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गुजरात की रजाई ने लोगों को लुभाया
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Fri, 16 Dec 2016 12:18 AM IST
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गुजरात से आयी रजाइयों को निहारते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। गांधी शिल्प बाजार में गुरुवार को गुजरात की रजाई का स्टाल भी सज गया। जिस पर विभिन्न वैरायटी की रजाइयां बिक्री को सजाई गई। रजाई दो हजार से लेकर चार हजार रुपये तक के बीच की हैं। जिनकी बिक्री खूब हो रही है। इस संबंध में उपायुक्त उद्योग लालबिहारी सिंह ने बताया कि यह स्टाल बाद में लगा लेकिन इसकी बिक्री काफी अच्छी हो रही है। लोग मौसम के लिहाज से इन रजाइयों को खूब पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा कंबलों व बनारस व कश्मीर से आईं शालों को भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
शिल्प बाजार में जिलेवासियों को नायाब चीजें देखने को मिल रही हैं। इससे इंकार नहीं किया जा सकता। मेले में न सिर्फ अपने प्रदेश के बल्कि देश भर से आयी हस्तशिल्प की चीजों को देखने व लेने का मौका जिलेवासियों को मिल रहा है। केरल से आकर शिल्प बाजार में गोपती ने स्टाल लगाया है। उनके पास केरल में पहने जाने वाली पारंपरिक ज्वैलरी है जिसको देखने से लेकर खरीदने वालों की काफी भीड़ दिखने लगी है। खासकर महिलाओं के लिए यह स्टाल पसंदीदा स्टालों में से एक हो गया है।
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शिल्प बाजार में बरेली के इस स्टाल पर बांस से बनी कुर्सी सेट से लेकर सोफा सेट, मोढ़ा व छोटी छोटी कुर्सियां भी उपलब्ध हैं जो लोगों को खूब लुभा रही हैं। हालांकि इनकी कीमत पांच सौ से लगाकर 18 हजार तक है। विक्रे ताओं का कहना है कि ग्राहकों की जुटी उनके स्टाल पर भीड़ से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां के लोग बरेली के बांस का फर्नीचर पसंद कर रहे हैं। उन्हे उम्मीद है कि उनकी बिक्री अच्छी होगी।
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असम की बांस की बनी ट्रे, पाट व अन्य गिफ्ट आइटमों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है जिसको लोग खूब पसंद कर रहे हैं। आसाम के आजाद ने बताया कि बांस की कलाकारी को जिलेवासी खूब पसंद कर रहे हैं। बांस की ट्रे को वह खूब बेच चुके हैं। उनका कहना है कि निश्चित रुप से जिले में फिलहाल बैंबू हुनर का उत्पाद लोगों की बाजारों में इससे पहले नहीं आ सका है।
राजकीय इंटर कालेज परिसर में लगने वाले शिल्प मेले में तीन दिनों तक आयोजक दुकानों के आने का इंतजार करते रहे अब दुकानें पूरी हो गई तो हस्तशिल्पी भी दुकानों की मांग को लेकर आयोजकों के पास पहुंचने लगे हैं। उपायुक्त उद्योग लालबिहारी सिंह ने बताया कि अब दुकानों को पाने के लिए मारामारी है। बड़े व्यापारियों ने दो से तीन दुकानें तक ले ली हैं। फिलहाल अब उनके पास दुकानें नहीं हैं। लेकिन बाजार को देख जिले के शिल्पियों से लेकर बाहरी शिल्पियों ने भी बाजार में स्टाल लगाने का मन बनाया है लेकिन दुकानों की और व्यवस्था न होने के कारण उनको निराशा हाथ लग रही है। उन्होंने बताया कि उनके मेले में 104 स्टाल तैयार कराए गए थे। जिसमें से एक या दो को छेाड़कर पूरे हो चुके हैं। इन दो को गुरुवार शाम को दे दिया जाएगा।