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गलत पट्टा आवंटन को लेकर संडीला तहसील में फिर घमासान
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हरदोई। पट्टा आवंटन में अनियमितताओं के कारण संडीला तहसील फिर चर्चा में है। संडीला में तैनात रहे एक उपजिलाधिकारी को शासन ने 2014 में गलत ढंग से किए गए भूमि आवंटन के मामले में दो अक्तूबर को पदावनत कर दिया है। वहीं अगस्त 2019 में पट्टा संबंधी अनियमितता में निलंबन के एक माह के अंदर ही दो लेखपालों की बहाली भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस सबके बीच डीएम के निर्देश पर 2018-19 में किए गए पट्टा आवंटन की जांच को गठित समिति की आख्या सात माह बाद भी जारी न होना भी चर्चा में है।
मंदिर की भूमि आवंटित करने पर मिली सजा
संडीला तहसील में उपजिलाधिकारी रहे गिरीश चंद्र श्रीवास्तव को 2 अक्तूबर कैबिनेट की बैठक में पदावनत करने पर मुहर लग गई। उन्हें तहसीलदार के पद मिला है। मामले की पृष्ठभूमि देखें तो संडीला के एसडीएम रहने के दौरान गिरीश चंद्र श्रीवास्तव ने संडीला तहसील के ग्राम सरेहरी में गाटा संख्या 569 से संबद्ध 0.630 हेक्टेयर भूमि को 28 मई 2014 को दिनेश सिंह आदि के नाम कर दिया था। उक्त भूमि गांव में स्थित मंदिर के नाम से थी। राजस्व विभाग के नियम के मुताबिक ऐसे मंदिर, कब्रिस्तान, वक्फ बोर्ड आदि की जमीनें जिन पर सोसायटी/संस्था का कोई प्रबंधन नहीं है, का कस्टोडियन कलेक्टर (डीएम) होता है। ऐसे में उक्त भूमि के आवंटन का अधिकार ही एसडीएम को नहीं था। शिकायत मिलने और तत्कालीन डीएम रमेश मिश्रा के नाराजगी जताने पर तत्कालीन एसडीएम गिरीश चंद्र श्रीवास्तव ने अपने ही आदेश को सात नवंबर 2014 को खारिज भी कर भूमि पुन: मंदिर के नाम कर दी थी। लेकिन तब तक मामला तूल पकड़ शासन तक पहुंच चुका था। इससे इतर भी पट्टा आवंटन के चार मामले पकड़े गए थे।
एक माह में ही हो गई दो लेखपालों की सवेतन बहाली
संडीला तहसील के ग्राम गौसगंज में पौधरोपण की भूमि का पट्टा गलत ढंग से किए जाने की शिकायत जिम्मेदार अफसरों से की गई थी। संडीला के तत्कालीन नायब तहसीलदार की आख्या पर छह अगस्त 2019 को संडीला के तत्कालीन एसडीएम एपी श्रीवास्तव ने संबंधित गांव के लेखपाल सुशील गुप्ता, अनूप शुक्ला, राजस्व निरीक्षक प्रवीण गुप्ता को निलंबित कर दिया था। आनन-फानन ही आरोपपत्र जारी कर सुशील गुप्ता और अनूप शुक्ला से जवाब मांग लिया गया। जवाब का परीक्षण तहसीलदार से कराया गया। तहसीलदार की आख्या पर तत्कालीन एसडीएम एपी श्रीवास्तव ने पांच सितंबर 2019 को ही अनूप शुक्ला और सुशील गुप्ता को बहाल कर दिया। खास बात ये है कि जिस अधिकारी ने नायब तहसीलदार की हैसियत से गलत ढंग से पट्टा करने में दोनों लेखपालों को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए लिखा था, उसी अधिकारी ने प्रभारी तहसीलदार की हैसियत से दोनों की बहाली की संस्तुति कर दी। कुल मिलाकर पट्टे के आवंटन में हुई धांधली और उसके बाद आरोपियों की एक माह के अंदर ही बहाली की कहानी जिम्मेदार अफसरों की ओर काफी कुछ इशारा करती है।
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पट्टों की जांच को गठित कमेटी सात माह में भी नहीं दे पाई रिपोर्ट
संडीला तहसील क्षेत्र में किए जाने वाले पट्टों को लेकर डीएम पुलकित खरे तक लगातार शिकायतें पहुंचीं तो उन्होंने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। नौ मार्च 2019 को गठित की गई जांच कमेटी का अध्यक्ष नगर मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार को बनाया गया, जबकि इसका सदस्य तत्कालीन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट द्वितीय और अब एसडीएम सवायजपुर कपिल देव यादव और एसओसी बीएन उपाध्याय को बनाया गया। डीएम ने जांच टीम को आदेश दिए थे कि वर्ष 2018-19 में संडीला तहसील में किए गए सभी प्रकार के पट्टा आवंटन की जांच कर ली जाए। पट्टा आवंटन की प्रक्रिया, आवंटित की गई भूमि के अलावा जिन लोगों को पट्टा किया गया है, उनका सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए थे। जांच कमेटी के सदस्यों ने कई बार संडीला जाकर जांच भी की, लेकिन सात माह बाद भी जांच आख्या तैयार नहीं की गई।
