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हरदोईः इमरजेंसी में तीन घंटे नहीं आए डॉक्टर, परेशान रहे मरीज
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फोटो-10- इमरजेंसी कक्ष में खाली पड़ी चिकित्सक की कुर्सी
- फोटो : HARDOI
हरदोई। जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष से शनिवार को तीन घंटे डॉक्टर नदारद रहे। इस दौरान इलाज के अभाव में मरीज परेशान रहे। प्राइवेट कर्मचारियों ने जैसे-तैसे ड्रिप आदि लगाकर मरीजों का इलाज किया।
बीएचटी (रोगी पंजिका) न बनने से मरीज वार्डों में नहीं भेजे जा सके। फार्मासिस्ट के हस्तक्षेप के बाद आए डॉक्टर ने बिना मरीजों को देखे बीएचटी पर दवाओं आदि का विवरण लिखकर उन्हें वार्ड में भेज दिया। इस दौरान कई मरीज निजी अस्पतालों में चले गए।
जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं 24 घंटे संचालित रहतीं हैं। यहां पर गंभीर बीमारियों से ग्रसित और हादसों में घायलों को भर्ती किया जाता है। यहां 24 घंटे एक ईएमओ व एक जेआर की ड्यूटी रहती है।
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शनिवार को यहां पर इमरजेंसी सेवाएं भगवान भरोसे रहीं। सुबह 8 बजे से सर्जन डॉ. अशोक प्रियदर्शी और एक मेडिकल कॉलेज के जेआर की ड्यूटी थी। इसके बाद भी दोनों डॉक्टर 11 बजे तक ड्यूटी पर नहीं आए।
इस दौरान इमरजेंसी में आए गंभीर मरीजों को इलाज के अभाव में काफी देर तड़पना पड़ा। यहां काम कर रहे प्राइवेट कर्मियों ने डॉक्टर न होने की बात कहकर फार्मासिस्ट से पूछकर ड्रिप लगाकर मरीजों का इलाज शुरू किया।
डॉक्टर के न होने पर कई मरीजों को तीमारदार निजी अस्पतालों को लेकर चले गए। वहीं कई मरीजों की बीएचटी न बनने से परिजनों को घंटों इमरजेंसी की टेबल पर ही इलाज कराना पड़ा।
तीमारदार आक्रोशित होते इससे पहले फार्मासिस्ट ने जिम्मेदारों को डॉक्टरों के न होने की सूचना दी। 11 बजे के बाद आए डॉक्टर ने मरीजों को बिना देखे बीएचटी पर मरीजों की दवाएं आदि लिखकर वार्डों में शिफ्ट करा दिया।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज के जेआर की काउंसिलिंग हो रही है। इसलिए जेआर इमरजेंसी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। दूसरे डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, इसकी वजह के बारे में पूछने के बाद जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. वाणी गुप्ता, मेडिकल कॉलेज, प्राचार्य, हरदोई।
ड्यूटी के समय करते रहे ऑपरेशन
इमरजेंसी में ड्यूटी करने से डॉक्टरों का मोह भंग हो रहा है। आए दिन डॉक्टर ड्यूटी ने नदारद रहते हैं। शनिवार को डॉ. अशोक प्रियदर्शी की इमरजेंसी ड्यूटी लगी थी। वह इमरजेंसी की ड्यूटी छोड़कर ओटी में ऑपरेशन करते बताए गए।
तीमारदार बोले, मरीज से ज्यादा इमरजेंसी बीमार
इमरजेंसी कक्ष में डॉक्टरों के न होने पर तीमारदारों में आक्रोश दिखा। कछौना के सुजानपुर निवासी सत्तार ने कहा कि पिता कल्लू को फालिश का अटैक आ गया था। शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे वह पिता को लेकर जिला अस्पताल आए। यहां इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं थे। शहर के मोहल्ला आलू थोक निवासी किरन को बुखार आ रहा था। शनिवार सुबह पति गौतम उसे जिला अस्पताल लेकर आया। गौतम ने बताया कि यहां