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टीम ने नहीं दी रिपोर्ट, बीडीओ ने नहीं दी एमबी
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हरदोई। भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत लोधौरा में नींव स्तर तक बने पंचायत भवन का छत स्तर तक का भुगतान किए जाने के मामले में मंगलवार को जांच टीम अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को नहीं दे पाए। दरअसल, बीडीओ की ओर से माप पुस्तिका (एमबी) व अन्य दस्तावेज देने के लिए मंगलवार का समय दिया था। बावजूद इसके दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए गए।
ग्राम पंचायत लोधौरा में मनरेगा के तहत पंचायत भवन के निर्माण पर सामग्री अंश के लिए पांच लाख 25 हजार 156 रुपये का भुगतान कर दिया गया था। यह भुगतान छत स्तर का था, लेकिन निर्माण नींव स्तर तक ही हुआ था। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया, तो डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने जांच कमेटी बना दी। सोमवार को जांच कमेटी के भरावन पहुंचने से पहले ही यह धनराशि मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी के प्रशासनिक खाते में जमा कर दी गई और फिर यही राशि कार्यक्रम अधिकारी ने जिला समन्वयक के खाते में स्थानांतरित कर दी। इसके बावजूद भी जांच कमेटी को ब्लाक में उक्त कार्य की माप पुस्तिका यानी एमबी नहीं दिखाई गई। एमबी दिखाने के लिए बीडीओ सुधीर कुमार ने जांच कमेटी के अध्यक्ष मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल से मंगलवार तक की मोहलत मांगी थी, लेकिन मंगलवार को भी एमबी नहीं मिली। जांच के बाद भी टीम ने अपनी रिपोर्ट सीडीओ को नहीं सौंपी है। मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि बुधवार को वह रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज देंगे।
अपने-अपने बचाव की जुगत भिड़ा रहे जिम्मेदार
जांच टीम में शामिल एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि नींव स्तर तक के निर्माण के बाद ही छत स्तर तक का भुगतान निकालने की पुष्टि हो ही चुकी है। बीडीओ ने खुद ही रुपये वापस जमा करवाकर इस अनियमितता को साफ तौर पर स्वीकार कर लिया है। दूसरी ओर अब इस अनियमितता की चपेट में आ रहे अधिकारी और कर्मचारी अपने अपने बचाव की जुगत भिड़ा रहे हैं। गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार माने जा रहे एक अधिकारी अपनी मामूली गलती स्वीकार कर रहे हैं और इसका पूरा ठीकरा अपने मातहतों तकनीकी सहायक, सचिव, कंप्यूटर ऑपरेटर और एपीओ पर फोड़ रहे हैं।
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ग्राम पंचायत लोधौरा में मनरेगा के तहत पंचायत भवन के निर्माण पर सामग्री अंश के लिए पांच लाख 25 हजार 156 रुपये का भुगतान कर दिया गया था। यह भुगतान छत स्तर का था, लेकिन निर्माण नींव स्तर तक ही हुआ था। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया, तो डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने जांच कमेटी बना दी। सोमवार को जांच कमेटी के भरावन पहुंचने से पहले ही यह धनराशि मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी के प्रशासनिक खाते में जमा कर दी गई और फिर यही राशि कार्यक्रम अधिकारी ने जिला समन्वयक के खाते में स्थानांतरित कर दी। इसके बावजूद भी जांच कमेटी को ब्लाक में उक्त कार्य की माप पुस्तिका यानी एमबी नहीं दिखाई गई। एमबी दिखाने के लिए बीडीओ सुधीर कुमार ने जांच कमेटी के अध्यक्ष मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल से मंगलवार तक की मोहलत मांगी थी, लेकिन मंगलवार को भी एमबी नहीं मिली। जांच के बाद भी टीम ने अपनी रिपोर्ट सीडीओ को नहीं सौंपी है। मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि बुधवार को वह रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज देंगे।
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अपने-अपने बचाव की जुगत भिड़ा रहे जिम्मेदार
जांच टीम में शामिल एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि नींव स्तर तक के निर्माण के बाद ही छत स्तर तक का भुगतान निकालने की पुष्टि हो ही चुकी है। बीडीओ ने खुद ही रुपये वापस जमा करवाकर इस अनियमितता को साफ तौर पर स्वीकार कर लिया है। दूसरी ओर अब इस अनियमितता की चपेट में आ रहे अधिकारी और कर्मचारी अपने अपने बचाव की जुगत भिड़ा रहे हैं। गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार माने जा रहे एक अधिकारी अपनी मामूली गलती स्वीकार कर रहे हैं और इसका पूरा ठीकरा अपने मातहतों तकनीकी सहायक, सचिव, कंप्यूटर ऑपरेटर और एपीओ पर फोड़ रहे हैं।
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