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Hardoi News: कार्यमुक्त होने के बाद भी वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति देने में तत्कालीन बीडीओ फंसे

Fri, 15 Nov 2024 11:13 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 15 Nov 2024 11:13 PM IST
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Even after being relieved, the then BDO got stuck in giving financial and administrative approvals.
हरदोई। जनपद के शाहाबाद और भरखनी विकास खंड में तैनाती के दौरान कार्यमुक्त होने के बाद भी मनरेगा कार्याें की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृ़ति देना तत्कालीन बीडीओ के लिए मुसीबत का सबब बन गया।
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पूरे मामले का खुलासा अमर उजाला ने 22 फरवरी के अंक में किया था। इसका संज्ञान लेकर डीएम एमपी सिंह ने जांच कराई थी। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर कार्रवाई की संस्तुति शासन में की थी। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी की पुष्टि होने पर अब शासन ने आरोप पत्र जारी कर मुरादाबाद के संयुक्त विकास आयुक्त को विस्तृत जांच के लिए नामित किया है।
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मौजूदा समय में बिजनौर में तैनात पीडीएस कैडर के अफसर मनवीर सिंह हरदोई जनपद में शाहाबाद और भरखनी में खंड विकास अधिकारी के पद पर तैनात थे। शासन ने 24 जनवरी 2024 को उनका तबादला बिजनौर कर दिया था। तबादला सूची जारी होने के बाद 30 जनवरी को वह जनपद से कार्यमुक्त हो गए थे। कार्यमुक्त होने के बाद भी 30 जनवरी की आधी रात और 31 जनवरी को भरखनी व शाहाबाद विकास खंड के मनरेगा कार्याें की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति दे दी थी।
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अमर उजाला ने इस पूरे खेल का खुलासा किया था। डीएम एमपी सिंह ने तब मनरेगा उपायुक्त रवि प्रकाश सिंह से रिपोर्ट तलब की थी। रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर स्वीकृत किए गए कार्याें पर डीएम ने रोक लगा दी थी। साथ ही शासन में मनवीर सिंह के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। अब इस मामले में मनवीर सिंह को आरोप पत्र शासन ने जारी किया है। पूरे प्रकरण की जांच संयुक्त विकास आयुक्त मुरादाबाद को सौंपी है।



आठ ग्राम पंचायतों के 29 कार्याें पर खर्च होने थे 83 लाख रुपये
शाहाबाद विकास खंड की चार ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्याें के 10 आगणनों को वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति कार्यमुक्त होने के बाद दिए जाने की पुष्टि हुई थी। इन कार्याें पर 32,16,914 रुपये खर्च होने थे। इसी तरह भरखनी विकास खंड के चार गांवों के 19 आगणनों को भी स्वीकृति दे दी थी। इन कार्याें पर 51,09,952 रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी गई थी। हालांकि, तबादला आदेश आने के बाद भी लगभग एक करोड़ रुपये के कार्याें की की वित्तीय और स्वीकृति दी गई थी, लेकिन कार्यमुक्त होने से पहले ही यह स्वीकृतियां दिए जाने का जवाब दाखिल कर इस आरोप से तत्कालीन बीडीओ बच गए।
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