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Hardoi News: हरदोईः ऑनलाइन नहीं हो सका 32 हजार जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र का ब्योरा
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फोटो-05- नगरपालिका के कार्यालय में काम करते कर्मचारी
- फोटो : HARDOI
हरदोई। अगर आपके बच्चे का जन्म वर्ष 2017 से पहले का है और आपने साल 2009 से 2016 तक के बीच में जन्म प्रमाण पत्र बनवा लिया है, तो अब आपको दोबारा से प्रमाण पत्र बनवाना पड़ सकता है। क्योंकि नगर पालिका की वेबसाइट पर 32 हजार लोगों के प्रमाणपत्र का ब्योरा अपलोड नहीं है। ऐसे में इन लोगों को दोबारा से आवेदन करना पड़ रहा है।
नगर पालिका में ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से पहले यानी 2016 से पहले करीब 10 साल का जन्म-मृत्यु का रिकॉर्ड वेबसाइट पर अपलोड नहीं हो पा रहा है। इसका कारण पालिका के पास इन लोगों का ब्योरा नहीं होना बताया जा रहा है।
इस कारण लोगों को पासपोर्ट बनवाने, स्कूलों में प्रवेश लेने, भूमि का नामांतरण कराने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह लोग परेशान होकर पालिका के चक्कर लगा रहे हैं।
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नगर पालिका की जगह राज्य और केंद्र सरकार की वेबसाइट पर डाटा शिफ्टिंग के बाद इन 32 हजार से ज्यादा लोगों के जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र साइट पर उपलब्ध नहीं हैं।
इस बीच जिन्होंने प्रमाण पत्र बनवा लिए हैं उन्हें दोबारा प्रमाण पत्र बनवाने होंगे। क्योंकि आप पालिका की वेबसाइट से इनका सत्यापन नहीं कर पाएंगे और न ही उसे डाउनलोड कर सकेंगे।
लखनऊ से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने आए नरेश गुप्ता ने बताया कि उनकी बेटी का जन्म वर्ष 2009 में हुआ। स्कूल के प्रवेश के समय वर्ष 2012 में उन्होंने प्रमाणपत्र बनवा लिया पर अब दोबारा जरूरत हुई तो वह सत्यापित नहीं हो पा रहा है। वह छुट्टी लेकर आए, अस्पताल से रिकॉर्ड निकलवाकर दोबारा आवेदन किया है। नए सिरे से फोटो, आधार कार्ड आदि लगाना पड़े।
वहीं राजीव कुमार का कहना है कि उनके पिता की 2011 में मौत हो चुकी थी। उस समय मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था। अब पैतृक जमीन को अपने नाम करवाना है, इसके लिए प्रमाण पत्र की आवश्यकता है, मगर ऑनलाइन प्रमाण पत्र सत्यापित नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से डेटा होता है लोड
शहर के अस्पतालों में जन्म वाले बच्चों का रिकॉर्ड अस्पताल प्रबंधन की ओर से वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है। डाटा अपलोड होने के एक माह बाद जन्म प्रमाणपत्र ऑनलाइन डाउनलोड हो जाता है। यह पूरा डेटा वेबसाइट से पहले यूपी सरकार के जन्म और मृत्यु पंजीकरण साइट पर और इसके बाद भारत सरकार की वेबसाइट पर जाता है। घरों पर जन्म लेने वाले बच्चों का प्रमाणपत्र निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर मौके पर जाकर सत्यापन के बाद बनाते हैं।
ऐसे बनवाएं जन्म प्रमाण पत्र
- बच्चे के माता-पिता का पहचान पत्र एवं फोटो।
- एक माह के बाद आवेदन तो सीएमओ के आदेश।
- एक साल बाद आवेदन तो मजिस्ट्रेट के आदेश, शपथ पत्र।
- दो पड़ोसी गवाहों के पहचान पत्र एवं फोटो।
मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए प्रक्रिया
- मृतक की फोटो एवं पहचान पत्र।
- दाह संस्कार की रसीद।
- आवेदक का पहचान पत्र एवं फोटो।
- एक माह बाद आवेदन पर सीएमओ के आदेश।
- एक साल बाद आवेदन पर मजिस्ट्रेट के आदेश, शपथ पत्र।
- दो पड़ोसी गवाहों के पहचान पत्र एवं फोटो।
- जन्म प्रमाणपत्र में नाम अंकित करने के लिए
- माता-पिता के आधार कार्ड की कॉपी।
- प्रार्थना पत्र और घोषणा पत्र।
वर्जन
दोबारा बनवा सकते हैं प्रमाण पत्र
