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Hardoi News: 19 लाख खर्च के बाद भी डिजिटल एक्सरे मशीन कबाड़, नई खरीदने की तैयारी
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज में लगी डिजिटल एक्सरे मशीन बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। इस साल अब तक 19 लाख रुपये मशीन की मरम्मत के नाम पर खर्च हो गए लेकिन मशीन बीस दिन भी काम न आई। अब नई मशीन लगवाने का प्रस्ताव शासन को स्वास्थ्य विभाग भेज रहा है। दावा किया जा रहा है कि मंजूरी मिलते ही नई अत्याधुनिक डिजिटल मशीन लग जाएगी।
मेडिकल कॉलेज परिसर में डिजिटल एक्सरे मशीन तीन साल पहले लगवाई गई थी। मशीन लगने पर स्थानीय लोगों को लगा था कि जरूरत पड़ने पर मशीन का लाभ मिलेगा। अफसोस यह है कि मशीन अक्सर खराब ही रही। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर यहां पोर्टेबल एक्सरे मशीन लगाई गई। इससे आईपीडी के साथ ही गंभीर मरीजों का एक्सरे किया जाने लगा। डिजिटल एक्सरे मशीन को सही कराने की कवायद जनवरी से शुरू हुई। यह कवायद कभी तेज तो कभी धीमी रही।
जनवरी से अब तक चार बार डिजिटल एक्सरे मशीन खराब हो चुकी है। मरम्मत के नाम पर 19 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी अब पीसीबी खराब हो गया। ऐसे में एक बार फिर पोर्टेबल मशीन के सहारे मरीजों को राहत दी जा रही है। इस सबके बीच राहत देने वाली खबर यह है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नई डिजिटल मशीन खरीदने की तैयारी कर ली है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
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हर रोज 200 मरीजों का होता है एक्सरे
विभागीय सूत्र बताते हैं कि औसतन हर रोज 200 मरीजों को चिकित्सक एक्सरे लिखते हैं। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में एक्सरे निशुल्क होता है। पोर्टेबल मशीन से अधिकतम 60-70 एक्सरे ही हो पाते हैं। बाकी मरीजों को प्राइवेट सेंटर में एक्सरे कराना होता है। प्राइवेट में एक्सरे कराने पर 300 से 1200 रुपये तक खर्च होते हैं।
डिजिटल एक्सरे मशीन सही करवाने की काफी कोशिश हुई। काफी रुपये भी खर्च हुए। फिर भी मशीन दुरुस्त नहीं हो पाई। नई मशीन खरीदने के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। शासन से मंजूरी मिलते ही मशीन खरीद ली जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज परिसर में डिजिटल एक्सरे मशीन तीन साल पहले लगवाई गई थी। मशीन लगने पर स्थानीय लोगों को लगा था कि जरूरत पड़ने पर मशीन का लाभ मिलेगा। अफसोस यह है कि मशीन अक्सर खराब ही रही। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर यहां पोर्टेबल एक्सरे मशीन लगाई गई। इससे आईपीडी के साथ ही गंभीर मरीजों का एक्सरे किया जाने लगा। डिजिटल एक्सरे मशीन को सही कराने की कवायद जनवरी से शुरू हुई। यह कवायद कभी तेज तो कभी धीमी रही।
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जनवरी से अब तक चार बार डिजिटल एक्सरे मशीन खराब हो चुकी है। मरम्मत के नाम पर 19 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी अब पीसीबी खराब हो गया। ऐसे में एक बार फिर पोर्टेबल मशीन के सहारे मरीजों को राहत दी जा रही है। इस सबके बीच राहत देने वाली खबर यह है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नई डिजिटल मशीन खरीदने की तैयारी कर ली है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
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हर रोज 200 मरीजों का होता है एक्सरे
विभागीय सूत्र बताते हैं कि औसतन हर रोज 200 मरीजों को चिकित्सक एक्सरे लिखते हैं। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में एक्सरे निशुल्क होता है। पोर्टेबल मशीन से अधिकतम 60-70 एक्सरे ही हो पाते हैं। बाकी मरीजों को प्राइवेट सेंटर में एक्सरे कराना होता है। प्राइवेट में एक्सरे कराने पर 300 से 1200 रुपये तक खर्च होते हैं।
डिजिटल एक्सरे मशीन सही करवाने की काफी कोशिश हुई। काफी रुपये भी खर्च हुए। फिर भी मशीन दुरुस्त नहीं हो पाई। नई मशीन खरीदने के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। शासन से मंजूरी मिलते ही मशीन खरीद ली जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज