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शहर के मैदानों में खिलाड़ियों का खेल खत्म!
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फोटो-22- शहीद उद्यान में सूखे पड़े तालाब में क्रिकेट खेलते युवक
- फोटो : HARDOI
हरदोई। शहर के आधा दर्जन प्रमुख मैदानों पर खिलाड़ियों का खेल अब खत्म हो चुका है। घंटाघर, गांधी भवन, आरआर इंटर कॉलेज, आईटीआई, सीएसएन और जीआईसी के खेल मैदान कभी खिलाड़ियों की नर्सरी तैयार करने की जमीन रहे हैं।
इन मैदानों पर क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन और फुटबॉल जैसे खेल युवा खेलते थे। खिलाड़ी अपनी टीम और संसाधनों के साथ यहां आते थे, हाथ आजमाते थे और चले जाते थे। अब यह व्यवस्था बदल गई है।
ये सभी ग्राउंड अब खिलाड़ियों की पहुंच से दूर हो चुके हैं। हालात यह हैं कि सैर-सपाटे के लिए कंपनी गार्डेन के जिस तालाब के चारों ओर लोग दौड़ लगाते हैं, उस तालाब के सूखने के बाद बच्चे उसमें खेलने जाते हैं। बारिश के मौसम में पानी भर जाने की वजह से यह ग्राउंड भी बच्चों के खेल का शौक पूरा नहीं कर पाता।
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गांधी भवन ग्राउंड
शहर का गांधी भवन नगर प्रशासन की कमाई का जरिया बन चुका है। यहां शादी-बरातों व बैठकों के लिए सरकारी शुल्क लेकर राजस्व बढ़ाया जाता है। इसलिए अब यहां का ग्राउंड बच्चों के खेलने का स्थान नहीं रहा।
घंटाघर ग्राउंड
घंटाघर स्थित खेल का मैदान किसी समय सभी खिलाड़ियों के लिए खुला था, लेकिन अब एक क्लब के सदस्य ही यहां बैडमिंटन खेलने आते हैं। बाकी के लिए मैदान पर ताला लग गया है।
आरआर इंटर कॉलेज ग्राउंड
शहर के आरआर इंटर कॉलेज का मैदान खिलाड़ियों की पसंद रहा है। बाहरी और कॉलेज में पढ़ने वाले, दोनों ही खिलाड़ियों के लिए ही यह मैदान खुला था। जिसका भी मन होता वह यहां खेलने चला आता, लेकिन अब कालेज प्रबंधन ने बाउंड्री खींचकर यह व्यवस्था खत्म कर दी है।
आईटीआई ग्राउंड
आईटीआई ग्राउंड शहर के सबसे बड़े और चुनिंदा ग्राउंड में से एक है। यहां दिन के हर पहर में खिलाड़ी नजर आते थे। कभी क्रिकेट, कभी हॉकी तो कभी बैडमिंटन होता था। अब यहां भी यह व्यवस्था खत्म हो गई है। जनसभाओं के लिए राजनीतिक प्रयोग भी इस ग्राउंड से खेल की व्यवस्था खत्म करने का कारण है।
सीएसएन पीजी कॉलेज का ग्राउंड
शहर की लखनऊ चुंगी पर स्थित सीएसएन पीजी कॉलेज की बाउंड्रीवाल के भीतर बाहरी खिलाड़ियों का प्रवेश वर्जित है। कॉलेज के छात्र भी कॉलेज टाइम में ही यहां खेल सकते हैं। इसके बाद यह ग्राउंड भी कॉलेज प्रबंधन के ताले में बंद हो जाता है।
स्पोर्ट्स स्टेडियम ही विकल्प
शहर से बाहर सीतापुर बाईपास पर स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम ही खिलाड़ियों के लिए एक मात्र विकल्प है। हालांकि शहर से दूरी अधिक होने की वजह से खिलाड़ी यहां नियमित जाकर नहीं खेल पाते हैं। इसके अलावा एक ही स्टेडियम में शहर भर के बच्चों का खेल पाना भी संभव नहीं है।
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इन मैदानों पर क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन और फुटबॉल जैसे खेल युवा खेलते थे। खिलाड़ी अपनी टीम और संसाधनों के साथ यहां आते थे, हाथ आजमाते थे और चले जाते थे। अब यह व्यवस्था बदल गई है।
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ये सभी ग्राउंड अब खिलाड़ियों की पहुंच से दूर हो चुके हैं। हालात यह हैं कि सैर-सपाटे के लिए कंपनी गार्डेन के जिस तालाब के चारों ओर लोग दौड़ लगाते हैं, उस तालाब के सूखने के बाद बच्चे उसमें खेलने जाते हैं। बारिश के मौसम में पानी भर जाने की वजह से यह ग्राउंड भी बच्चों के खेल का शौक पूरा नहीं कर पाता।
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गांधी भवन ग्राउंड
शहर का गांधी भवन नगर प्रशासन की कमाई का जरिया बन चुका है। यहां शादी-बरातों व बैठकों के लिए सरकारी शुल्क लेकर राजस्व बढ़ाया जाता है। इसलिए अब यहां का ग्राउंड बच्चों के खेलने का स्थान नहीं रहा।
घंटाघर ग्राउंड
घंटाघर स्थित खेल का मैदान किसी समय सभी खिलाड़ियों के लिए खुला था, लेकिन अब एक क्लब के सदस्य ही यहां बैडमिंटन खेलने आते हैं। बाकी के लिए मैदान पर ताला लग गया है।
आरआर इंटर कॉलेज ग्राउंड
शहर के आरआर इंटर कॉलेज का मैदान खिलाड़ियों की पसंद रहा है। बाहरी और कॉलेज में पढ़ने वाले, दोनों ही खिलाड़ियों के लिए ही यह मैदान खुला था। जिसका भी मन होता वह यहां खेलने चला आता, लेकिन अब कालेज प्रबंधन ने बाउंड्री खींचकर यह व्यवस्था खत्म कर दी है।
आईटीआई ग्राउंड
आईटीआई ग्राउंड शहर के सबसे बड़े और चुनिंदा ग्राउंड में से एक है। यहां दिन के हर पहर में खिलाड़ी नजर आते थे। कभी क्रिकेट, कभी हॉकी तो कभी बैडमिंटन होता था। अब यहां भी यह व्यवस्था खत्म हो गई है। जनसभाओं के लिए राजनीतिक प्रयोग भी इस ग्राउंड से खेल की व्यवस्था खत्म करने का कारण है।
सीएसएन पीजी कॉलेज का ग्राउंड
शहर की लखनऊ चुंगी पर स्थित सीएसएन पीजी कॉलेज की बाउंड्रीवाल के भीतर बाहरी खिलाड़ियों का प्रवेश वर्जित है। कॉलेज के छात्र भी कॉलेज टाइम में ही यहां खेल सकते हैं। इसके बाद यह ग्राउंड भी कॉलेज प्रबंधन के ताले में बंद हो जाता है।
स्पोर्ट्स स्टेडियम ही विकल्प
शहर से बाहर सीतापुर बाईपास पर स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम ही खिलाड़ियों के लिए एक मात्र विकल्प है। हालांकि शहर से दूरी अधिक होने की वजह से खिलाड़ी यहां नियमित जाकर नहीं खेल पाते हैं। इसके अलावा एक ही स्टेडियम में शहर भर के बच्चों का खेल पाना भी संभव नहीं है।