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... तो अब बीडीओ को ढूंढे नहीं मिल रही माप पुस्तिका
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हरदोई। भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत लोधौरा में नींव स्तर तक बने पंचायत भवन का छत स्तर तक का भुगतान किए जाने की माप पुस्तिका यानी एमबी खोजे नहीं मिल रही है। बुधवार को भी ब्लाक से एमबी जांच टीम के अध्यक्ष मनरेगा उपायुक्त को नहीं भेजी गई। उधर, दूसरी ओर मनरेगा उपायुक्त ने गुरुवार को हर हाल में माप पुस्तिका उपलब्ध कराने और पुस्तिका न मिलने पर इसे जानबूझकर खो देने की एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है।
लोधौरा में पंचायत चुनाव से पहले ही अंधपुर मोड़ पर पंचायत भवन का निर्माण शुरू हुआ था। नींव स्तर तक बने पंचायत भवन के लिए छत स्तर तक का सवा पांच लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया था। सात हजार रुपये से अधिक का भुगतान मजदूरी पर भी किया गया था। पूरा भुगतान मनरेगा से ही सामग्री और श्रमांश पर हुआ था। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया था। इस खुलासे के बाद डीएम अविनाश कुमार के निर्देश पर सीडीओ आकांक्षा राना ने मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर दी थी। 20 जुलाई को गठित जांच टीम से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी। टीम ने जांच भी कर ली, लेकिन बुधवार को भी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को नहीं दी जा सकी। पूरे मामले में एमबी पर तकनीकी सहायक समेत अन्य कर्मचारियों के हस्ताक्षर न होने की बात प्राथमिक तौर पर स्पष्ट हुई थी। सोमवार को जांच के लिए गए मनरेगा उपायुक्त को खंड विकास अधिकारी सुधीर कुमार माप पुस्तिका नहीं दिखा पाए थे और मंगलवार तक का समय मांगा था। मंगलवार को भी माप पुस्तिका मनरेगा उपायुक्त को नहीं मिली। बुधवार को ब्लाक के दो कर्मचारी हरदोई तो आए लेकिन अभिलेखों में माप पुस्तिका फिर नहीं मिली। मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि बुधवार को भी बीडीओ ने माप पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराई है। अगर गुरुवार को माप पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराई गई, तो इसके गायब हो जाने की एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि जानबूझकर एमबी नहीं दिखाई जा रही है।
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लोधौरा में पंचायत चुनाव से पहले ही अंधपुर मोड़ पर पंचायत भवन का निर्माण शुरू हुआ था। नींव स्तर तक बने पंचायत भवन के लिए छत स्तर तक का सवा पांच लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया था। सात हजार रुपये से अधिक का भुगतान मजदूरी पर भी किया गया था। पूरा भुगतान मनरेगा से ही सामग्री और श्रमांश पर हुआ था। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया था। इस खुलासे के बाद डीएम अविनाश कुमार के निर्देश पर सीडीओ आकांक्षा राना ने मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर दी थी। 20 जुलाई को गठित जांच टीम से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी। टीम ने जांच भी कर ली, लेकिन बुधवार को भी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को नहीं दी जा सकी। पूरे मामले में एमबी पर तकनीकी सहायक समेत अन्य कर्मचारियों के हस्ताक्षर न होने की बात प्राथमिक तौर पर स्पष्ट हुई थी। सोमवार को जांच के लिए गए मनरेगा उपायुक्त को खंड विकास अधिकारी सुधीर कुमार माप पुस्तिका नहीं दिखा पाए थे और मंगलवार तक का समय मांगा था। मंगलवार को भी माप पुस्तिका मनरेगा उपायुक्त को नहीं मिली। बुधवार को ब्लाक के दो कर्मचारी हरदोई तो आए लेकिन अभिलेखों में माप पुस्तिका फिर नहीं मिली। मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि बुधवार को भी बीडीओ ने माप पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराई है। अगर गुरुवार को माप पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराई गई, तो इसके गायब हो जाने की एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि जानबूझकर एमबी नहीं दिखाई जा रही है।
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