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मुंह से पेंटिंग बना नजीर पेश कर रहा नंदराम

Tue, 09 Feb 2021 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 11:45 PM IST
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मुंह से पेंटिंग बनाता नि:शक्त नंदराम। संवाद - फोटो : HARDOI
हरदोई। कुछ करने की लगन हो तो बिना हाथ पैर के भी इंसान वह करके दिखा सकता जो शायद पूरी तरह से स्वस्थ मनुष्य भी नहीं कर सकता। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ग्राम आशा के निशक्त नंदराम है जो मुंह से पेंटिंग बनाकर न सिर्फ अपने आप का सक्षम साबित कर रहा है, बल्कि दूसरों के लिए भी नजीर पेश कर रहा है।
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शहर से सटे ग्राम आशा निवासी रामगोपाल कश्यप मंडी में मजदूरी आदि करके अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। उनके दो पुत्र व पांच पुत्रियां हैं। तीन पुत्रियों का विवाह कर चुके हैं। घर में दो पुत्रियां व एक पुत्र हैं। इन बच्चों में एक हैं नंदराम। बचपन से ही नंदराम हाथ और पैर से निशक्त हैं। माता-पिता ने सामर्थ्य अनुसार सब कुछ करके देख लिया, लेकिन सारी कोशिशें नाकाम रहीं। हार मानकर वह बस घर में ही अपना जैसे तैसे जीवन व्यतीत कर रहा था। उसी गांव के सेवानिवृत्त सैन्य कर्मी जो आज कल सीएस एकेडमी के प्रबंधक हैं कमलेश कुमार सिंह की नजर इस बच्चे पर पड़ गई। उनका कहना है कि उसको गुमसुम देख उनका मन हमेशा द्रवित हो जाता। उसके लिए वह कुछ न कुछ करने का प्रयास करने लगे। माता-पिता की मानें तो अन्य बच्चों की कापी किताबें देख अक्सर वह उनकी तरफ देखता रहता। इसके बाद उन्होंने कापी व पेंसिल उसके सामने रखी तो उसने मुंह से पेंसिल दबाकर लिखने का प्रयास किया।
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जब यह बात सैन्य कर्मी को पता लगी तो उसे अपने स्कूल बुलाने लगे। काउंसलिंग करके उन्हें पता लगा कि वह पेंटिंग बनाना चाहता है। उसे रंग व चार्ट पेपर दिया गया तो वह बखूबी धीरे-धीरे उसे बनाने लगा। इसको देखकर प्रबंधक का कहना है कि कोई दो राय नहीं ईश्वर ने उसे असीम क्षमता दी है। इसके सहारे वह प्रयास कर रहा है और खुद को साबित कर रहा है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को हुई प्रतियोगिता में भी सभी बच्चों के साथ उसने प्रयास किया और अपनी सामर्थ्य के अनुसार बहुत बेहतर प्रदर्शन किया। चित्रकला प्रतियोगिता मेें उसे सांत्वना पुरस्कार मिला।
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प्रबंधक का कहना है कि वह अपनी तरफ से जो कर सकते हैं वह कर रहे हैं। उसका कक्षा सात में प्रवेश कराया है। पढ़ना लिखना भी उसने शुरू किया है। किताबें पढ़ने का प्रयास करने लगा है। सबसे अच्छी बात अब वह गुमसुम नहीेें रहता। पेंटिंग जब तल्लीन होकर वह बनाता है तो दूसरों के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है।
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