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Hardoi News: गुपचुप शरीर में घुस रहा हेपेटाइटिस बी व सी, चपेट में आ रहे लोग

Wed, 10 Dec 2025 10:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Dec 2025 10:57 PM IST
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Hepatitis B and C are secretly entering the body, people are getting affected.
फोटो- 18- जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विकास विद्यार्थी। संवाद
हरदोई। असुरक्षित ढंग से शरीर गोदवाना और रक्त चढ़वाने से एचआईवी जैसी लाइलाज बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ता जा रहा है। हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। जब किसी व्यक्ति की बीमारी के लिए जांच कराई जा रही है तो इस संक्रमण का पता चल रहा है। जिले में कई मामले हैं जिनके शरीर में हेपेटाइटिस बी और सी का वायरस पाया गया है।
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हेपेटाइटिस मुख्यता लिवर से जुड़ी बीमारी है जो वायरल इंफेक्शन के कारण होती है। इससे लिवर में सूजन आ जाती है। हेपेटाइटिस के वायरस को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि इससे होने वाली मौतों का हर साल आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। हेपेटाइटिस के टाइप बी और सी से लिवर सिरोसिस और कैंसर हो जाता है। रोगियों को हेपेटाइटिस की बीमारी की भनक तक नहीं लग पाती और इलाज में देरी हो जाती है।
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मेडिकल कॉलेज की जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विकास विद्यार्थी ने बताया कि इसे निडिल ब्रेक इंजरी भी कहा जाता है। सुई से नशा करने वाले एक ही सुई से रक्त चढ़वाने और टैटू बनवाने में सुई न बदलने से यह बीमारी हो जाती है। गर्भवतियों में यह बीमारी होने पर उनके बच्चे में भी संक्रमण पहुंचता है।
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जांच कराओ तब पता चलती है बीमारी
इन दिनों सर्जरी होने से पहले चिकित्सक जांचें लिखते हैं तो उसमें हेपेटाइटिस की जांच जरुर होती है। जांच वायरल मार्कर और एलाइजा से की जाती है तब इसके संक्रमण का पता चलता है। डॉ. विकास विद्यार्थी ने बताया कि कई मरीज ऐसे आए हैं जिनकी जांच कराने पर हेपेटाइटिस बी व सी डायग्नोसिस हुआ। इसके बाद उन्हें जनरल मेडिसिन के तहत इलाज दिया जा रहा है।


एक सप्ताह में जिले में मिले 35 मरीज
हेपेटाइटिस से संक्रमित मरीज जिले में भी मिल रहे हैं। चिकित्सकों ने अलग-अलग बीमारियों के लिए जांच कराई तो उसमें 19 रोगियों में हेपेटाइटिस-सी का संक्रमण मिला जबकि हेपेटाइटिस-बी के 16 रोगी पाए गए। इन मरीजों का अब पहले हेपेटाइटिस का इलाज किया जा रहा है।



ऐसे हो सकता है संक्रमण

-संक्रमित उपकरण से दांत निकलवाने।

-संक्रमित उपकरण से टैटू बनवाने।

-संक्रमित उस्तरा से दाढ़ी, बाल बनवाने।

-संक्रमित खून चढ़वाने, रोगी की सिरिंज से सुई लगवाने।

-असुरक्षित यौन संबंध।



हेपेटाइटिस बी व सी के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। रोगी जब दूसरे रोग के इलाज के लिए जांच कराते हैं तब मर्ज पता चल पाता है। जांच भी अलग-अलग प्रकार की कराई जाती है तब जाकर पुष्टि होती है। इसमें एलाइजा जांच सबसे कारगर है। -डॉ. विकास विद्यार्थी, जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष

फोटो- 18- जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विकास विद्यार्थी। संवाद

फोटो- 18- जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विकास विद्यार्थी। संवाद

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