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राष्ट्र व समाज को सभ्य व समृद्ध बना सकती समानता
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फोटो-1-श्री सरस्वती सदन के सारस्वत सम्मान समारोह में वाणी पत्रिका का विमोचन करते सेवानिवृत्त न्य?
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। महिलाओं को समानता के अवसर देकर ही राष्ट्र व समाज को सभ्य एवं समृद्ध बनाया जा सकता है। शनिवार को रफी अहमद किदवई इंटर कालेज में साहित्यिक संस्था श्री सरस्वती सदन के सारस्वत सम्मान में मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति खेमकरन ने उक्त बात कही।
उन्होंने कहा कि समाज हित में ऐसी संस्थाओं की आवश्यकता है। राज्यसभा के संयुक्त सचिव महेश चंद्र तिवारी ने पुस्तकालयों को देश व समाज व मानव के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। कहा कि तक्षशिला और नालंदा जैसे समृद्ध पुस्तकालय भारतीय ज्ञान के भंडार थे। संयुक्त सचिव ने कहा कि किसी देश या शहर की सांस्कृतिक समृद्ध उसके पुस्तकालयों में झलकती है।
पूर्व जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह राठौर ने सेवाकाल के दौरान से लेकर वर्तमान व जिले से अपने जुड़ाव को रेखांकित किया। साहित्यकार फरीद उद्दीन अहमद ने कहा कि इतिहास जाने अनजाने पहलुओं का रेखांकर राष्ट्र व समाज की तत्कालीन सुनहरी यात्रा का साक्षी होता है। प्रधानमंत्री कार्यालय दिल्ली के आडिट एंड एकाउंट में अंडर सेकेट्री रोली शुक्ला की अनुपस्थिति में उनके भाई अभयशंकर शुक्ल ने सरस्वती सम्मान ग्रहण किया।
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वाणी पत्रिका संपदाक कंचन बाजपेई ने आधी आबादी अर्थात महिलाओं की प्रगति के लिए बेटियों की शिक्षा और नारियों को खुले अवसर देने की बात कही। सदन अध्यक्ष अरुणेश बाजपेई ने सदन व हिंदी के विकास के प्रति अपने संकल्पों को दोहराया। रिपोर्ट मनीष कुमार मिश्रा ने प्रस्तुत की। संचालन महेश मिश्रा ने किया।
आभार अनिल श्रीवास्तव ने जताया। इस दौरान अतिथियों को स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया गया व वाणी पत्रिका विमोचन किया गया। इस मौके पर न्यूरो सर्जन डॉ. आईसी प्रेमसागर, प्रोफेसर अखिलेश बाजपेई, श्रवण कुमार मिश्रा, कुलदीप द्विवेदी, अतुल टंडन, गिरीश डिडवानिया, सरिता अग्रवाल, सीमा मिश्रा, डॉ. अमित कुमार वर्मा, रामनंदनी तिवारी, ऋषि तिवारी, दीपक दुबे आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि समाज हित में ऐसी संस्थाओं की आवश्यकता है। राज्यसभा के संयुक्त सचिव महेश चंद्र तिवारी ने पुस्तकालयों को देश व समाज व मानव के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। कहा कि तक्षशिला और नालंदा जैसे समृद्ध पुस्तकालय भारतीय ज्ञान के भंडार थे। संयुक्त सचिव ने कहा कि किसी देश या शहर की सांस्कृतिक समृद्ध उसके पुस्तकालयों में झलकती है।
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पूर्व जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह राठौर ने सेवाकाल के दौरान से लेकर वर्तमान व जिले से अपने जुड़ाव को रेखांकित किया। साहित्यकार फरीद उद्दीन अहमद ने कहा कि इतिहास जाने अनजाने पहलुओं का रेखांकर राष्ट्र व समाज की तत्कालीन सुनहरी यात्रा का साक्षी होता है। प्रधानमंत्री कार्यालय दिल्ली के आडिट एंड एकाउंट में अंडर सेकेट्री रोली शुक्ला की अनुपस्थिति में उनके भाई अभयशंकर शुक्ल ने सरस्वती सम्मान ग्रहण किया।
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वाणी पत्रिका संपदाक कंचन बाजपेई ने आधी आबादी अर्थात महिलाओं की प्रगति के लिए बेटियों की शिक्षा और नारियों को खुले अवसर देने की बात कही। सदन अध्यक्ष अरुणेश बाजपेई ने सदन व हिंदी के विकास के प्रति अपने संकल्पों को दोहराया। रिपोर्ट मनीष कुमार मिश्रा ने प्रस्तुत की। संचालन महेश मिश्रा ने किया।
आभार अनिल श्रीवास्तव ने जताया। इस दौरान अतिथियों को स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया गया व वाणी पत्रिका विमोचन किया गया। इस मौके पर न्यूरो सर्जन डॉ. आईसी प्रेमसागर, प्रोफेसर अखिलेश बाजपेई, श्रवण कुमार मिश्रा, कुलदीप द्विवेदी, अतुल टंडन, गिरीश डिडवानिया, सरिता अग्रवाल, सीमा मिश्रा, डॉ. अमित कुमार वर्मा, रामनंदनी तिवारी, ऋषि तिवारी, दीपक दुबे आदि मौजूद रहे।