{"_id":"6318e1309f8e8040004032d3","slug":"hardoi-chana-has-to-be-chewed-for-the-treatment-of-teeth-hardoi-news-knp716927719","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरदोईः दांतों के इलाज की खातिर चबाने पड़ रहे नाकों चने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरदोईः दांतों के इलाज की खातिर चबाने पड़ रहे नाकों चने
विज्ञापन
फोटो-01- बिलग्राम स्वास्थ्य केंद्र में रखी डेंटल चेयर
- फोटो : HARDOI
हरदोई। जिले में दंत चिकित्सा सेवाओं का बुरा हाल है। किसी अस्पताल में डेंटिस्ट है तो डेंटल चेयर नहीं। कहीं डेंटल चेयर है तो डेंटिस्ट नहीं। मेडिकल कॉलेज का हिस्सा बने जिला अस्पताल में ऐसी डेंटल चेयर नहीं है, जिसके जरिये आरसीटी की जा सके।
पुरानी डेंटल चेयर में ओपीडी के समय सामान्य इलाज किया जाता है, लेकिन रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) के मरीजों को लौटा दिया जाता है। कुल मिलाकर कहें, तो मरीजों के लिए सुविधाएं शून्य के समान हैं।
जिला अस्पताल 31 मार्च 2021 को राजकीय मेडिकल कॉलेज का हिस्सा बना था। तब उम्मीद बंधी थी कि हालात सुधरेंगे पर ऐसा नहीं हो सका।
यहां दंत रोग विभाग में एक दिन में 50-60 मरीजों की ओपीडी है लेकिन ऊपर के दांतों के लिए एक्सरे मशीन न होने के कारण आरसीटी के मरीज कई महीनों से बैरंग लौट रहे हैं।
विज्ञापन
हालांकि नीचे के दांतों की आरसीटी हो रहा है। ड्यूटी पर तैनात दंत रोग चिकित्सक यह कहकर मरीजों को लौटा देते हैं कि अभी जरूरी सामान उपलब्ध नहीं है।
मल्लावां, बिलग्राम और कछौना के सरकारी अस्पतालों में भी दंत चिकित्सा का हाल खराब है। यहां दंत चिकित्सक होने के बाद भी सामान्य फिलिंग के मरीजों को भी लौटाया जा रहा है।
कछौना में दंत चिकित्सा के लिए लगाई गई कुर्सी खराब है। मल्लावां और बिलग्राम में कुर्सी ठीक है पर उसमें कंप्रेशर नहीं लगा है। आवश्यक जांच और इलाज में काम आने वाले यंत्र व उपकरण या तो हैं नहीं, जो हैं उनमें कई खराब पड़े हैं।
मजबूरी में मरीज निजी चिकित्सकों के यहां इलाज के लिए मजबूर हैं। जिन लोगों के पास फीस के लिए रुपये नहीं हैं, वह झोलाछाप से उपचार करा रहे हैं। इसके लिए गरीबों को जेब से पैसा खर्च करना पड़ रहा है। सरकार गरीब लोगों को सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपचार का दावा करती आ रही है।
जब से जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज का हिस्सा बना है तब से हमारे पास जरूरत का सामान खरीदने या जरूरी इंतजाम करने के लिए कोई अधिकार नहीं है। - डॉ. जेएन तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
एक्सरे की व्यवस्था न होने की वजह से सिर्फ उन लोगों की आरसीटी नहीं हो पा रहा है जिनके ऊपर के दांतों में समस्या है। ओपीडी की सेवाएं ठीक से चल रही हैं। दंत चिकित्सा विभाग के लिए कुछ उपकरण मंगाने हैं, उसके लिए प्रक्रिया चल रही है। - डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
डेंटल चेयर है पर कंप्रेशर है नहीं
बिलग्राम। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दंत चिकित्सक डॉ. जेपी गुप्ता और डेंटल हाइजीनिस्ट अवनेश कुमार बुधवार को मौजूद थे। वहां दांत के इलाज से संबंधित सभी उपकरण नहीं थे। डेंटल चेयर है लेकिन उसका कंप्रेशर नहीं है। डॉक्टर जेपी गुप्ता ने बताया उन्होंने कई बार इसके लिए पत्र जिला स्तर पर भेजे हैं पर कंप्रेशर उपलब्ध नहीं हो पाया।। इसलिए मरीजों के इलाज में असुविधा हो रही है।
कछौना सीएचसी में टूटी पड़ी है डेंटल चेयर
कछौना। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डेंटल हाइजीनिस्ट शिव मोहन तैनात है। यहां डेंटल चेयर खराब पड़ी है। इसके लिए सीएमओ को अवगत कराया जा चुका है। डेंटल चेयर के लिए एमएलसी अशोक अग्रवाल व विधायक रामपाल वर्मा भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक डेंटल चेयर उपलब्ध नहीं हो पाई है।
दांत के एक्सरे के लिए मशीन है पर फिल्म नहीं
मल्लावां। सीएचसी में तैनात दंत चिकित्सक डॉ. अखिलेश वर्मा ने बताया कि प्रतिदिन 8-10 मरीज इलाज के लिए आते हैं। उपकरण के नाम पर दांत के एक्सरे के लिए मशीन उपलब्ध है, लेकिन फिल्म उपलब्ध नहीं है। डेंटल चेयर है पर उसमें कंप्रेशर नहीं लगा है। रोगियों को समुचित इलाज सीएचसी पर नहीं मिल पाता है। निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। चिकित्सक ने बताया कि आवश्यक उपकरणों को लेकर पहले उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
