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नियम विरुद्ध हार्वेस्टर चला तो कार्रवाई

Sun, 03 Nov 2019 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Nov 2019 11:54 PM IST
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harvester drive according to rules
हरदोई में ग्राम आट में खेत में हो रही कटाई के दौरान जांच के लिए पहुंचे उपनिदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश - फोटो : HARDOI
हरदोई। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों का सख्ती से पालन कराने और किसानों को पराली जलाने से रोकने की कवायद जिले में तेज होती जा रही है। एडीएम व उपनिदेशक कृषि ने रविवार को कलक्ट्रेट सभागार में हार्वेस्टर मालिकों के साथ बैठक की। इसमें कहा कि कंबाइन मशीन को बिना स्ट्रारीपर के चलाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। अगर कहीं ऐसा मिला तो संबंधित मशीन के मालिक के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में एडीएम एसके सिंह ने कहा कि सभी हार्वेस्टर मालिकों को प्रदूषण रोकने में जिला प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। बिना स्ट्रारीपर के खेतों की कटाई किए जाने पर मशीन की जब्ती, आर्थिक जुर्माना और एफआईआर भी कराई जा सकती है, लेकिन प्रशासन का प्रयास है कि नम्रता से प्रदूषण की समस्या से निपटा जाए।
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उपनिदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र ने बैठक में मौजूद मशीन मालिकों से कहा कि फसल की कटाई नीचे से करें ताकि बचे हुए फसल अवशेष को कल्टीवेटर या रोटावेटर से जुताई के समय ही मिट्टी में मिला दिया जाए। उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य हित में सभी हार्वेस्टर मशीन मालिकों को भी सहयोग करना चाहिए। बैठक में 66 हार्वेस्टर मालिक मौजूद रहे।
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इस तरह काम करता है स्ट्रारीपर
स्ट्रारीपर एक कृषि यंत्र है। यह हार्वेस्टिंग मशीन में लगाया जाता है। इससे धान की कटाई के बाद बचने वाले अवशेष छोटे-छोटे टुकड़ों में हो जाते हैं, जो कि जलाने में मुश्किल होते हैं और खेत की जुताई के समय मिट्टी में ही मिल जाते हैं।
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हार्वेस्टर मालिक ने दिया काम का सुझाव
बैठक के दौरान हार्वेस्टर मालिक नायब सिंह ने बेहद काम का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि फसल कटाई के बाद पराली या भूसे को ग्राम पंचायतों में खोली गईं गोशालाओं के लिए मनरेगा के माध्यम से खरीद लिया जाए। इससे पराली जलाने की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग जाएगी। हार्वेस्टर मालिक अपने ट्रैक्टर से पराली या भूसे को गोशालाओं तक पहुंचा देंगे। इस पर एडीएम एसके सिंह ने कहा कि सुझाव अच्छा है और इस पर आला अधिकारियों से वार्ता कर अमल में लाने की कोशिश की जाएगी।
16 किसानों पर 40 हजार रुपये का जुर्माना
उपनिदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र ने बताया कि खेतों में पराली जलाने पर कार्रवाई का दौर जारी है। रविवार को अलग-अलग तहसील क्षेत्रों के 16 किसानों पर 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। उन्होंने बताया कि बिलग्राम तहसील क्षेत्र के किसानों से 15 हजार रुपये, शाहाबाद और संडीला तहसील क्षेत्र में पांच-पांच हजार रुपये, हरदोई और सवायजपुर तहसील क्षेत्र में किसानों पर 7500-7500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। चार हार्वेस्टर मशीन मालिकों को भी नोटिस दी गई है।
पराली जलाने पर सात के नाम नोट कर ले गई टीम
माधौगंज। कृषि विभाग की टीम ने रविवार को क्षेत्र में उन खेतों का निरीक्षण कर जानकारी जुटाई, जहां पराली जलाने के निशान मिले हैं। मामले की रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को सौंपी जाएगी। टीम ने बताया कि सात लोगों के नाम नोट किए गए हैं।

कृषि विभाग के एडीओ सुरेंद्र कुमार ने रविवार को टीम के साथ क्षेत्र के ग्राम श्यामपुरवा, रुदामऊ, सेलापुर, सरफुद्दीनपुर में खेतों का निरीक्षण किया। बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, इससे अग्निकांड की घटनाएं भी होती हैं। सरकार ने पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बाद भी कुछ लोग पराली जला रहे हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर सूची तैयार की जा रही है। टीएमसी दीपकुमार ने बताया कि पराली जलाने पर एक एकड़ पर 2500 रुपये व इससे ऊपर क्षेत्रफल के खेत में फसल अवशेष जलाने पर 25000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। रमाकांत ने बताया कि धान, मक्का, गेंहू आदि की फसल काटने के बाद फसल के अवशेष जलाने नहीं चाहिए। वर्तमान में कोहरा नहीं पड़ रहा है, लेकिन आसमान पर धुंध छाई है। यह प्रदूषण का ही नतीजा है। संवाद
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