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3 सालों में छठवीं बार फिर महानिदेशक को भेजा रिमाइंडर
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हरदोई। जिला चिकित्सालय में सफेद हाथी साबित हो रही कंपोनेंट सेपरेटर की इमारत के लिए उपकरणों की मांग आखिरकार शासन तक एक बार फिर पहुंच गई है। कोरोना काल में जनहित की मांग को अमर उजाला में उजागर किए जाने के बाद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने अनुस्मारक पत्र (रिमांइडर) शासन को भेजा है।
जिले में अभी तक किसी रक्तदाता द्वारा दिया गया एक यूनिट रक्त सिर्फ एक की ही व्यक्ति की जान बचा सकता है। कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट के कार्य करने के बाद इस एक यूनिट ब्लड को आरबीसी, प्लेट्लेट्स, प्लाज्मा व क्रयाओ में विभक्त किया जा सकता है।
यानी एक यूनिट ब्लड जरूरत के हिसाब से चार लोगों के काम आ सकता है। इसकी उपयोगिता को समझते हुए वर्ष 2016 में कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट की स्थापना के लिए जिले का चयन हुआ था।
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यूनिट स्थापना के लिए शासन स्तर से एक करोड़ का बजट भी मिल गया था। इस पैसे से इमारत से लेकर उसमें उपकरण की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जानी थी।
जिले में जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक के पीछे यूनिट की इमारत तैयार कराके 31 मार्च 2017 को शासन को उपकरण भेजने के लिए पत्र भेज दिया गया था।
तब से लेकर अब तक उपकरणों का इंतजार किया जा रहा है। अमर उजाला ने 18 मई के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
इसका संज्ञान लेकर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.एके शाक्य ने एक बार फिर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक को अनुस्मारक पत्र भेजा है और उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उपकरण आने के बाद अधिक से अधिक लोगों को लाभ दिया जा सकता है। सीएमएस बोले कि यहां से प्रयास जारी है। इस बार छठवां अनुस्मारक पत्र भेजा जा रहा है।
तीन सालों में इस तरह जिले से भेजे गए रिमाइंडर
16-10-2017 को पहला
15-01-2018 को दूसरा
27-06-2018 को तीसरा
09-10-2020 को चौथा
11-02-2021 को पांचवां
19-05-2021 को छठा
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जिले में अभी तक किसी रक्तदाता द्वारा दिया गया एक यूनिट रक्त सिर्फ एक की ही व्यक्ति की जान बचा सकता है। कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट के कार्य करने के बाद इस एक यूनिट ब्लड को आरबीसी, प्लेट्लेट्स, प्लाज्मा व क्रयाओ में विभक्त किया जा सकता है।
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यानी एक यूनिट ब्लड जरूरत के हिसाब से चार लोगों के काम आ सकता है। इसकी उपयोगिता को समझते हुए वर्ष 2016 में कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट की स्थापना के लिए जिले का चयन हुआ था।
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यूनिट स्थापना के लिए शासन स्तर से एक करोड़ का बजट भी मिल गया था। इस पैसे से इमारत से लेकर उसमें उपकरण की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जानी थी।
जिले में जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक के पीछे यूनिट की इमारत तैयार कराके 31 मार्च 2017 को शासन को उपकरण भेजने के लिए पत्र भेज दिया गया था।
तब से लेकर अब तक उपकरणों का इंतजार किया जा रहा है। अमर उजाला ने 18 मई के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
इसका संज्ञान लेकर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.एके शाक्य ने एक बार फिर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक को अनुस्मारक पत्र भेजा है और उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उपकरण आने के बाद अधिक से अधिक लोगों को लाभ दिया जा सकता है। सीएमएस बोले कि यहां से प्रयास जारी है। इस बार छठवां अनुस्मारक पत्र भेजा जा रहा है।
तीन सालों में इस तरह जिले से भेजे गए रिमाइंडर
16-10-2017 को पहला
15-01-2018 को दूसरा
27-06-2018 को तीसरा
09-10-2020 को चौथा
11-02-2021 को पांचवां
19-05-2021 को छठा