विज्ञापन
पुरानी डेंटल चेयर में ओपीडी के समय सामान्य इलाज किया जाता है, लेकिन रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) के मरीजों को लौटा दिया जाता है। कुल मिलाकर कहें, तो मरीजों के लिए सुविधाएं शून्य के समान हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल 31 मार्च 2021 को राजकीय मेडिकल कॉलेज का हिस्सा बना था। तब उम्मीद बंधी थी कि हालात सुधरेंगे पर ऐसा नहीं हो सका।
यहां दंत रोग विभाग में एक दिन में 50-60 मरीजों की ओपीडी है लेकिन ऊपर के दांतों के लिए एक्सरे मशीन न होने के कारण आरसीटी के मरीज कई महीनों से बैरंग लौट रहे हैं।
विज्ञापन
हालांकि नीचे के दांतों की आरसीटी हो रहा है। ड्यूटी पर तैनात दंत रोग चिकित्सक यह कहकर मरीजों को लौटा देते हैं कि अभी जरूरी सामान उपलब्ध नहीं है।
मल्लावां, बिलग्राम और कछौना के सरकारी अस्पतालों में भी दंत चिकित्सा का हाल खराब है। यहां दंत चिकित्सक होने के बाद भी सामान्य फिलिंग के मरीजों को भी लौटाया जा रहा है।
कछौना में दंत चिकित्सा के लिए लगाई गई कुर्सी खराब है। मल्लावां और बिलग्राम में कुर्सी ठीक है पर उसमें कंप्रेशर नहीं लगा है। आवश्यक जांच और इलाज में काम आने वाले यंत्र व उपकरण या तो हैं नहीं, जो हैं उनमें कई खराब पड़े हैं।
मजबूरी में मरीज निजी चिकित्सकों के यहां इलाज के लिए मजबूर हैं। जिन लोगों के पास फीस के लिए रुपये नहीं हैं, वह झोलाछाप से उपचार करा रहे हैं। इसके लिए गरीबों को जेब से पैसा खर्च करना पड़ रहा है। सरकार गरीब लोगों को सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपचार का दावा करती आ रही है।
जब से जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज का हिस्सा बना है तब से हमारे पास जरूरत का सामान खरीदने या जरूरी इंतजाम करने के लिए कोई अधिकार नहीं है। - डॉ. जेएन तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
एक्सरे की व्यवस्था न होने की वजह से सिर्फ उन लोगों की आरसीटी नहीं हो पा रहा है जिनके ऊपर के दांतों में समस्या है। ओपीडी की सेवाएं ठीक से चल रही हैं। दंत चिकित्सा विभाग के लिए कुछ उपकरण मंगाने हैं, उसके लिए प्रक्रिया चल रही है। - डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
डेंटल चेयर है पर कंप्रेशर है नहीं
बिलग्राम। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दंत चिकित्सक डॉ. जेपी गुप्ता और डेंटल हाइजीनिस्ट अवनेश कुमार बुधवार को मौजूद थे। वहां दांत के इलाज से संबंधित सभी उपकरण नहीं थे। डेंटल चेयर है लेकिन उसका कंप्रेशर नहीं है। डॉक्टर जेपी गुप्ता ने बताया उन्होंने कई बार इसके लिए पत्र जिला स्तर पर भेजे हैं पर कंप्रेशर उपलब्ध नहीं हो पाया।। इसलिए मरीजों के इलाज में असुविधा हो रही है।
कछौना सीएचसी में टूटी पड़ी है डेंटल चेयर
कछौना। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डेंटल हाइजीनिस्ट शिव मोहन तैनात है। यहां डेंटल चेयर खराब पड़ी है। इसके लिए सीएमओ को अवगत कराया जा चुका है। डेंटल चेयर के लिए एमएलसी अशोक अग्रवाल व विधायक रामपाल वर्मा भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक डेंटल चेयर उपलब्ध नहीं हो पाई है।
दांत के एक्सरे के लिए मशीन है पर फिल्म नहीं
मल्लावां। सीएचसी में तैनात दंत चिकित्सक डॉ. अखिलेश वर्मा ने बताया कि प्रतिदिन 8-10 मरीज इलाज के लिए आते हैं। उपकरण के नाम पर दांत के एक्सरे के लिए मशीन उपलब्ध है, लेकिन फिल्म उपलब्ध नहीं है। डेंटल चेयर है पर उसमें कंप्रेशर नहीं लगा है। रोगियों को समुचित इलाज सीएचसी पर नहीं मिल पाता है। निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। चिकित्सक ने बताया कि आवश्यक उपकरणों को लेकर पहले उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।

फोटो-02- कछौना स्वास्थ्य केंद्र में खराब पड़ी डेंटल चेयर- फोटो : HARDOI

फोटो-03- स्वास्थ्य केंद्र में दंत कक्ष मे खाली पड़ी डेटल चेयर मौजूद डा अखिलेश वर्मा- फोटो : HARDOI

फोटो-04- मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल वाणी गुप्ता- फोटो : HARDOI