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बैंकों के घाटे के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:47 PM IST
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आम सभा
- फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन की त्रिवार्षिक आमसभा रविवार को एक होटल में हुई। जिसमें बैंकों के लगातार घाटे में जाने पर सरकार की नीतियों को जिम्मदेार ठहराया गया और बैंकों को घाटे से बचाने का संकल्प लिया। त्रिवार्षिक आमसभा में तीन साल के लिए कार्यकारिणी का भी गठन हुआ। जिसमें आरके पांडेय को लगातार आठवीं बार जिला मंत्री चुना गया। इसके अलावा अन्य पदाधिकारियों को भी मनोनीत किया गया।
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अध्यक्षता करते हुए आरसी वाजपेई ने कहा कि बैंकों के विलय को बढ़ाकर इसकी संस्कृति, पहचान और क्षेत्रीयता के भाव पर हमला किया जा रहा है। बैंकों का विलय किसी भी हाल में नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने त्रिवार्षिक सत्र के लिए निर्विरोध निर्वाचन हुआ। इसमें अध्यक्ष पद के लिए वेदप्रकाश पांडेय और लगातार आठवीं बार आरके पांडेय को जिला मंत्री चुना गया।
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इसके अलावा उपाध्यक्ष पद पर सुनील अवस्थी, एसके गुप्ता व गोपाल सक्सेना, संयुक्त मंत्री पद पर अजय मेहरोत्रा, संगठन मंत्री पद पर वर्षा मेहरोत्रा, सहायक मंत्री पद पर आरके मिश्र, वीर बहादुर सिंह, आनंद वर्मा, अनुज व दीपक वाजपेई को चुना गया। कोषाध्यक्ष पद पर दीपक शुक्ला व आडीटर रविंद्र मिश्र और महिला प्रकोष्ठ संयोजक प्रिया रस्तोगी व सह संयोजक वंदना यादव को चुना गया।
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अध्यक्ष व जिला मंत्री ने कहा कि मार्च 16 की चौथी तिमाही में सात बड़ी बैंकों ने 17792 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया। सरकार ने निर्देश दिया है कि मार्च 17 तक बैंकों में कोई खराब ऋण न रहे। इसी वजह से यह हुआ है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्रों की बैंक की छवि खराब करने का काम कर रही है। यूनियन ने बीते तीन वर्ष का आय व्यय का लेखा जोखा भी रखा।