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स्वास्थ्य केंद्रों में मुख्यमंत्री का फरमान धड़ाम

Tue, 16 Feb 2016 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई Updated Tue, 16 Feb 2016 01:21 AM IST
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He decrees a huge crash of health
सूबे के मुख्यमंत्री के कड़े फरमान के बावजूद भी स्वास्थ्य केंद्रों पर अव्यवस्थाएं हावी हैं। आलम यह है कि कहीं गंदगी का अंबार लगा है तो कहीं पर दवाओं का टोटा है। अधिकांश केंद्रों पर प्रसूताओं के नाश्ते और भोजन में भी खेल हो रहा है। प्रसूताओं को स्वास्थ्य केंद्रों पर अपना बिस्तर और दवाइयां भी खुद लानी पड़ रही है। अधिकारी भी निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति करके चले जाते हैं। यही वजह है कि इन केंद्रों पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों के हौसले बुलंद हैं। जिसका खामियाजा मरीज और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। सोमवार को संडीला तहसील क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों का जायजा लिया तो वहां व्यवस्थाएं बदहाल मिलीं।
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संडीला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सोमवार को दोपहर करीब एक बजे रिपोर्टर पहुंचा तो फार्मासिस्ट स्टोर से नदारद था। बाहर दवा लेने वालों की लंबी लाइन लगी थी। दर्द से परेशान मरीज के तीमारदार दवा के लिए अस्पताल के बाहर दुकान पर खड़े नजर आए। दुलारपुर निवासी मुन्नीलाल और बेगमगंज निवासी फकीरलाल ने बताया कि अस्पताल में दवा न मिलने पर उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ रही है। तीमारदारों की माने तो डाक्टर की लिखी दवा भी चुनिंदा मेडिकल स्टोर पर ही मिलती है और इनकी कीमत भी अधिक ली जाती है। जिसे गरीब आदमी के लिए खरीद पाना मुश्किल होता है। इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डा. शरद वैश्य ने बताया कि अस्पताल मेें जो दवाइयां होती है। उन्हें मरीजों को उपलब्ध कराया जाता है। प्रसूताओं की भी पूरी देखभाल की जा रही है।
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बेंहदर स्वास्थ्य केंद्रों पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। भर्ती होने वाले मरीज या प्रसूताओं को बेड तो मिल जाता लेकिन चादर और लिहाफ घर से लाना पड़ता है। प्रसूताओं को प्रसव के  कुछ देर बाद घर भेज दिया जाता है। ऐसे में नाश्ते और खाने के बजट में भी खेल किया जाता हैै। केंद्र पर भर्ती प्रसूताओं ने स्वास्थ्य कर्मियाें की शिकायतें की। कहा कि उन्हें दवाइयां पर्चे पर लिखकर बाहर से लाने के लिए कहा जाता है। दूर दराज से बेटे मुन्ना को लेकर अस्पताल पहुंचे इरशाद को चिकित्सक ने इंजेक्शन बाहर से लाने के लिए लाल पर्ची थमा दी। रविवार को बम्मरखेड़ा निवासी बाबूलाल की पत्नी ज्ञानवती से प्रसव कराने के लिए 400 रुपये आशा बहू पर लेने का आरोप है। यहां एक्सरे मशीन लगी है लेकिन टेक्नीशियन और फिल्म का अभाव है। यहां तैनात एक चिकित्सक अक्सर गायब रहती है। हालांकि चिकित्साधिकारी डा. शैलेंद्र शुक्ला ने लगाए आरोपों को गलत बताया।
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कोथावां सीएचसी भवन में पुरानी पीएचसी को स्थानांतरित किया गया लेकिन यहां भी व्यवस्थाएं बदहाल है। महिला चिकित्सक ने होने के कारण तैनात स्वास्थ्य कर्मी प्रसूताओं के प्रसव निकटवर्ती नर्सिंग होम पर करवाकर कमीशन वसूल रहे है। इस संबंध में भैनगांव निवासी विकास कुमार की पत्नी विभा ने आरोप लगाया कि वह आशा के साथ केंद्र पर भर्ती हुई थी। कुछ देर बाद उसे केस बिगड़ने की बात कहकर निकटवर्ती नर्सिंग होम में उसे भर्ती कराया गया। जहां चिकित्सक ने उससे प्रसव के लिए पांच हजार रुपये जमा कराए। अस्पताल में दवाइयों के स्टाक का दावा किया जा रहा है लेकिन मरीजाें के लिए तीमारदारों ने बाहर से दवा खरीदने का आरोप लगाया। चिकित्साधिकारी डा. हरिओम ने विभा के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने बताया कि ब्लीडिंग अधिक होने के बाद भी उन्होंने अस्पताल में प्रसव करवाया।  

कछौना सीएचसी पर चंद दवाइयों के सहारे मरीजों का उपचार किया जा रहा है। आरोप है कि डाक्टर अधिकांश मरीजों को दवाएं बाहर से खरीदने के लिए लिख रहे है। अस्पताल में भर्ती प्रसूता मनोकांती, मनोरमा, किरन, सरिता, दुलारी,मीनू, नगीना आदि को एक-दो दिन पहले भर्ती कराया गया था। खाने के नाम पर उन्हें अस्पताल से कुछ नही मिला। कुछ ने घर नजदीक होने के कारण वहां से भोजन मंगवा लिया। भूख से परेशान इन प्रसूताओं को अस्पताल मेे लगा पौष्टिक खाने का मैन्यूू बोर्ड चिढ़ा रहा है। वार्ड में गंदगी का अंबार लगा था। रात में बिजली न होने पर मरीजों को अंधेरे में रहन पड़ता है। सोमवार को अस्पताल से रेफर हुई प्रसूता को रिक्शे पर बैठकर ले जाना पड़ा। इस संबंध में चिकित्साधिकारी डा. आरपी दीक्षित ने बताया कि कुछ अव्यवस्थाएं है जिन्हें सुधारा जाएगा।


भरावन केंद्र पर चिकित्सक भी समय पर नही आते हैै। आरोप है कि प्रसूता को 100 रुपये एएनएम व तीस-तीस रुपये स्वीपर और खाने के लिए 160 रुपये जमा कराए जाते है। हैरत की बात तो यह है कि रात में यहां के मरीजों को भी अंधेरे में रहना पड़ता है। दवाओं का स्टोर पर्याप्त होने का दावा किया जाता लेकिन अधिकांश मरीजों को बाहर से ही दवाएं खरीदनी पड़ रही है। लैब होने के बावजूद जांच के लिए मरीजाें को इधर-उधर भटकना पड़ता है। चिकित्साधिकारी डा. सुशील कुमार ने लगाए गए आरोपों को गलत बताया। कहा कि इस बाबत लिखित शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।  

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