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वायरल ऑडियो : तीन माह की जांच, नतीजा चेतावनी
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हरदोई। संडीला बाल विकास परियोजना कार्यालय के लिपिक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के बीच बातचीत के वायरल ऑडियो की जांच तीन माह बाद पूरी हो गई है। तीन माह की जांच का नतीजा चेतावनी के तौर पर सामने आया है। जांच अधिकारी ने पूरे प्रकरण में लिपिक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को लगभग क्लीनचिट दी है, लेकिन सीडीओ ने फिर भी दोनों को कठोर चेतावनी निर्गत करने के निर्देश जिला कार्यक्रम अधिकारी को दिए हैं।
संडीला बाल विकास परियोजना कार्यालय में तैनात लिपिक महेश कुमार रावत और इसी क्षेत्र में तैनात आंगनबाड़ी कर्मी अनीता सिंह का एक ऑडियो मार्च में वायरल हुआ था। ऑडियो में कथित तौर पर रुपयों के लेनदेन की बात फीडिंग के नाम पर सामने आई थी। इसको संज्ञान में लेकर सीडीओ आकांक्षा राना ने 10 मार्च को पूरे प्रकरण की जांच के आदेश देते हुए जिला विकास अधिकारी राजेंद्र प्रसाद को जांच अधिकारी बनाया था। एक पखवारे में ही जांच पूरी कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश थे, लेकिन तीन माह में जांच पूरी हो पाई। जांच आख्या में जिला विकास अधिकारी ने लिपिक और आंगनबाड़ी कर्मी को लगभग क्लीनचिट दे दी है। इसके बाद सीडीओ ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को जारी निर्देशों में महेश कुमार रावत और अनीता सिंह को कठोर चेतावनी जारी करने को कहा है।
न तुम फंसो न हम की तर्ज पर दिए गए बयान
जांच आख्या के मुताबिक डीडीओ ने महेश कुमार रावत और अनीता सिंह के बयान लिए। ऑडियो में दोनों की बातचीत की पुष्टि हुई है। महेश रावत ने अपने बयान में कहा है कि सरवा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनीता सिंह से डाटा फीडिंग की रिपोर्ट एकत्र करने के संबंध में बात की है, वहीं अनीता सिंह ने भी अपने बयान में कहा है कि महेश कुमार रावत ने उनसे कोई रुपये नहीं मांगे और न ही रुपये दिए गए।
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जुबान लड़खड़ा गई थी, फाइल की जगह रुपये निकल गया
जांच के दौरान ऑडियो में आए बीस हजार रुपये के जिक्र पर अनीता का बयान लिया गया। अनीता का कहना है कि 20 केंद्रों की रिपोर्ट की जगह 20 हजार रुपये उसके मुंह से निकल गया। अनीता का कहना है कि उसकी जुबान लड़खड़ा गई थी।
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संडीला बाल विकास परियोजना कार्यालय में तैनात लिपिक महेश कुमार रावत और इसी क्षेत्र में तैनात आंगनबाड़ी कर्मी अनीता सिंह का एक ऑडियो मार्च में वायरल हुआ था। ऑडियो में कथित तौर पर रुपयों के लेनदेन की बात फीडिंग के नाम पर सामने आई थी। इसको संज्ञान में लेकर सीडीओ आकांक्षा राना ने 10 मार्च को पूरे प्रकरण की जांच के आदेश देते हुए जिला विकास अधिकारी राजेंद्र प्रसाद को जांच अधिकारी बनाया था। एक पखवारे में ही जांच पूरी कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश थे, लेकिन तीन माह में जांच पूरी हो पाई। जांच आख्या में जिला विकास अधिकारी ने लिपिक और आंगनबाड़ी कर्मी को लगभग क्लीनचिट दे दी है। इसके बाद सीडीओ ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को जारी निर्देशों में महेश कुमार रावत और अनीता सिंह को कठोर चेतावनी जारी करने को कहा है।
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न तुम फंसो न हम की तर्ज पर दिए गए बयान
जांच आख्या के मुताबिक डीडीओ ने महेश कुमार रावत और अनीता सिंह के बयान लिए। ऑडियो में दोनों की बातचीत की पुष्टि हुई है। महेश रावत ने अपने बयान में कहा है कि सरवा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनीता सिंह से डाटा फीडिंग की रिपोर्ट एकत्र करने के संबंध में बात की है, वहीं अनीता सिंह ने भी अपने बयान में कहा है कि महेश कुमार रावत ने उनसे कोई रुपये नहीं मांगे और न ही रुपये दिए गए।
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जुबान लड़खड़ा गई थी, फाइल की जगह रुपये निकल गया
जांच के दौरान ऑडियो में आए बीस हजार रुपये के जिक्र पर अनीता का बयान लिया गया। अनीता का कहना है कि 20 केंद्रों की रिपोर्ट की जगह 20 हजार रुपये उसके मुंह से निकल गया। अनीता का कहना है कि उसकी जुबान लड़खड़ा गई थी।