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Hardoi News: गैरइरादतन हत्या के आरोपी सगे भाइयों समेत चार को 10-10 साल की सजा
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हरदोई। तकरीबन 15 साल पहले बुजुर्ग की गैरइरादतन हत्या के आरोपी दो सगे भाइयों समेत चार को दोषी करार दिया गया। अपर जिला जज कोर्ट संख्या-1 कुसुमलता ने अभियुक्तों को 10-10 साल की सजा सुनाई। 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति मृतक के वारिसों को देने के आदेश अपर जिला जज ने दिए।
बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के कोथावां निवासी रामदुलारे ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया कि उसका और उसके चाचा सिरदार का साझे में खेत है। इस खेत में कुछ हिस्से पर रामदुलारे का मकान भी बना है। पड़ोस में ही गांव के छैलू का भी मकान है। छैलू व उसके परिवार वाले जबरदस्ती उसके खेत से रास्ता बनाना चाहते थे। 20 अक्टूबर 2011 की सुबह वह शौच करने जा रहा था।
रास्ते को लेकर रामचंद्र के साथ विवाद हो गया था। कुछ देर बाद रामचंद्र अपने भाई राजेंद्र, छैलू, अपने पुत्र करुणा शंकर के साथ आ गए थे। चारों लोग गाली-गलौज करने लगे। मना करने पर रामदुलारे व उसके चाचा सिरदार की लाठी-डंडों से पिटाई कर दी थी। ग्रामीणों के आने पर हमलावर भाग गए थे। सिरदार को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया था। रास्ते में सिरदार की मौत हो गई थी। पुलिस ने चारों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी।
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अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाहों को पेश किया गया। इसके साथ ही 23 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। अभियुक्त के अधिवक्ता ने चारों को निर्दोष बताते हुए दोषमुक्त किए जाने का तर्क दिया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई।
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बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के कोथावां निवासी रामदुलारे ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया कि उसका और उसके चाचा सिरदार का साझे में खेत है। इस खेत में कुछ हिस्से पर रामदुलारे का मकान भी बना है। पड़ोस में ही गांव के छैलू का भी मकान है। छैलू व उसके परिवार वाले जबरदस्ती उसके खेत से रास्ता बनाना चाहते थे। 20 अक्टूबर 2011 की सुबह वह शौच करने जा रहा था।
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रास्ते को लेकर रामचंद्र के साथ विवाद हो गया था। कुछ देर बाद रामचंद्र अपने भाई राजेंद्र, छैलू, अपने पुत्र करुणा शंकर के साथ आ गए थे। चारों लोग गाली-गलौज करने लगे। मना करने पर रामदुलारे व उसके चाचा सिरदार की लाठी-डंडों से पिटाई कर दी थी। ग्रामीणों के आने पर हमलावर भाग गए थे। सिरदार को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया था। रास्ते में सिरदार की मौत हो गई थी। पुलिस ने चारों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी।
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अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाहों को पेश किया गया। इसके साथ ही 23 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। अभियुक्त के अधिवक्ता ने चारों को निर्दोष बताते हुए दोषमुक्त किए जाने का तर्क दिया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई।