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हरदोईः फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाने वाले वकील को तीन साल का कारावास
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हरदोई। फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट -दो ने वकील को दोषी पाया है। उसे तीन साल का कारावास और 12 हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद वकील को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के फत्तेपुर निवासी झम्मन लाल के पास एसबीबीएल गन थी। इसकी जांच तत्कालीन थानाध्यक्ष जेएन सिंह ने की थी। जांच में लाइसेंस फर्जी निकला था।
पूछताछ में झम्मन लाल ने बताया था कि यह लाइसेंस उसने पाली थाना क्षेत्र के गुजीदेई निवासी वकील कृष्ण मुरारी त्रिवेदी से बनवाया है। जो शाहाबाद तहसील में प्रैक्टिस करते हैं।
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इस मामले में एसओ ने दोनों के खिलाफ साजिश के तहत महत्वपूर्ण दस्तावेजों की कूटरचना करने का मामला दो सितंबर 1985 को दर्ज किया था। इस मामले की जांच करते हुए विवेचक एसओ सिंह ने पांच अप्रैल 1986 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए मुकदमे की सुनवाई 19 सितंबर 1986 को शुरू कर दी। मुकदमे के दौरान एक आरोपी झम्मन लाल की मौत हो गई।
सोमवार को इस मुकदमे में न्यायिक मजिस्ट्रेट दो अनुज सिन्हा ने अपना फैसला सुनाया। अभियोजन अधिकारी पीएन स्वामी ने बताया कि न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों के आधार पर वकील कृष्ण मुरारी को दोषी करार देते हुए सजा और अर्थदंड सुनाया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के फत्तेपुर निवासी झम्मन लाल के पास एसबीबीएल गन थी। इसकी जांच तत्कालीन थानाध्यक्ष जेएन सिंह ने की थी। जांच में लाइसेंस फर्जी निकला था।
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पूछताछ में झम्मन लाल ने बताया था कि यह लाइसेंस उसने पाली थाना क्षेत्र के गुजीदेई निवासी वकील कृष्ण मुरारी त्रिवेदी से बनवाया है। जो शाहाबाद तहसील में प्रैक्टिस करते हैं।
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इस मामले में एसओ ने दोनों के खिलाफ साजिश के तहत महत्वपूर्ण दस्तावेजों की कूटरचना करने का मामला दो सितंबर 1985 को दर्ज किया था। इस मामले की जांच करते हुए विवेचक एसओ सिंह ने पांच अप्रैल 1986 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए मुकदमे की सुनवाई 19 सितंबर 1986 को शुरू कर दी। मुकदमे के दौरान एक आरोपी झम्मन लाल की मौत हो गई।
सोमवार को इस मुकदमे में न्यायिक मजिस्ट्रेट दो अनुज सिन्हा ने अपना फैसला सुनाया। अभियोजन अधिकारी पीएन स्वामी ने बताया कि न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों के आधार पर वकील कृष्ण मुरारी को दोषी करार देते हुए सजा और अर्थदंड सुनाया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।