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हरदोईः किसी ने खोया पिता तो किसी ने खोया भाई
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फोटो-14- मृतक रामकृपाल की रोती बिलखती पत्नी संगीता
- फोटो : HARDOI
हरदोई। नदी में ट्राली-ट्रैक्टर गिरने में हुुए हादसे में किसी का सिंदूर मिटा, किसी ने पिता और भाई को खोया है। घटना के दूसरे दिन हादसे से सामने आए हालात पर चार गांवों में चीखें गूंज रहीं हैं। मृतकों के परिजन को ढांढस बंधाने के लिए नाते-रिश्तेदारों आ रहे हैं। मृतकों के परिजनों को अब परिवारों के भरण-षोषण की चिंता सता रही है।
गर्रा नदी पर शनिवार दोपहर हुए हादसे में आठ जिंदगियां चली गईं। खीरे की खेती कर मुनाफा कमाने का सपना लेकर घर से निकले किसान पलक झपकते ही काल के गाल में समा गए।
इस हादसे से पूरे इलाके में गम का माहौल है। हादसे में मौत का शिकार हुए अमित और राम कृपाल की शादी इस साल हुई थी। कुछ ही महीनों में दोनों दुल्हनों कासुहाग उजड़ गया।
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दुल्हनों की चीखों की गूंज से पूरा गांव गम में डूबा है। इतना ही नहीं हादसे में कई परिवारों का सहारा ही छीन लिया। हादसे में किसी ने भाई खोया तो किसी ने पिता हर तरफ चीख-पुकार सुनकर लोगों के दिल दहल रहे थे। हादसे में बेगराजपुर के पांच किसानों मौत हुई है। गांव में रविवार पूरे दिन ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा रहा।
मुकेश की शर्ट दिखा कर रो पड़ीं मां नन्हीं
हादसे में जान गंवाने वाले हरपालपुर के घोड़ीथर गांव निवासी ट्रैक्टर चालक मुकेश (28) की ससुराल बेगराजपुर में है। वह दो वर्ष से पत्नी माधुरी और बेटे सचिन और भोले के साथ ससुराल में ही रहता था। उसके साले नहीं थे। जिसके चलते वह परिवार के साथ ससुर रामशरण के साथ रहकर खेती की देखभाल भी करता था। बेटे की शर्ट उठाकर लाई मां नन्ही का गला भर आया। वह बोलीं, आज से सात दिन पहले बेटा गांव में एक अंतिम संस्कार में शामिल होने आया था। अब बेटे की अर्थी उठने की बात कहकर मां बेहोश हो गई।
तड़पती रही मुकेश की पत्नी, बिलखता रहा बेटा
हादसे अक्सर गहरा जख्म दे जाते हैं, जो परिवार के लिए जिंदगी भर के लिए नासूर बन जाता है। हादसे में ऐसा कुछ बेगराजपुर निवासी मुकेश पुत्र रामभरोसे के परिवार के साथ हुआ। मुकेश के परिवार में पत्नी ऊषा के अलावा तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। रविवार को मुकेश की पत्नी जमीन पर तड़प रही थी। वहीं बगल में चारपाई पर लेटा तीन माह का बेटा बिलख रहा था। यह दृश्य देखने वाले आंसू रोक नहीं पाए।
छह माह में सूनी हुई संगीता की मांग
हादसे में मौत का शिकार हुए बेगराजपुर के रामकृपाल उर्फ नन्हे की की शादी 18 फरवरी को संगीता के साथ हुई थी। वह पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा था। वह पहली बार मंडी में खीरा बेचने गया था और हादसे का शिकार हो गया। छह माह में सुहाग उजड़ने से संगीता का रो-रोकर बुरा हाल है। उसे परिजन व रिश्तेदार सांत्वना देते रहे।
पहली बार मंडी गए, जिंदगी को कह गए अलविदा
बेगराजपुर निवासी नारेंद्र और अमित पहली बार मंडी में खीरा बेचने ले गए थे और हादसे में जिदंगी को अलविदा कह गए। नरेंद्र छह भाई बहनों में दूसरे नंबर पर था। उसका एक वर्ष का बेटा है। वहीं अमित चार भाई-बहनों मेें बड़ा था। उसकी शादी इसी वर्ष 20 मई को हुई थी। हादसे मेें पत्नी माधुरी बदहवास है। वह दिल्ली में मजदूरी करता था। परिजन ने बताया कि शादी के बाद से गांव में रह रहा था। यह कहकर अमित की दादी अहिल्या बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद महिला आरक्षी सरिता ने आंखों पर पानी छिड़ककर होश में लाने का प्रयास किया।
मौत की ट्राली पर सवार हुुए थे नरेंद्र और हरिशरण
कहते हैं कि मौत किसी भी बहाने आ सकती है। ऐसा ही अतर्जीपुरवा निवासी नरेंद्र और दरियापुर बलभद्र निवासी हरिशरण के साथ हुआ। हरिशरण पाली कस्बे में मोबाइल का रिचार्ज कराने आया था। नरेंद्र भी किसी काम से पाली आया था। पाली चौराहे से दोनों ट्राली पर सवार होकर गांव के लिए निकले थे। मृृतक नरेंद्र अविवाहित था। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था। वहीं हरिशरण के परिवार में पत्नी माया के अलावा दो बेटे एक बेटी है। परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
पास में बैठा था भाई, छूट गया साथ