वर्ष 2017 से जन्म व मृत्यु का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन है। इससे पहले का रिकार्ड ऑनलाइन नहीं है। कार्यालय में आकर रिकार्ड सत्यापित करवा सकते हैं, मगर पहले लोग ऐसे ही लोग प्रमाण पत्र बनवाकर चले जाते थे, रिकार्ड में नहीं चढ़वाते थे। उनके दस्तावेजों में दिक्कत आ रही हैं। इन लोगों के रिकॉर्ड नए सिरे से तैयार कर उन्हें अपलोड किया जाता है। - रवि शंकर शुक्ला, ईओ नगर पालिका
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नगर पालिका में ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से पहले यानी 2016 से पहले करीब 10 साल का जन्म-मृत्यु का रिकॉर्ड वेबसाइट पर अपलोड नहीं हो पा रहा है। इसका कारण पालिका के पास इन लोगों का ब्योरा नहीं होना बताया जा रहा है।
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इस कारण लोगों को पासपोर्ट बनवाने, स्कूलों में प्रवेश लेने, भूमि का नामांतरण कराने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह लोग परेशान होकर पालिका के चक्कर लगा रहे हैं।
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नगर पालिका की जगह राज्य और केंद्र सरकार की वेबसाइट पर डाटा शिफ्टिंग के बाद इन 32 हजार से ज्यादा लोगों के जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र साइट पर उपलब्ध नहीं हैं।
इस बीच जिन्होंने प्रमाण पत्र बनवा लिए हैं उन्हें दोबारा प्रमाण पत्र बनवाने होंगे। क्योंकि आप पालिका की वेबसाइट से इनका सत्यापन नहीं कर पाएंगे और न ही उसे डाउनलोड कर सकेंगे।
लखनऊ से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने आए नरेश गुप्ता ने बताया कि उनकी बेटी का जन्म वर्ष 2009 में हुआ। स्कूल के प्रवेश के समय वर्ष 2012 में उन्होंने प्रमाणपत्र बनवा लिया पर अब दोबारा जरूरत हुई तो वह सत्यापित नहीं हो पा रहा है। वह छुट्टी लेकर आए, अस्पताल से रिकॉर्ड निकलवाकर दोबारा आवेदन किया है। नए सिरे से फोटो, आधार कार्ड आदि लगाना पड़े।
वहीं राजीव कुमार का कहना है कि उनके पिता की 2011 में मौत हो चुकी थी। उस समय मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था। अब पैतृक जमीन को अपने नाम करवाना है, इसके लिए प्रमाण पत्र की आवश्यकता है, मगर ऑनलाइन प्रमाण पत्र सत्यापित नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से डेटा होता है लोड
शहर के अस्पतालों में जन्म वाले बच्चों का रिकॉर्ड अस्पताल प्रबंधन की ओर से वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है। डाटा अपलोड होने के एक माह बाद जन्म प्रमाणपत्र ऑनलाइन डाउनलोड हो जाता है। यह पूरा डेटा वेबसाइट से पहले यूपी सरकार के जन्म और मृत्यु पंजीकरण साइट पर और इसके बाद भारत सरकार की वेबसाइट पर जाता है। घरों पर जन्म लेने वाले बच्चों का प्रमाणपत्र निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर मौके पर जाकर सत्यापन के बाद बनाते हैं।
ऐसे बनवाएं जन्म प्रमाण पत्र
- बच्चे के माता-पिता का पहचान पत्र एवं फोटो।
- एक माह के बाद आवेदन तो सीएमओ के आदेश।
- एक साल बाद आवेदन तो मजिस्ट्रेट के आदेश, शपथ पत्र।
- दो पड़ोसी गवाहों के पहचान पत्र एवं फोटो।
मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए प्रक्रिया
- मृतक की फोटो एवं पहचान पत्र।
- दाह संस्कार की रसीद।
- आवेदक का पहचान पत्र एवं फोटो।
- एक माह बाद आवेदन पर सीएमओ के आदेश।
- एक साल बाद आवेदन पर मजिस्ट्रेट के आदेश, शपथ पत्र।
- दो पड़ोसी गवाहों के पहचान पत्र एवं फोटो।
- जन्म प्रमाणपत्र में नाम अंकित करने के लिए
- माता-पिता के आधार कार्ड की कॉपी।
- प्रार्थना पत्र और घोषणा पत्र।
वर्जन
दोबारा बनवा सकते हैं प्रमाण पत्र
वर्ष 2017 से जन्म व मृत्यु का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन है। इससे पहले का रिकार्ड ऑनलाइन नहीं है। कार्यालय में आकर रिकार्ड सत्यापित करवा सकते हैं, मगर पहले लोग ऐसे ही लोग प्रमाण पत्र बनवाकर चले जाते थे, रिकार्ड में नहीं चढ़वाते थे। उनके दस्तावेजों में दिक्कत आ रही हैं। इन लोगों के रिकॉर्ड नए सिरे से तैयार कर उन्हें अपलोड किया जाता है। - रवि शंकर शुक्ला, ईओ नगर पालिका