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Hardoi News: पोषण पुनर्वास केंद्र पर बढ़े आठ बेड, 18 बेड की हुई क्षमता
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज के महिला चिकित्सालय में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में कम बेड की समस्या अब समाप्त हो गई है।
केंद्र अभी तक 10 बेड की क्षमता के साथ संचालित हाे रहा था, जिससे कई बार बेड कम पड़ने की वजह से एक बेड पर दो बच्चे भर्ती होते थे, लेकिन अब पोषण पुनर्वास केंद्र की क्षमता बढ़ गई है। पोषण पुनर्वास केंद्र को बेड और स्थान मिल जाने से अतिकुपोषित बच्चाें को आसानी से भर्ती किया जा सकेगा।
पांच से कम उम्र के बच्चों में अतिकुपोषण से बचाव को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) संचालित हैं। उम्र के हिसाब से लंबाई और वजन कम होने पर अतिकुपोषित बच्चे 14 दिनों के लिए भर्ती किए जाते हैं। इस दौरान बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार दूध, अंडा, केला, दलिया व खिचड़ी आदि दिया जाता है। नियमानुसार वजन बढ़ने पर डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
मेडिकल कॉलेज के जिला महिला चिकित्सालय भवन में पोषण पुनर्वास केंद्र पर 10 बेडों के साथ संचालित किया गया। करीब आठ वर्षों से केंद्र पर बेड नहीं बढ़ाए गए। इस वजह से केंद्र पर बच्चे बढ़ने पर एक बेड पर दो बच्चों को भर्ती करना पड़ता था। जिलाधिकारी ने बेड बढ़ाने की स्वीकृति दी थी, लेकिन स्थान नहीं मिल रहा था। एनआरसी की इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाकर 27 सितंबर के अंक में प्रकाशित किया। इसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर अब महिला चिकित्सालय में एक कक्ष उपलब्ध करवा दिया और आठ बेड लगाकर केंद्र संचालित कर दिया गया है।
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हरदोई। पोषण पुनर्वास केंद्र को वैसे तो पांच बेडोंं की स्वीकृति मिली थी, लेकिन बेहतर स्थान मिल जाने पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के निर्देश पर तीन बेड और मंगलवार को आठ बेड का वार्ड तैयार कर दिया गया है। इससे अब अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती करने में परेशानी नहीं आएगी। अभी तक अति कुपोषित 10 बच्चे ही भर्ती हो रहे हैं, लेकिन अब केंद्र की क्षमता बढ़ने से अधिक बच्चों की देखभाल आसानी से की जा सकेगी।
पोषण पुनर्वास केंद्र नए कक्ष में बेड लगवाकर संचालन कर दिया गया है। अब केंद्र 18 बेड की क्षमता का हो गया है, जिससे अति कुपोषित बच्चाें को बेहतर ढंग से पोषण करा जा सकेगा। -डाॅ. सुबोध कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय
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केंद्र अभी तक 10 बेड की क्षमता के साथ संचालित हाे रहा था, जिससे कई बार बेड कम पड़ने की वजह से एक बेड पर दो बच्चे भर्ती होते थे, लेकिन अब पोषण पुनर्वास केंद्र की क्षमता बढ़ गई है। पोषण पुनर्वास केंद्र को बेड और स्थान मिल जाने से अतिकुपोषित बच्चाें को आसानी से भर्ती किया जा सकेगा।
पांच से कम उम्र के बच्चों में अतिकुपोषण से बचाव को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) संचालित हैं। उम्र के हिसाब से लंबाई और वजन कम होने पर अतिकुपोषित बच्चे 14 दिनों के लिए भर्ती किए जाते हैं। इस दौरान बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार दूध, अंडा, केला, दलिया व खिचड़ी आदि दिया जाता है। नियमानुसार वजन बढ़ने पर डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज के जिला महिला चिकित्सालय भवन में पोषण पुनर्वास केंद्र पर 10 बेडों के साथ संचालित किया गया। करीब आठ वर्षों से केंद्र पर बेड नहीं बढ़ाए गए। इस वजह से केंद्र पर बच्चे बढ़ने पर एक बेड पर दो बच्चों को भर्ती करना पड़ता था। जिलाधिकारी ने बेड बढ़ाने की स्वीकृति दी थी, लेकिन स्थान नहीं मिल रहा था। एनआरसी की इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाकर 27 सितंबर के अंक में प्रकाशित किया। इसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर अब महिला चिकित्सालय में एक कक्ष उपलब्ध करवा दिया और आठ बेड लगाकर केंद्र संचालित कर दिया गया है।
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हरदोई। पोषण पुनर्वास केंद्र को वैसे तो पांच बेडोंं की स्वीकृति मिली थी, लेकिन बेहतर स्थान मिल जाने पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के निर्देश पर तीन बेड और मंगलवार को आठ बेड का वार्ड तैयार कर दिया गया है। इससे अब अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती करने में परेशानी नहीं आएगी। अभी तक अति कुपोषित 10 बच्चे ही भर्ती हो रहे हैं, लेकिन अब केंद्र की क्षमता बढ़ने से अधिक बच्चों की देखभाल आसानी से की जा सकेगी।
पोषण पुनर्वास केंद्र नए कक्ष में बेड लगवाकर संचालन कर दिया गया है। अब केंद्र 18 बेड की क्षमता का हो गया है, जिससे अति कुपोषित बच्चाें को बेहतर ढंग से पोषण करा जा सकेगा। -डाॅ. सुबोध कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय