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हर कार्य जल्द कराने को नकारात्मक सोच बदलें
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 16 Jun 2015 11:58 PM IST
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सकारात्मक सुधार संस्थान के तत्वावधान में कलक्ट्रेट
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में चकबंदी कोर्ट के समक्ष चल रहे सूचना के अधिकार का सच संबंधी शिविर में
मंगलवार को वक्ताओं ने कहा कि हर कार्य को जल्द करवाने को अब हम लोगों को
नकारात्मक सोच को बदलना होगा और बात-बात पर सुविधा शुल्क देने की प्रवृत्ति
को खत्म करना होगा।
प्रबंधक राधेेश्याम कपूर ने शिविर में आने वाले लोगों के सूचना के तहत आवेदन भरवाए। उन्होंने आवेदन भरने वालों से कहा कि अधिनियम का प्रयोग तभी करें, यदि इसका प्रयोग धरातल से जुड़ा हो। कपूर ने कहा कि जिले में विभागों से सूचना लेने के लिए शांतिपूर्वक सकारात्मक रास्ता निकालना होगा।
जिसमें हर आवेदक को संगठित रहकर संस्थान के बताए रास्ते पर अमल करने को तैयार रहना होगा। एक नकारात्मक सोच को दूर करने की आदत हम लोगों को डालनी होगी और सुविधा शुल्क देना बंद करना होगा।
जिलाध्यक्ष शिवमंगल दीक्षित ने कहा कि धारा-4 वन डी में सरकार और उसके हर अधिकारी क ी जवाबदेही तय करने के लिए, अपने हर निर्णय के लिए चाहे वह प्रशासनिक हो या न्यायिक उन कारणों को प्रभावित करने वाले व्यक्ति को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
अधिनियम की इस व्यवस्था का अभी लोग उपयोग नहीं कर रहे हैं। संभवत: इसके महत्व को अभी समझा नहीं गया है। इस मौके पर अधिवक्ता दिनेश दुबे, नानकचंद मौर्य, मुकेश बाथम, सुरेंद्र यादव और मेवाराम जनता आदि मौजूद थे।
प्रबंधक राधेेश्याम कपूर ने शिविर में आने वाले लोगों के सूचना के तहत आवेदन भरवाए। उन्होंने आवेदन भरने वालों से कहा कि अधिनियम का प्रयोग तभी करें, यदि इसका प्रयोग धरातल से जुड़ा हो। कपूर ने कहा कि जिले में विभागों से सूचना लेने के लिए शांतिपूर्वक सकारात्मक रास्ता निकालना होगा।
जिसमें हर आवेदक को संगठित रहकर संस्थान के बताए रास्ते पर अमल करने को तैयार रहना होगा। एक नकारात्मक सोच को दूर करने की आदत हम लोगों को डालनी होगी और सुविधा शुल्क देना बंद करना होगा।
जिलाध्यक्ष शिवमंगल दीक्षित ने कहा कि धारा-4 वन डी में सरकार और उसके हर अधिकारी क ी जवाबदेही तय करने के लिए, अपने हर निर्णय के लिए चाहे वह प्रशासनिक हो या न्यायिक उन कारणों को प्रभावित करने वाले व्यक्ति को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
अधिनियम की इस व्यवस्था का अभी लोग उपयोग नहीं कर रहे हैं। संभवत: इसके महत्व को अभी समझा नहीं गया है। इस मौके पर अधिवक्ता दिनेश दुबे, नानकचंद मौर्य, मुकेश बाथम, सुरेंद्र यादव और मेवाराम जनता आदि मौजूद थे।