ा हैंडपंप भी अपनी मरम्मत की राह देख रहा है, मगर फिलहाल अभी तक इस ओर कोई पहल नहीं हुई है, जबकि गर्मी अब पूरी तरह से अपनी रंगत में आने की ओर बढ़ रही है। वहीं सोल्जर बोर्ड चौराहे के पास खराब पड़ा हैंडपंप भी जिम्मेदारों की नजरों से या तो बचा हुआ है या फिर नजरें इनायत होने के इंतजार में है, ताकि वहां भी पेयजल की उपलब्धता हो सके, पर फिलहाल इस ओर बेखबरी ही सामने आ रही है।
हैरत की बात तो यह है कि विभागीय आंकड़ों में जिले में कुल हैंडपंपों की संख्या भी ठीक दर्ज नहीं हुई। नोडल एजेंसी जलनिगम के एक्सईएन एसबी आनंद की माने तो उनके यहां करीब 47 हजार हैंडपंप दर्ज हैं, पर सांसद व विधायक निधि से अब तक जो भी हैंडपंप लगे हैं, उनकी सूची कार्यदायी संस्थाओं ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराई, जिस कारण सही गणना होना मुश्किल हैं।
उधर, क्षेत्रीय ग्रामीणों की मानें तो करीब 30 फीसदी हैंडपंप खराब पड़े है जिनमें अधिकांश रिबोर होने हैं। उधर, शहर स्थित कलक्ट्रेट में इक्का दुक्का हैंडपंप लगे हैं, जबकि यहां हर रोज बडे़ पैमाने पर लोगाें का आवागमन रहता है। ऐसे में गर्मी के मौसम में यदि लोगों को पीने का पानी भी मिल पाए तो उन पर क्या गुजरेगी, इस बात की फ्रिक किसी को नहीं है। यहां खराब पड़ा हैंडपंप लोगों को आईना दिखाने का काम कर रहा है।
इसी तरह जिला अस्पताल में खराब पड़ा हैंडपंप अस्पताल प्रशासन के साथ ही व्यवस्था की उदासीनता को बता रहा है। गर्मी के मौसम में जब पेयजल की मांग सामान्य दिनों की अपेक्षा में कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे दौर में हैंडपंप का खराब पड़े रहना लापरवाही का नमूना बन रहा है।
उधर, शहर के सबसे भीड़ भाड़ एवं बाजार वाले सिनेमा रोड पर भी एक हैंडपंप खराब पड़ा हुआ है और जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं। दरअसल बस बिल्डिंग के पास खराब पड़े इस हैंडपंप को लेकर जिम्मेदार विभागों की लापरवाही लोगों के लिए आसानी के साथ पेयजल मिलने पर ग्रहण लगा रही है।
उधर, शहर के तिकुनिया पार्क के निकट खराब पड़ा हैंडपंप भी अपनी मरम्मत की राह देख रहा है, मगर फिलहाल अभी तक इस ओर कोई पहल नहीं हुई है, जबकि गर्मी अब पूरी तरह से अपनी रंगत में आने की ओर बढ़ रही है। वहीं सोल्जर बोर्ड चौराहे के पास खराब पड़ा हैंडपंप भी जिम्मेदारों की नजरों से या तो बचा हुआ है या फिर नजरें इनायत होने के इंतजार में है, ताकि वहां भी पेयजल की उपलब्धता हो सके, पर फिलहाल इस ओर बेखबरी ही सामने आ रही है।