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गांव की सरकार को जमीन की दरकार
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हरदोई। गांवों की सरकार को मजबूती देने के साथ ही इन्हें आधुनिकता प्रदान करने के उद्देश्य से पंचायत सहायकों की तैनाती की योजना बनी। प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत भवन बनाने का निर्णय हुआ है। जहां पहले से पंचायत भवन या मिनी सचिवालय हैं, उनकी मरम्मत का कार्य भी किया जाना है। इस सबके बीच कई गांव ऐसे हैं जहां पंचायत भवन के लिए या तो जमीन नहीं है, या फिर निर्माण से पहले ही भूमि विवाद सामने आए हैं। कुल मिलाकर गांव की सरकार चलाने के लिए जमीन ही नहीं मिल पा रही है।
जिले में 1306 ग्राम पंचायतें हैं। मनरेगा और ग्राम पंचायत को राज्य वित्त से मिलने वाले बजट के संयुक्त इस्तेमाल से 408 पंचायतों में पंचायत भवन बनने हैं। चालू वित्तीय वर्ष के पांच माह बीत जाने के बाद भी 18 ग्राम पंचायतों में अभी तक कार्य शुरू ही नहीं हुआ है। वजह यह कि पंचायत भवन के निर्माण के लिए भूमि ही नहीं मिल पा रही है। कहीं भूमि उपलब्ध नहीं है, तो कहीं भूमि विवाद है। यह हाल तब है, जबकि पंचायत भवन का निर्माण इस बार शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है और खुद मुख्य विकास अधिकारी लगातार इसकी समीक्षा करतीं हैं।
प्रकरण 1-
टड़ियावां विकास खंड की 21 ग्राम पंचायतों में चालू वित्तीय वर्ष में राज्यवित्त और मनरेगा के संयुक्त खर्च से पंचायत भवन का निर्माण होना है। यहां इस विकास खंड की ग्राम पंचायत राम नगर में भी निर्माण कार्य कराया जाना है, लेकिन इस ग्राम पंचायत में पंचायत भवन का निर्माण कराने के लिए भूमि ही उपलब्ध नहीं है।
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प्रकरण 2-
सांडी विकास खंड की ग्राम पंचायत बेहथर में भी चालू वित्तीय वर्ष में ही पंचायत भवन का निर्माण होना है। पंचायत राज विभाग के जिम्मेदार यहां पंचायत भवन का निर्माण कराने की जद्दोजहद में लगे हैं, लेकिन अब पता चला है कि पंचायत भवन का निर्माण कराने के लिए यहां भूमि ही उपलब्ध नहीं है।
प्रकरण 3-
हरियावां विकास खंड की ग्राम पंचायत कटिघरा में भी मनरेगा और राज्य वित्त के बजट से पंचायत भवन का निर्माण होना है। यहां भी अब तक पंचायत भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। जब इसके कारणों की पड़ताल की गई, तो पता चला कि यहां पंचायत भवन की भूमि को लेकर विवाद है। यह विवाद फौरी तौर पर सुलझता भी नजर नहीं आ रहा।
जिम्मेदारों की सुनिए
जिला पंचायत राज अधिकारी गिरीश चंद्र ने बताया कि कुछ जगहों पर भूमि विवाद होने और कुछ जगहों पर भूमि उपलब्ध न होने की बात जानकारी में आई है। मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया गया है। डीएम और सीडीओ भी इस मामले को लेकर गंभीर हैं और जल्द ही कोई रास्ता निकल आएगा।
इन गांवों में है भूमि विवाद
बिलग्राम विकास खंड के चांदपुर, माधौगंज विकास खंड के सेलापुर, डकौली और खेरवा, टड़ियावां विकास खंड के जिओ और हरियावां विकास खंड के कटिघरा।
इनसेट
यहां नहीं मिल पा रही भूमि
सुरसा विकास खंड के माधौपुर, टड़ियावां विकास खंड के रामनगर, शाहाबाद विकास खंड के नवीपुर और गढ़ीचांद खां, सांडी विकास खंड के बेहथर, चंदऊ तिगावां, बरौली, हरपालपुर विकास खंड के चाऊंपुर, गौरिया और मुरवा शाहबुद्दीनपुर।
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जिले में 1306 ग्राम पंचायतें हैं। मनरेगा और ग्राम पंचायत को राज्य वित्त से मिलने वाले बजट के संयुक्त इस्तेमाल से 408 पंचायतों में पंचायत भवन बनने हैं। चालू वित्तीय वर्ष के पांच माह बीत जाने के बाद भी 18 ग्राम पंचायतों में अभी तक कार्य शुरू ही नहीं हुआ है। वजह यह कि पंचायत भवन के निर्माण के लिए भूमि ही नहीं मिल पा रही है। कहीं भूमि उपलब्ध नहीं है, तो कहीं भूमि विवाद है। यह हाल तब है, जबकि पंचायत भवन का निर्माण इस बार शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है और खुद मुख्य विकास अधिकारी लगातार इसकी समीक्षा करतीं हैं।
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प्रकरण 1-
टड़ियावां विकास खंड की 21 ग्राम पंचायतों में चालू वित्तीय वर्ष में राज्यवित्त और मनरेगा के संयुक्त खर्च से पंचायत भवन का निर्माण होना है। यहां इस विकास खंड की ग्राम पंचायत राम नगर में भी निर्माण कार्य कराया जाना है, लेकिन इस ग्राम पंचायत में पंचायत भवन का निर्माण कराने के लिए भूमि ही उपलब्ध नहीं है।
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प्रकरण 2-
सांडी विकास खंड की ग्राम पंचायत बेहथर में भी चालू वित्तीय वर्ष में ही पंचायत भवन का निर्माण होना है। पंचायत राज विभाग के जिम्मेदार यहां पंचायत भवन का निर्माण कराने की जद्दोजहद में लगे हैं, लेकिन अब पता चला है कि पंचायत भवन का निर्माण कराने के लिए यहां भूमि ही उपलब्ध नहीं है।
प्रकरण 3-
हरियावां विकास खंड की ग्राम पंचायत कटिघरा में भी मनरेगा और राज्य वित्त के बजट से पंचायत भवन का निर्माण होना है। यहां भी अब तक पंचायत भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। जब इसके कारणों की पड़ताल की गई, तो पता चला कि यहां पंचायत भवन की भूमि को लेकर विवाद है। यह विवाद फौरी तौर पर सुलझता भी नजर नहीं आ रहा।
जिम्मेदारों की सुनिए
जिला पंचायत राज अधिकारी गिरीश चंद्र ने बताया कि कुछ जगहों पर भूमि विवाद होने और कुछ जगहों पर भूमि उपलब्ध न होने की बात जानकारी में आई है। मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया गया है। डीएम और सीडीओ भी इस मामले को लेकर गंभीर हैं और जल्द ही कोई रास्ता निकल आएगा।
इन गांवों में है भूमि विवाद
बिलग्राम विकास खंड के चांदपुर, माधौगंज विकास खंड के सेलापुर, डकौली और खेरवा, टड़ियावां विकास खंड के जिओ और हरियावां विकास खंड के कटिघरा।
इनसेट
यहां नहीं मिल पा रही भूमि
सुरसा विकास खंड के माधौपुर, टड़ियावां विकास खंड के रामनगर, शाहाबाद विकास खंड के नवीपुर और गढ़ीचांद खां, सांडी विकास खंड के बेहथर, चंदऊ तिगावां, बरौली, हरपालपुर विकास खंड के चाऊंपुर, गौरिया और मुरवा शाहबुद्दीनपुर।