हादसे के समय तैरकर नदी के बाहर निकले सुनील ने बताया कि हादसे के समय उसका छोटा भाई रिंकू ट्रैक्टर की बायीं सीट पर साथ में बैठा था। हादसे में वह तो बच गया, लेकिन भाई का साथ हमेशा के लिए छूट गया। रिंकू चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। घटना से परिजन बदहवास हैं।
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गर्रा नदी पर शनिवार दोपहर हुए हादसे में आठ जिंदगियां चली गईं। खीरे की खेती कर मुनाफा कमाने का सपना लेकर घर से निकले किसान पलक झपकते ही काल के गाल में समा गए।
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इस हादसे से पूरे इलाके में गम का माहौल है। हादसे में मौत का शिकार हुए अमित और राम कृपाल की शादी इस साल हुई थी। कुछ ही महीनों में दोनों दुल्हनों कासुहाग उजड़ गया।
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दुल्हनों की चीखों की गूंज से पूरा गांव गम में डूबा है। इतना ही नहीं हादसे में कई परिवारों का सहारा ही छीन लिया। हादसे में किसी ने भाई खोया तो किसी ने पिता हर तरफ चीख-पुकार सुनकर लोगों के दिल दहल रहे थे। हादसे में बेगराजपुर के पांच किसानों मौत हुई है। गांव में रविवार पूरे दिन ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा रहा।
मुकेश की शर्ट दिखा कर रो पड़ीं मां नन्हीं
हादसे में जान गंवाने वाले हरपालपुर के घोड़ीथर गांव निवासी ट्रैक्टर चालक मुकेश (28) की ससुराल बेगराजपुर में है। वह दो वर्ष से पत्नी माधुरी और बेटे सचिन और भोले के साथ ससुराल में ही रहता था। उसके साले नहीं थे। जिसके चलते वह परिवार के साथ ससुर रामशरण के साथ रहकर खेती की देखभाल भी करता था। बेटे की शर्ट उठाकर लाई मां नन्ही का गला भर आया। वह बोलीं, आज से सात दिन पहले बेटा गांव में एक अंतिम संस्कार में शामिल होने आया था। अब बेटे की अर्थी उठने की बात कहकर मां बेहोश हो गई।
तड़पती रही मुकेश की पत्नी, बिलखता रहा बेटा
हादसे अक्सर गहरा जख्म दे जाते हैं, जो परिवार के लिए जिंदगी भर के लिए नासूर बन जाता है। हादसे में ऐसा कुछ बेगराजपुर निवासी मुकेश पुत्र रामभरोसे के परिवार के साथ हुआ। मुकेश के परिवार में पत्नी ऊषा के अलावा तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। रविवार को मुकेश की पत्नी जमीन पर तड़प रही थी। वहीं बगल में चारपाई पर लेटा तीन माह का बेटा बिलख रहा था। यह दृश्य देखने वाले आंसू रोक नहीं पाए।
छह माह में सूनी हुई संगीता की मांग
हादसे में मौत का शिकार हुए बेगराजपुर के रामकृपाल उर्फ नन्हे की की शादी 18 फरवरी को संगीता के साथ हुई थी। वह पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा था। वह पहली बार मंडी में खीरा बेचने गया था और हादसे का शिकार हो गया। छह माह में सुहाग उजड़ने से संगीता का रो-रोकर बुरा हाल है। उसे परिजन व रिश्तेदार सांत्वना देते रहे।
पहली बार मंडी गए, जिंदगी को कह गए अलविदा
बेगराजपुर निवासी नारेंद्र और अमित पहली बार मंडी में खीरा बेचने ले गए थे और हादसे में जिदंगी को अलविदा कह गए। नरेंद्र छह भाई बहनों में दूसरे नंबर पर था। उसका एक वर्ष का बेटा है। वहीं अमित चार भाई-बहनों मेें बड़ा था। उसकी शादी इसी वर्ष 20 मई को हुई थी। हादसे मेें पत्नी माधुरी बदहवास है। वह दिल्ली में मजदूरी करता था। परिजन ने बताया कि शादी के बाद से गांव में रह रहा था। यह कहकर अमित की दादी अहिल्या बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद महिला आरक्षी सरिता ने आंखों पर पानी छिड़ककर होश में लाने का प्रयास किया।
मौत की ट्राली पर सवार हुुए थे नरेंद्र और हरिशरण
कहते हैं कि मौत किसी भी बहाने आ सकती है। ऐसा ही अतर्जीपुरवा निवासी नरेंद्र और दरियापुर बलभद्र निवासी हरिशरण के साथ हुआ। हरिशरण पाली कस्बे में मोबाइल का रिचार्ज कराने आया था। नरेंद्र भी किसी काम से पाली आया था। पाली चौराहे से दोनों ट्राली पर सवार होकर गांव के लिए निकले थे। मृृतक नरेंद्र अविवाहित था। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था। वहीं हरिशरण के परिवार में पत्नी माया के अलावा दो बेटे एक बेटी है। परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
पास में बैठा था भाई, छूट गया साथ
हादसे के समय तैरकर नदी के बाहर निकले सुनील ने बताया कि हादसे के समय उसका छोटा भाई रिंकू ट्रैक्टर की बायीं सीट पर साथ में बैठा था। हादसे में वह तो बच गया, लेकिन भाई का साथ हमेशा के लिए छूट गया। रिंकू चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। घटना से परिजन बदहवास हैं।

ोटो-15- मृतक मुकेश का चारपाई पर बिलख रहा एक माह का पुत्र- फोटो : HARDOI

फोटो-16- मृतक मुकेश पुत्र श्रीधर की रोती बिलखती पत्नी माधुरी- फोटो : HARDOI