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बिसरा खोलेगा मौत का सही राज
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 13 Mar 2015 12:22 AM IST
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अरवल क्षेत्र के बरगदापुरवा गांव में बीते दिन हुए
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हादसे में तीन की मौत का राज बिसरा की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ
होगा, पर बीती देर शाम कानपुर से आई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने कमरे
में चलने वाले जनरेटर की जांच की तो उसमें विषैली गैस अधिक मात्रा में
निकलतेे पाई।
टीम ने संभावना जताई की बंद कमरे मेें ज्यादा गैस फैलने से तीनों की मौत हुई है। जिलाधिकारी रमेश मिश्र ने बताया कि हादसे मेें तीन अन्य लखनऊ स्थित अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि बिसरा जल्द जांच को भेजा जाएगा।
इधर, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कुंवर रामबहादुर सिंह ने मृतक आश्रितोें को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा और घटना की सीबीसीआईडी से जांच कराने की मांग की। ज्ञात हो कि बरगदापुरवा गांव में सपा नेता वीरे यादव के निर्माणाधीन एक कामर्शियल भवन में बिजली की फिटिंग करने गए मजदूर और मिस्त्री समेत छह लोग मंगलवार की रात खाना खाकर कमरे में सोये थे।
सुबह सभी बेहोश मिले। आनन फानन में उन्हें जिला अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सक ने राजू, महेंद्र रैदास, कुलदीप तिवारी को मृत घोषित कर दिया था। इसके अलावा विनय, महेश व अमरपाल को गंभीर हालत में लखनऊ स्थित ट्रामा सेंटर भेजा गया।
घटना को लेकर तरह तरह की चर्चाएं थी। इस मामले में डीएम रमेश मिश्र और एसपी उमेश कुमार सिंह ने कमरे में चल रहे जनरेटर से निकली गैस के चलते हादसा होने की बात कही थी। डीएम के अनुरोध पर बीती देर शाम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के क्षेत्रीय अधिकारी डा. रामकरन, वैज्ञानिक क्षितिज पटेल और पंकज यादव की टीम ने घटनास्थल पर जाकर कमरे में रखे जनरेटर का निरीक्षण किया।
टीम के सदस्यों ने बताया कि जनरेटर 6.5 हार्स पावर का था। इसकी स्टार्टिंट पेट्रोल से होती और चलाने के लिए के रोसिन का प्रयोग होता है। पुराना जनरेटर होने से करीब 2.5 लीटर प्रति घंटा केरोसिन की खपत हो रही थी। इस जनरेटर से कार्बन डाई आक्साइड ज्यादा मात्रा में निकल रही थी।
टीम का कहना था कि बंद कमरे में यह गैस शरीर में रक्त में मिश्रित आक्सीजन से 200 गुना अधिक स्पीड से फैलती है। इसके चलते यह हादसा हुआ है। संभावना जताई जा रही कि खाना खाने के बाद सभी लोग गहरी नींद में सो गए, जिससे उन्हें इस गैस का भी आभास नहीं हुआ।
डीएम ने कहा कि वह जल्द ही बिसरा जांच को भेजेंगे। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सही स्थिति सामने आएगी। उन्होंने बताया कि टीम ने करीब चार घंटे तक जनरेटर चलाकर भी परीक्षण किया था। उधर, मृतकों के घर पर आज भी मातम छाया रहा।
टीम ने संभावना जताई की बंद कमरे मेें ज्यादा गैस फैलने से तीनों की मौत हुई है। जिलाधिकारी रमेश मिश्र ने बताया कि हादसे मेें तीन अन्य लखनऊ स्थित अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि बिसरा जल्द जांच को भेजा जाएगा।
इधर, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कुंवर रामबहादुर सिंह ने मृतक आश्रितोें को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा और घटना की सीबीसीआईडी से जांच कराने की मांग की। ज्ञात हो कि बरगदापुरवा गांव में सपा नेता वीरे यादव के निर्माणाधीन एक कामर्शियल भवन में बिजली की फिटिंग करने गए मजदूर और मिस्त्री समेत छह लोग मंगलवार की रात खाना खाकर कमरे में सोये थे।
सुबह सभी बेहोश मिले। आनन फानन में उन्हें जिला अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सक ने राजू, महेंद्र रैदास, कुलदीप तिवारी को मृत घोषित कर दिया था। इसके अलावा विनय, महेश व अमरपाल को गंभीर हालत में लखनऊ स्थित ट्रामा सेंटर भेजा गया।
घटना को लेकर तरह तरह की चर्चाएं थी। इस मामले में डीएम रमेश मिश्र और एसपी उमेश कुमार सिंह ने कमरे में चल रहे जनरेटर से निकली गैस के चलते हादसा होने की बात कही थी। डीएम के अनुरोध पर बीती देर शाम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के क्षेत्रीय अधिकारी डा. रामकरन, वैज्ञानिक क्षितिज पटेल और पंकज यादव की टीम ने घटनास्थल पर जाकर कमरे में रखे जनरेटर का निरीक्षण किया।
टीम के सदस्यों ने बताया कि जनरेटर 6.5 हार्स पावर का था। इसकी स्टार्टिंट पेट्रोल से होती और चलाने के लिए के रोसिन का प्रयोग होता है। पुराना जनरेटर होने से करीब 2.5 लीटर प्रति घंटा केरोसिन की खपत हो रही थी। इस जनरेटर से कार्बन डाई आक्साइड ज्यादा मात्रा में निकल रही थी।
टीम का कहना था कि बंद कमरे में यह गैस शरीर में रक्त में मिश्रित आक्सीजन से 200 गुना अधिक स्पीड से फैलती है। इसके चलते यह हादसा हुआ है। संभावना जताई जा रही कि खाना खाने के बाद सभी लोग गहरी नींद में सो गए, जिससे उन्हें इस गैस का भी आभास नहीं हुआ।
डीएम ने कहा कि वह जल्द ही बिसरा जांच को भेजेंगे। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सही स्थिति सामने आएगी। उन्होंने बताया कि टीम ने करीब चार घंटे तक जनरेटर चलाकर भी परीक्षण किया था। उधर, मृतकों के घर पर आज भी मातम छाया रहा।