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Hardoi News: गैंगस्टर एक्ट के आरोपी को नहीं मिली जमानत
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हरदोई। गैंगस्टर एक्ट के मामले में विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) शैलेंद्र यादव ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने माना कि आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मौजूद है और उसे जमानत पर छोड़े जाने से दुबारा अपराध करेगा।
कासिमपुर थाना अध्यक्ष घनश्याम राम ने सात मई 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि कासिमपुर थाना क्षेत्र के रसूलपुर आट निवासी मूसा एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है। इसका नेतृत्व इकबाल करता है। गिरोह पर आर्थिक लाभ के लिए चोरी, गौ वध अधिनियम नकबजनी,आयुध अधिनियम समेत विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप है। पुलिस ने गैंग चार्ट में मूसा समेत कई लोगों को गिरोह का सक्रिय सदस्य दर्शाया है।
विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत आरोपपत्र भी न्यायालय में दाखिल हो चुका है। पुलिस का दावा है कि गिरोह के आतंक के कारण आम लोग इनके खिलाफ गवाही देने से भी कतराते हैं।
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आरोपी की अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और वह किसी गिरोह का सदस्य नहीं है। कहा कि जिन मूल मुकदमों के आधार पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है उनमें आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। गैंग चार्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि गैंग चार्ट में आरोपी का नाम सक्रिय सदस्य के रूप में दर्ज है तथा उसके विरुद्ध दर्ज तीनों मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं। केवल मूल मुकदमों में जमानत मिल जाना गैंगस्टर एक्ट में राहत का आधार नहीं माना जा सकता। कहते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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कासिमपुर थाना अध्यक्ष घनश्याम राम ने सात मई 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि कासिमपुर थाना क्षेत्र के रसूलपुर आट निवासी मूसा एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है। इसका नेतृत्व इकबाल करता है। गिरोह पर आर्थिक लाभ के लिए चोरी, गौ वध अधिनियम नकबजनी,आयुध अधिनियम समेत विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप है। पुलिस ने गैंग चार्ट में मूसा समेत कई लोगों को गिरोह का सक्रिय सदस्य दर्शाया है।
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विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत आरोपपत्र भी न्यायालय में दाखिल हो चुका है। पुलिस का दावा है कि गिरोह के आतंक के कारण आम लोग इनके खिलाफ गवाही देने से भी कतराते हैं।
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आरोपी की अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और वह किसी गिरोह का सदस्य नहीं है। कहा कि जिन मूल मुकदमों के आधार पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है उनमें आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। गैंग चार्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि गैंग चार्ट में आरोपी का नाम सक्रिय सदस्य के रूप में दर्ज है तथा उसके विरुद्ध दर्ज तीनों मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं। केवल मूल मुकदमों में जमानत मिल जाना गैंगस्टर एक्ट में राहत का आधार नहीं माना जा सकता। कहते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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