डॉक्टर न होने पर प्राइवेट कर्मचारियों ने इलाज किया। तीमारदारों का कहना है मरीज से ज्यादा इमरजेंसी की सेवाएं बीमार हैं। जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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बीएचटी (रोगी पंजिका) न बनने से मरीज वार्डों में नहीं भेजे जा सके। फार्मासिस्ट के हस्तक्षेप के बाद आए डॉक्टर ने बिना मरीजों को देखे बीएचटी पर दवाओं आदि का विवरण लिखकर उन्हें वार्ड में भेज दिया। इस दौरान कई मरीज निजी अस्पतालों में चले गए।
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जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं 24 घंटे संचालित रहतीं हैं। यहां पर गंभीर बीमारियों से ग्रसित और हादसों में घायलों को भर्ती किया जाता है। यहां 24 घंटे एक ईएमओ व एक जेआर की ड्यूटी रहती है।
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शनिवार को यहां पर इमरजेंसी सेवाएं भगवान भरोसे रहीं। सुबह 8 बजे से सर्जन डॉ. अशोक प्रियदर्शी और एक मेडिकल कॉलेज के जेआर की ड्यूटी थी। इसके बाद भी दोनों डॉक्टर 11 बजे तक ड्यूटी पर नहीं आए।
इस दौरान इमरजेंसी में आए गंभीर मरीजों को इलाज के अभाव में काफी देर तड़पना पड़ा। यहां काम कर रहे प्राइवेट कर्मियों ने डॉक्टर न होने की बात कहकर फार्मासिस्ट से पूछकर ड्रिप लगाकर मरीजों का इलाज शुरू किया।
डॉक्टर के न होने पर कई मरीजों को तीमारदार निजी अस्पतालों को लेकर चले गए। वहीं कई मरीजों की बीएचटी न बनने से परिजनों को घंटों इमरजेंसी की टेबल पर ही इलाज कराना पड़ा।
तीमारदार आक्रोशित होते इससे पहले फार्मासिस्ट ने जिम्मेदारों को डॉक्टरों के न होने की सूचना दी। 11 बजे के बाद आए डॉक्टर ने मरीजों को बिना देखे बीएचटी पर मरीजों की दवाएं आदि लिखकर वार्डों में शिफ्ट करा दिया।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज के जेआर की काउंसिलिंग हो रही है। इसलिए जेआर इमरजेंसी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। दूसरे डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, इसकी वजह के बारे में पूछने के बाद जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. वाणी गुप्ता, मेडिकल कॉलेज, प्राचार्य, हरदोई।
ड्यूटी के समय करते रहे ऑपरेशन
इमरजेंसी में ड्यूटी करने से डॉक्टरों का मोह भंग हो रहा है। आए दिन डॉक्टर ड्यूटी ने नदारद रहते हैं। शनिवार को डॉ. अशोक प्रियदर्शी की इमरजेंसी ड्यूटी लगी थी। वह इमरजेंसी की ड्यूटी छोड़कर ओटी में ऑपरेशन करते बताए गए।
तीमारदार बोले, मरीज से ज्यादा इमरजेंसी बीमार
इमरजेंसी कक्ष में डॉक्टरों के न होने पर तीमारदारों में आक्रोश दिखा। कछौना के सुजानपुर निवासी सत्तार ने कहा कि पिता कल्लू को फालिश का अटैक आ गया था। शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे वह पिता को लेकर जिला अस्पताल आए। यहां इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं थे। शहर के मोहल्ला आलू थोक निवासी किरन को बुखार आ रहा था। शनिवार सुबह पति गौतम उसे जिला अस्पताल लेकर आया। गौतम ने बताया कि यहां डॉक्टर न होने पर प्राइवेट कर्मचारियों ने इलाज किया। तीमारदारों का कहना है मरीज से ज्यादा इमरजेंसी की सेवाएं बीमार हैं। जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।