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Hardoi News: प्रतिनिधियों और कर्मियों के पारिवारिक और रिश्तेदार नहीं पा सकेंगे रोजगार
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हरदोई। मनरेगा में अब पंचायत जनप्रतिनिधि और अधिकारी-कर्मचारी के सगे संबंधी रोजगार नहीं पा सकेंगे।
सगे संबंधियों को रोजगार देने वाले पंचायत के जनप्रतिनिधि और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। यह व्यवस्था 19 विकास खंड, 1,293 ग्राम पंचायत और लाइन विभागों में प्रभावी की गई है। मनरेगा की परियोजना पर काम करने वाले मजदूरों को भुगतान से पहले सत्यापन किया जाएगा।
मनरेगा में अब पंचायत के जनप्रतिनिधि अधिकारी-कर्मचारी अपने पारिवारिक सदस्य और रिश्तेदारों के नाम से जॉब कार्ड बनाकर अब भुगतान नहीं निकाल सकेंगे। मनरेगा मद में भी काम नहीं कर सकेंगे। मनरेगा से होने वाले कामों पर लगाए जाने वाले श्रमिकों की फोटो भी पत्रावलियों पर सुरक्षित कराई जाएंगी। अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, लेखाकार और कार्यक्रम अधिकारी इस बात का प्रमाण पत्र भी देंगे।
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मनरेगा में प्रतिनिधियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के सगे संबंधियों को रोजगार न दिए और भुगतान से पहले सत्यापन की व्यवस्था प्रभावी की गई है। इसकी जिम्मेदारी उपायुक्त श्रम रोजगार, सभी कार्यक्रम अधिकारियों और लाइन विभागों के अधिकारियों को सौंपी गई है। परियोजना पर लगाए गए मजदूरों की काम करते हुए फोटो ली जाएगी और एनएमएसएस पोर्टल पर फीड कराई जाएगी। वहीं, फोटोग्राफ पत्रावली पर भी सुरक्षित की जाएगी। साथ ही वेंडरों के सत्यापन की भी रिपोर्ट मांगी गई है। -सौम्या गुरूरानी, सीडीओ
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सामग्री आपूर्ति वाली फर्म, वेंडर और कंपनी भी जांच ली जाएं
मनरेगा में कराए जाने वाले कार्यों में ली जाने वाली सामग्री के लिए पंजीकृत फर्म, वेंडर और कंपनी आदि की भी जांच की जाएगी। कार्यक्रम अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी और लेखाकार जांच करेंगे और प्रमाण पत्र भी देंगे। सीडीओ सौम्या गुरूरानी ने बताया कि मनरेगा में व्यवस्था दी गई है कि सगे-संबंधियों की फर्म से भी आपूर्ति नहीं ली जाएगी। क्षेत्र पंचायत प्रमुख, बीडीओ, प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर और रोजगार सेवक के पारिवारिक सदस्यों और रिश्तेदारों की फर्म नहीं होनी चाहिए। फर्म और कंपनी से भी यह लोग जुड़े नहीं होने चाहिए। ऐसी फर्म से न तो सामग्री आपूर्ति ली जाएगी और न ही भुगतान किया जाएगा।
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सगे संबंधियों को रोजगार देने वाले पंचायत के जनप्रतिनिधि और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। यह व्यवस्था 19 विकास खंड, 1,293 ग्राम पंचायत और लाइन विभागों में प्रभावी की गई है। मनरेगा की परियोजना पर काम करने वाले मजदूरों को भुगतान से पहले सत्यापन किया जाएगा।
मनरेगा में अब पंचायत के जनप्रतिनिधि अधिकारी-कर्मचारी अपने पारिवारिक सदस्य और रिश्तेदारों के नाम से जॉब कार्ड बनाकर अब भुगतान नहीं निकाल सकेंगे। मनरेगा मद में भी काम नहीं कर सकेंगे। मनरेगा से होने वाले कामों पर लगाए जाने वाले श्रमिकों की फोटो भी पत्रावलियों पर सुरक्षित कराई जाएंगी। अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, लेखाकार और कार्यक्रम अधिकारी इस बात का प्रमाण पत्र भी देंगे।
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मनरेगा में प्रतिनिधियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के सगे संबंधियों को रोजगार न दिए और भुगतान से पहले सत्यापन की व्यवस्था प्रभावी की गई है। इसकी जिम्मेदारी उपायुक्त श्रम रोजगार, सभी कार्यक्रम अधिकारियों और लाइन विभागों के अधिकारियों को सौंपी गई है। परियोजना पर लगाए गए मजदूरों की काम करते हुए फोटो ली जाएगी और एनएमएसएस पोर्टल पर फीड कराई जाएगी। वहीं, फोटोग्राफ पत्रावली पर भी सुरक्षित की जाएगी। साथ ही वेंडरों के सत्यापन की भी रिपोर्ट मांगी गई है। -सौम्या गुरूरानी, सीडीओ
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सामग्री आपूर्ति वाली फर्म, वेंडर और कंपनी भी जांच ली जाएं
मनरेगा में कराए जाने वाले कार्यों में ली जाने वाली सामग्री के लिए पंजीकृत फर्म, वेंडर और कंपनी आदि की भी जांच की जाएगी। कार्यक्रम अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी और लेखाकार जांच करेंगे और प्रमाण पत्र भी देंगे। सीडीओ सौम्या गुरूरानी ने बताया कि मनरेगा में व्यवस्था दी गई है कि सगे-संबंधियों की फर्म से भी आपूर्ति नहीं ली जाएगी। क्षेत्र पंचायत प्रमुख, बीडीओ, प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर और रोजगार सेवक के पारिवारिक सदस्यों और रिश्तेदारों की फर्म नहीं होनी चाहिए। फर्म और कंपनी से भी यह लोग जुड़े नहीं होने चाहिए। ऐसी फर्म से न तो सामग्री आपूर्ति ली जाएगी और न ही भुगतान किया जाएगा।