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हरदोईः बेगराजपुर में उठीं पांच अर्थियां, घरों में नहीं जले चूल्हे
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फोटो-11- अमित की दादी अहिल्या को पानी के छीटे देकर होश में लाने की कोशिश करती महिला कांस्टेबल सरिता
- फोटो : HARDOI
हरदोई/पाली। बेगराजपुर गांव में रविवार दोपहर तक अर्थी उठने का सिलसिला चलता रहा। एक के बाद एक करके पांच अर्थियां उठीं। कई घरों में चूल्हे नहीं जले। पूरे गांव में मौत का मातम था। जिनके घर में मौतें हुईं, उनके आंसू नहीं थम रहे थे।
रविवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद बेगराजपुर गांव में सबसे पहले मुकेश का शव आया, तो उसके अंतिम संस्कार की तैयारी परिजन करने लगे। वह शव लेकर गर्रा नदी के तट पर पहुंचे।
जहां चिता सजाई और आग लगाई, तब तक गांव में पोस्टमार्टम के बाद राम कृपाल का शव पहुंच गया। उसे भी परिजन लेकर गर्रा नदी किनारे पहुंचे और अंतिम संस्कार किया। जहां पर मृतकों का क्रिया कर्म किया जा रहा था।
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वहां से हादसास्थल कुछ दूर ही था। राम कृपाल के अंतिम संस्कार में गांव के जो लोग लोग शामिल थे और वे अंतिम संस्कार स्थल पर ही मौजूद थे तब तक नरेंद्र का शव लेकर परिजन पहुंच गए।
यह सिलसिला दोपहर से शुरू होकर रात तक चलता रहा। यहां अमित और रिंकू का अंतिम संस्कार भी किया गया। रिंकू अविवाहित था, इसलिए उसे दफनाया गया, जबकि मुकेश, राम कृपाल, अमित और नरेंद्र को मुखाग्नि दी गई।
नदी तट पर ही दरियापुर बलभद्र निवासी हरिशरण उर्फ बंडल का भी अंतिम संस्कार किया गया। यहां कुल सात अंतिम संस्कार हुए। आठवां व्यक्ति मुकेश घोड़ीथर का निवासी था। इसलिए उसका अंतिम संस्कार बरौली में रामगंगा के तट पर किया गया।
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रविवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद बेगराजपुर गांव में सबसे पहले मुकेश का शव आया, तो उसके अंतिम संस्कार की तैयारी परिजन करने लगे। वह शव लेकर गर्रा नदी के तट पर पहुंचे।
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जहां चिता सजाई और आग लगाई, तब तक गांव में पोस्टमार्टम के बाद राम कृपाल का शव पहुंच गया। उसे भी परिजन लेकर गर्रा नदी किनारे पहुंचे और अंतिम संस्कार किया। जहां पर मृतकों का क्रिया कर्म किया जा रहा था।
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वहां से हादसास्थल कुछ दूर ही था। राम कृपाल के अंतिम संस्कार में गांव के जो लोग लोग शामिल थे और वे अंतिम संस्कार स्थल पर ही मौजूद थे तब तक नरेंद्र का शव लेकर परिजन पहुंच गए।
यह सिलसिला दोपहर से शुरू होकर रात तक चलता रहा। यहां अमित और रिंकू का अंतिम संस्कार भी किया गया। रिंकू अविवाहित था, इसलिए उसे दफनाया गया, जबकि मुकेश, राम कृपाल, अमित और नरेंद्र को मुखाग्नि दी गई।
नदी तट पर ही दरियापुर बलभद्र निवासी हरिशरण उर्फ बंडल का भी अंतिम संस्कार किया गया। यहां कुल सात अंतिम संस्कार हुए। आठवां व्यक्ति मुकेश घोड़ीथर का निवासी था। इसलिए उसका अंतिम संस्कार बरौली में रामगंगा के तट पर किया गया।