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बदहाली से रूबरू गोलागंजवासी
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 14 Jul 2015 12:09 AM IST
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गोलागंज के बाशिंदे अभी भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ
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रहे हैं। आधुनिकता के दौर में एक के बाद एक गांव आधुनिक होते जा रहे, पर
गोलागंज गांव विकास के क्षेत्र में और पिछड़ता जा रहा है। गांव में न तो
डामर सड़क है न ही पानी निकास की नालियां। हैंडपंप भी खराब हैं। स्कूल के
चारों ओर पानी भरा है।
बिजली भी नहीं है। गांव की इस दशा पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे। ग्राम पंचायत सांक का मजरा गोलागंज संडीला-लखनऊ रेलमार्ग के किनारे रहीमाबाद से करीब 4 किमी पहले पड़ता है। इस गांव के चारों ओर वन विभाग के घने जंगल हैं और गांव तक पहुंचने के लिए आज तक पक्का संपर्क मार्ग नहीं बना है।
ग्रामीण रेलवे लाइन पार कर कच्चे मार्ग से होकर हरदोई-लखनऊ मार्ग पर पहुंचते हैं और वहां से अन्य स्थानों पर आते जाते हैं। यहां के ग्रामीणों को पंचायती राज का भी कोई फायदा नहीं मिला है। गांव में नाली खड़ंजा तक नहीं है। एक जाति के लोग गांव के गलियारों में अपने पशु को बांधते हैं, जिससे ग्रामीणों को निकलने में काफी परेशानी होती है।
बच्चों के स्कूल के चारों ओर पानी व कीचड़ भरा रहता है। स्कूल के अंदर बड़े-बड़े गड्ढे बने गए हैं, जिससे मच्छरों की भरमार रहती है। स्कूल में लगा हैंडपंप कई साल से खराब पड़ा है, जिससे बच्चे पानी के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं। नरायन, अशोक आदि का कहना है कि गांव के विकास मेें भेजा जाने वाला बजट जिम्मेदारों द्वारा हड़प लिया जाता है।
ग्रामीणों ने कई बार तहसील दिवस में विकास कराने की बात रखी, पर कोई सुनता नहीं। ग्रामीण अशोक, सत्तार, अशरफ, अली, मंगरे, शरीफ, सुल्तान आदि ने कहा कि गांव में रोशनी की भी व्यवस्था नहीं है। घरों के ऊपर से 11 केवी हाइटेंशन लाइन निकली है, जिससे हादसे का भी डर बना रहता है। ग्रामीणों ने डीएम से गांव की बदहाल दशा को सुधरवाने की मांग की है।
बिजली भी नहीं है। गांव की इस दशा पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे। ग्राम पंचायत सांक का मजरा गोलागंज संडीला-लखनऊ रेलमार्ग के किनारे रहीमाबाद से करीब 4 किमी पहले पड़ता है। इस गांव के चारों ओर वन विभाग के घने जंगल हैं और गांव तक पहुंचने के लिए आज तक पक्का संपर्क मार्ग नहीं बना है।
ग्रामीण रेलवे लाइन पार कर कच्चे मार्ग से होकर हरदोई-लखनऊ मार्ग पर पहुंचते हैं और वहां से अन्य स्थानों पर आते जाते हैं। यहां के ग्रामीणों को पंचायती राज का भी कोई फायदा नहीं मिला है। गांव में नाली खड़ंजा तक नहीं है। एक जाति के लोग गांव के गलियारों में अपने पशु को बांधते हैं, जिससे ग्रामीणों को निकलने में काफी परेशानी होती है।
बच्चों के स्कूल के चारों ओर पानी व कीचड़ भरा रहता है। स्कूल के अंदर बड़े-बड़े गड्ढे बने गए हैं, जिससे मच्छरों की भरमार रहती है। स्कूल में लगा हैंडपंप कई साल से खराब पड़ा है, जिससे बच्चे पानी के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं। नरायन, अशोक आदि का कहना है कि गांव के विकास मेें भेजा जाने वाला बजट जिम्मेदारों द्वारा हड़प लिया जाता है।
ग्रामीणों ने कई बार तहसील दिवस में विकास कराने की बात रखी, पर कोई सुनता नहीं। ग्रामीण अशोक, सत्तार, अशरफ, अली, मंगरे, शरीफ, सुल्तान आदि ने कहा कि गांव में रोशनी की भी व्यवस्था नहीं है। घरों के ऊपर से 11 केवी हाइटेंशन लाइन निकली है, जिससे हादसे का भी डर बना रहता है। ग्रामीणों ने डीएम से गांव की बदहाल दशा को सुधरवाने की मांग की है।