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मंदिर की भूमि आवंटित करने पर मिली सजा
संडीला तहसील में उपजिलाधिकारी रहे गिरीश चंद्र श्रीवास्तव को 2 अक्तूबर कैबिनेट की बैठक में पदावनत करने पर मुहर लग गई। उन्हें तहसीलदार के पद मिला है। मामले की पृष्ठभूमि देखें तो संडीला के एसडीएम रहने के दौरान गिरीश चंद्र श्रीवास्तव ने संडीला तहसील के ग्राम सरेहरी में गाटा संख्या 569 से संबद्ध 0.630 हेक्टेयर भूमि को 28 मई 2014 को दिनेश सिंह आदि के नाम कर दिया था। उक्त भूमि गांव में स्थित मंदिर के नाम से थी। राजस्व विभाग के नियम के मुताबिक ऐसे मंदिर, कब्रिस्तान, वक्फ बोर्ड आदि की जमीनें जिन पर सोसायटी/संस्था का कोई प्रबंधन नहीं है, का कस्टोडियन कलेक्टर (डीएम) होता है। ऐसे में उक्त भूमि के आवंटन का अधिकार ही एसडीएम को नहीं था। शिकायत मिलने और तत्कालीन डीएम रमेश मिश्रा के नाराजगी जताने पर तत्कालीन एसडीएम गिरीश चंद्र श्रीवास्तव ने अपने ही आदेश को सात नवंबर 2014 को खारिज भी कर भूमि पुन: मंदिर के नाम कर दी थी। लेकिन तब तक मामला तूल पकड़ शासन तक पहुंच चुका था। इससे इतर भी पट्टा आवंटन के चार मामले पकड़े गए थे।
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एक माह में ही हो गई दो लेखपालों की सवेतन बहाली
संडीला तहसील के ग्राम गौसगंज में पौधरोपण की भूमि का पट्टा गलत ढंग से किए जाने की शिकायत जिम्मेदार अफसरों से की गई थी। संडीला के तत्कालीन नायब तहसीलदार की आख्या पर छह अगस्त 2019 को संडीला के तत्कालीन एसडीएम एपी श्रीवास्तव ने संबंधित गांव के लेखपाल सुशील गुप्ता, अनूप शुक्ला, राजस्व निरीक्षक प्रवीण गुप्ता को निलंबित कर दिया था। आनन-फानन ही आरोपपत्र जारी कर सुशील गुप्ता और अनूप शुक्ला से जवाब मांग लिया गया। जवाब का परीक्षण तहसीलदार से कराया गया। तहसीलदार की आख्या पर तत्कालीन एसडीएम एपी श्रीवास्तव ने पांच सितंबर 2019 को ही अनूप शुक्ला और सुशील गुप्ता को बहाल कर दिया। खास बात ये है कि जिस अधिकारी ने नायब तहसीलदार की हैसियत से गलत ढंग से पट्टा करने में दोनों लेखपालों को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए लिखा था, उसी अधिकारी ने प्रभारी तहसीलदार की हैसियत से दोनों की बहाली की संस्तुति कर दी। कुल मिलाकर पट्टे के आवंटन में हुई धांधली और उसके बाद आरोपियों की एक माह के अंदर ही बहाली की कहानी जिम्मेदार अफसरों की ओर काफी कुछ इशारा करती है।
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पट्टों की जांच को गठित कमेटी सात माह में भी नहीं दे पाई रिपोर्ट
संडीला तहसील क्षेत्र में किए जाने वाले पट्टों को लेकर डीएम पुलकित खरे तक लगातार शिकायतें पहुंचीं तो उन्होंने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। नौ मार्च 2019 को गठित की गई जांच कमेटी का अध्यक्ष नगर मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार को बनाया गया, जबकि इसका सदस्य तत्कालीन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट द्वितीय और अब एसडीएम सवायजपुर कपिल देव यादव और एसओसी बीएन उपाध्याय को बनाया गया। डीएम ने जांच टीम को आदेश दिए थे कि वर्ष 2018-19 में संडीला तहसील में किए गए सभी प्रकार के पट्टा आवंटन की जांच कर ली जाए। पट्टा आवंटन की प्रक्रिया, आवंटित की गई भूमि के अलावा जिन लोगों को पट्टा किया गया है, उनका सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए थे। जांच कमेटी के सदस्यों ने कई बार संडीला जाकर जांच भी की, लेकिन सात माह बाद भी जांच आख्या तैयार नहीं की गई।